महाराष्ट्र के गढ़चिरौली के एक आवासीय स्कूल में तीन छात्राओंं की मौत हो गई है. आरोप है कि छात्राएं जमीन पर सो रहीं थीं और जहरीले सांप के काटने से उनकी मौत हो गई. कुछ और छात्राओं का भी अस्पताल में इलाज चल रहा है. अभी प्रशासन की ओर से इस मामले की जांच की जा रही है. इस घटना के बाद सवाल उठता है कि सांप के काटने से मौत कैस हो जाती है. क्यों कुछ मामलों में डॉक्टरों के लिए मरीज की जान बचाना मुश्किल हो जाता है.
पहले आप सांप के काटने की घटनाओं पर WHO के इस डाटा को पढ़िए. इसके मुताबिक, दुनिया भर में हर साल लगभग 54 लाख लोगों को सांप काटते हैं, जिनमें से 18 लाख से 27 लाख मामलों में ज़हर शरीर में फैलता है. सांप के काटने से हर साल लगभग 81,410 से 1,37,880 लोगों की मौत होती है, और इतने ही लोगों के अंगों को काटना पड़ता है या उन्हें हमेशा के लिए कोई न कोई दिव्यांगता हो जाती है. खेती-बाड़ी करने वाले लोग और बच्चे इससे सबसे अधिक प्रभावित होते हैं. बच्चों का शरीर छोटा होने के कारण उन पर इसका असर अक्सर बड़ों की तुलना में ज्यादा गंभीर होता है
सांप के काटने से शरीर में क्या होता है?
इस दुखद घटना और सांप के काटने से जुड़े मेडिकल पहलुओं पर वरिष्ठ चिकित्सक डॉ राजेश का कहना है कि जब जहरीला सांप काटता है, तो इसका जहर इतना तेज होता है कि ये सीधे नर्वस सिस्टम पर हमला कर सकता है. इससे मरीज को सुस्ती आने लगती है,आंखों की पलकें झुकने लगती हैं ,मांसपेशियों में कमजोरी आती है और सांस लेने वाली नसें ब्लॉक हो जाती हैं.
डॉ राजेश कहते हैं कि जहरीले सांप के काटने के लिए एंटीवेनम ही एकमात्र ऐसा इलाज है जो जान बचा सकता है, लेकिन ऐसे मामलों में अस्पताल पहुंचने में आप जितनी देर करेंगे, इसके असरदार होने की संभावना उतनी ही कम हो जाएगी, इसलिए ऐसी घटना में जल्द से जल्द मेडिकल मदद लेनी चाहिए, इलाज मे देरी मौत का कारण बन सकती है.
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अस्पताल पहुंचने के बाद भी कैसे हो जाती है मौत
जहरीले सांप के काटने से मौत तब होती है जब जहर पूरे शरीर में फैल जाता है. जब इसका असर नर्वस सिस्टम पर होता है तो मरीज को लकवा हो जाता है. सांप का जहर फेफड़ों को कंट्रोल करने वाली नसों पर भी अटैक कर दैता है. सांस की नसें ब्लॉक हो जाती हैं, इसके कारण सांस लेने में दिक्कत होने लगती है. ये सभी समस्याएं जानलेवा होती है. ऐसा सांप के जहर में मौजूद खतरनाक टॉक्सिन्स की वजह से होता है, जो नर्वस सिस्टम से लेकर शरीर के दूसरे जरूरी अंगों पर हमला करता है. .
कई मामलों में अस्पताल पहुंचने के बाद भी मरीज की जान नहीं बच पाती है. इसका कारण होता है कि मरीज देरी से अस्पताल पहुंचते हैं. ऐसे में जहर का असर पूरे शरीर में फैल चुका होता है. अगर मरीज को सही समय पर वेंटिलेटर ) न मिले, तो एंटी-स्नेक वेनम (ASV) देने के बावजूद मरीज का दम घुट जाता है. जो मौत का कारण बनता है.
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सांप के काटने पर क्या 'गलतियां' न करें?
सफदरजंग अस्पताल में रेजिडेंट डॉ. दीपक कुमार बताते हैं कि सांप के काटे गए हिस्से को रस्सी या कपड़े से कसकर बांध देते हैं, जिससे उस अंग का ब्लड सर्कुलेशन रुक जाता है और नुकसान ज्यादा होता है. कुछ लोग घाव पर चीरा लगाना या मुंह से जहर चूसते हैं. यह पूरी तरह गलत है.
जब भी किसी को सोते समय अचानक पेट में तेज दर्द, उल्टी या सांस फूलने की शिकायत हो (चाहे सांप देखा गया हो या नहीं), तो उसे तुरंत एंटी-वेनम और वेंटिलेटर सुविधा वाले अस्पताल ले जाएं. इस मामले में थोड़ी से भी देरी न करें. समय पर अस्पताल जाने से गंभीर स्थिति को होने से रोका जा सकता है.