कभी-कभी देर रात में भूख लगने पर खाना आम बात है, लेकिन अगर आपको रात में ही ज्यादा भूख लगती है और दिन की तुलना में रात में अधिक खाते हैं तो इसको आम बात ना समझें. डॉक्टरों का कहना है कि अगर ऐसा हर दिन हो रहा है तो फिर इसको हल्के में ना ले. खासतौर पर अगर रात में खाने के लिए नींद भी खुल रही है तो फिर यह एक बीमारी हो सकती है. इसको मेडिकल की भाषा में नाइट ईटिंग सिंड्रोम कहते हैं.
यह बीमारी क्या है. क्यों होती है और इससे कैसे बचाव किया जा सकता है यह जानते हैं. नाइट ईटिंग सिंड्रोम एक ईटिंग डिसऑर्डर है जो नींद की समस्या के साथ होता है. अगर आपको नाइट ईटिंग सिंड्रोम है, तो आप रात में एक या दो बार कुछ न कुछ खाने के लिए उठते हैं. इसमें आपका शरीर आपको जगा देता है ताकि आप कुछ खा सकें.
आपको मीठा और अधिक कार्बोहाइड्रेट वाला खाना खाने का मन करता है. जैसे चॉकलेट, बिस्किट. चिप्स या सैंडविच आप खाते हैं या इसको रात में ही ऑनलाइन ऑर्डर करके मंगाते हैं. इससे सुबह उठने पर आपको आराम महसूस नहीं होता और नाश्ता करने का भी खास मन नहीं करता है. रात में ज्यादा खाने, नींद कम आने और सुबह नाश्ता ना करने से आप दिन में उम्मीद के मुताबिक काम नहीं कर पाते हैं.
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नाइट ईटिंग सिंड्रोम क्यों होता है?
इस बारे में लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज में मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. एलएच घोटेकर ने बताया है. वह कहते हैं कि नाइट ईटिंग सिंड्रोम के पीछे कई कारण हो सकते हैं. अगर यह आपके परिवार में पीढ़ी-दर-पीढ़ी चल सकता है, जिसका मतलब है कि इसका जेनेटिक कनेक्शन हो सकता है. कई मामलों में इसका बड़ा कारण मानसिक तनाव होता है. आपने देखा होगा कि स्ट्रेस होने पर आपके लक्षण और बिगड़ जाते हैं और आप ज्यादा खाते है. ऐसा भी होता है कि अगर आपको दिन में पर्याप्त खाना नहीं मिलती है, या किसी कारण नहीं खाते हैं तो आपको रात में भूख लगने और खाने की संभावना ज़्यादा होती है.
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नाइट ईटिंग सिंड्रोम का इलाज कैसे किया जाता है?
डॉ. घोटेकर कहते हैं कि पहले यह समझना होगा कि यह सिंड्रोम है या नहीं. अगर रोज रात को ज्यादा भूख लग रही है, सोने के बाद बीच में नींद खुलने के बाद भी कुछ न कुछ खा रहे हैं तो समधं कि आपको नाइट ईटिंग सिंड्रोम हो गया है. इस मामले में डॉक्टर से सलाह लें .
डॉक्टर आपको कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी से मदद देंगे, यह एक तरह की बातचीत वाली थेरेपी है जो आपको कुछ खास व्यवहारों को समझने और बेहतर आदतें अपनाने में मदद कर सकती है. इसके अलावा कुछ मामलों में एंटीडिप्रेसेंट दवाएं भी दी जाती हैं. कुछ मामलों में डॉक्टर प्रोग्रेसिव मसल रिलैक्सेशन की सलाह भी देते हैं. यह मांसपेशियों को आराम देने, तनाव कम करने और शरीर को सोने के लिए तैयार करने का एक तरीका है