बीते कुछ सालों में हार्ट की बीमारियां काफी बढ़ रही है. इनसे बचाव के लिए डॉक्टर कोलेस्ट्रॉल का टेस्ट कराने की सलाह देते हैं. खासतौर पर 35 साल से अधिक उम्र वालों को ये कराना चाहिए. अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन और एनएचएलबीआई के अनुसार, कुछ लोगों में दिल की बीमारियों का रिस्क ज्यादा होता हैं. चूंकि बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल हार्ट की बीमारियों का एक रिस्क फैक्टर है तो समय पर कोलेस्ट्रॉल की जांच होनी चाहिए. इससे हार्ट अटैक के रिस्क से बचाव किया जा सकता है.
दिल्ली के मूलचंद हॉस्पिटल में कार्डियोलॉजी डिपार्टमेंट में प्रोफेसर डॉ. तरुण कुमार ने इस बारे में बताया है. वह कहते हैं कि ये बहुत जरूरी है कि आपके शरीर में कोलेस्ट्रॉल का लेवल नॉर्मल रहे. ये अगर ठीक है तो दिल की कई बीमारियों से बचाव हो जाता है. हालांकि हार्ट डिजीज के कई दूसरे कारण भी होते हैं, लेकिन फिर भी कोलेस्ट्रॉल का कंट्रोल में रहना जरूरी है. चूंकि अब पहले की तुलना में हार्ट की बीमारियां काफी बढ़ गई हैं तो बचाव के लिए टेस्ट भी जरूरी हो गया है. अब 35 साल से अधिक उम्र वालों को कोलेस्ट्रॉल का लेवल पता करने के लिए लिपिड प्रोफाइल टेस्ट जरूरी है. इसके अलावा कई दूसरे लोगों को भी ये जांच करा लेनी चाहिए.
इन लोगों को भी करा लेना चाहिए कोलेस्ट्रॉल का टेस्ट
जिन लोगों का वजन सामान्य से अधिक है
डायबिटीज के मरीज
हाई बीपी, किडनी के मरीज
परिवार में हार्ट डिजीज की हिस्ट्री
धूम्रपान और शराब का सेवन करने वाले लोग
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कोलेस्ट्रॉल को का लेवल कितना होना चाहिए
शरीर में कुल कोलेस्ट्रॉल का लेवल 200 mg/dL से कम होना चाहिए. 200-239 mg/dL बॉर्डरलाइन और 240 mg/dL या उससे ज्यादा कोई बढ़ा हुआ टोटल कोलेस्ट्रॉल माना जाता है. इसके अलावा एलडीएल 100 mg/dL से कम होना चाहिए.वहीं, एचडीएल 40 mg/dL से ज्यादा हो.
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कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल में कैसे रखें
रोजाना आधा घंटा एक्सरसाइज जरूर करें
अधिक तला भुना खाने से बचें
फास्ट फूड कम खाएं
ज्यादा तेल भी न खाएं