खानपान की गलत आदतों और बिगड़े हुए लाइफस्टाइल के कारण लोगों को फैटी लिवर की बीमारी हो रही है. फैटी लिवर ग्रेड-1, 2 और 3 का होता है. ग्रेड-1 खतरे की बात नहीं है, लेकिन ग्रेड -2 में सेहत पर ध्यान देना जरूरी है. नहीं तो अगर ये ग्रेड-3 में चला गया तो इसको रिवर्स करना मुश्किल हो जाता है. डॉक्टर बताते हैं कि ग्रेड -2 तक के फैटी लिवर को रिवर्स किया जा सकता है. इसके लिए बस कुछ बातों पर ध्यान देने की जरूरत है.
डॉक्टरों के मुताबिक, फैटी लिवर वह स्थिति है जब लिवर के कुल वजन का 5% से 10% से अधिक हिस्सा वसा फैट से भर जाता है. जितना अधिक फैट बढता है ग्रेड में उतना ही इजाफा होने लगता है. अगर ये बहुत बढ़ जाता है को लिवर पर सूजन से लेकर फिर लिवर सिरोसिस तक की बीमारी हो जाती है.
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ग्रेड-2 फैटी है तो क्या करें?
इस बारे में अपोलो अस्पताल में फिजिशियन डॉ चिन्मय गुप्ता बताते हैं कि ग्रेड 2 फैटी लिवर (मॉडरेट हेपेटिक स्टीटोसिस) को लाइफस्टाइल में बदलाव करके ठीक किया जा सकता है. इसका मुख्य मकसद लिवर में फैट कम करना और आगे चलकर लिवर में होने वाली सूजन व फाइब्रोसिस को रोकना है. इसके लिए ये कुछ तरीके अपना सकते हैं.
अगर आपक वजन अधिक है, तो शरीर के वजन का 7–10% धीरे-धीरे कम करने का लक्ष्य रखे. इसके साथ ही डाइट का भी ध्यान रखें. अपने खाने में फल, साबुत अनाज, दालें, लीन प्रोटीन, नट्स शामिल करें. चीनी, मिठाइयां, सॉफ्ट ड्रिंक्स और प्रोसेस्ड मीट कम करें. हफ्ते में कम से कम 150 मिनट मॉडरेट एक्सरसाइज करें, जैसे तेज़ से चलना और साथ ही हफ्ते में 2–3 बार स्ट्रेंथ ट्रेनिंग करें शराब से बचें या इसे कम से कम लें, खासकर तब जब लिवर एंजाइम का स्तर बढ़ा हुआ हो.दूसरी बीमारियां जैसे डायबिटीज, कोलेस्ट्रॉल, ब्लड प्रेशर और मोटापे को कंट्रोल में रखें.
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क्या दवाओं की है जरूरत?
ग्रेड 2 फैटी लिवर के लिए आमतौर पर किसी खास दवा की जरूरत नहीं होती है. अगर लिवर में सूजन या फाइब्रोसिस हो, तो खास दवाओं पर विचार किया जा सकता है.इसके साथ ही डॉक्टर से नियमित रूप से फॉलो-अप कराने की सलाह दी जाती है.