करवा चौथ के मौके पर राजस्थान के पाली में एक ऐसा मेला लगा, जहां सजावट के सामान से लेकर घर पर बने बिस्कुट, आइसक्रीम और दूसरे खाद्य उत्पादों तक की प्रदर्शनी लगाई गई. इस मेले की खास बात यह है कि यहां ऐसे स्थानीय उत्पादों को जगह दी गई, जिन्हें महिलाएं अपने घरों में तैयार करती हैं. इनमें से कई महिलाओं के पास अपनी दुकान नहीं है. वे अपने स्तर पर सामान बनाती हैं और ग्राहकों तक पहुंचने की कोशिश करती हैं.
इस मेले का मकसद ऐसी महिलाओं को अपनी पहचान बनाने का मौका देना है. यहां एक ओर हाथ से सजावटी सामान तैयार करने वाले लोग हैं, तो दूसरी ओर खुशबू सोनी जैसी महिलाएं भी हैं, जिन्होंने बैंक की नौकरी छोड़कर घर से खाद्य उत्पाद बनाने और बेचने का काम शुरू किया है.
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पाली में एक भाई-बहन मिलकर सजावटी सामान बनाने का कारोबार चला रहे हैं. उनके यहां तोरण, बंदरवाल और त्योहारों के साथ-साथ शादी-ब्याह में इस्तेमाल होने वाली सजावटी चीजें तैयार की जाती हैं. नारियल और गिफ्ट की पैकिंग को भी आकर्षक रूप दिया जाता है. इन उत्पादों को खास डिजाइन और सजावट के साथ तैयार किया जाता है.
इसके लिए वे अलग-अलग आयोजनों में जाकर नए आइडिया तलाशते हैं और फिर अपने हिसाब से डिजाइन बनाते हैं. इस कारोबार से करीब छह महिलाओं को रोजगार मिल रहा है. तैयार सामान की सप्लाई देश के अलग-अलग हिस्सों में थोक कारोबारियों तक भी की जाती है.इस तरह घर से शुरू हुआ काम सिर्फ सामान बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि दूसरे लोगों के लिए रोजगार का जरिया भी बन रहा है.
पर्यावरण को ध्यान में रखकर बना रहीं सजावटी सामान
मेले में ऐसे सजावटी उत्पाद भी लाए गए, जिन्हें बनाने वाली महिलाएं पर्यावरण का ध्यान रखने की बात कहती हैं. उनका मकसद ऐसे सामान तैयार करना है, जो त्योहारों और घर की सजावट में इस्तेमाल हो सकें. हालांकि, किसी उत्पाद को पर्यावरण के अनुकूल बताने के लिए यह देखना जरूरी है कि उसे बनाने में किन सामग्रियों का इस्तेमाल हुआ है और क्या उसे दोबारा इस्तेमाल किया जा सकता है. मेले में इस तरह के उत्पादों को ग्राहकों के सामने रखने का मौका मिल रहा है. ऐसे आयोजनों से स्थानीय स्तर पर काम करने वाले लोगों को अपने उत्पाद दिखाने और ग्राहकों से सीधे जुड़ने का अवसर मिलता है.
इस मेले में खुशबू सोनी की कहानी भी खास है. खुशबू पहले बैंक में नौकरी करती थीं. लेकिन अपनी पहचान बनाने और आत्मनिर्भर बनने के लिए उन्होंने नौकरी छोड़ने का फैसला किया. इसके बाद उन्होंने कुकिंग क्लास जॉइन की और घर पर अलग-अलग खाद्य उत्पाद बनाने का काम शुरू किया. अब वह बिस्कुट, आइसक्रीम, पान और मुरब्बे जैसे उत्पाद तैयार करती हैं. खुशबू अपने उत्पाद खुद बनाती हैं और उन्हें बेचने के लिए मार्केटिंग भी खुद करती हैं.
इसी सिलसिले में वह इस मेले तक पहुंचीं, ताकि अपने सामान को ज्यादा लोगों तक पहुंचा सकें. नौकरी छोड़कर अपना काम शुरू करना हर किसी के लिए आसान फैसला नहीं होता. इसमें कमाई की अनिश्चितता से लेकर ग्राहक बनाने तक का चैलेंज होता है. खुशबू के लिए भी अपने उत्पादों को बाजार तक पहुंचाना इस सफर का अहम हिस्सा है.
घर के काम के साथ कारोबार, पहचान बनाने की कोशिश
घर से काम करने वाली महिलाओं के लिए कारोबार शुरू करना सिर्फ उत्पाद बनाने तक सीमित नहीं होता. उन्हें सामान तैयार करने के साथ उसकी कीमत तय करनी होती है, ग्राहकों तक पहुंचना होता है और बिक्री का इंतजाम भी करना पड़ता है. कई महिलाओं के पास अपनी दुकान खोलने या बड़े स्तर पर विज्ञापन करने के साधन नहीं होते. ऐसे में स्थानीय मेले उन्हें अपने उत्पादों को लोगों के सामने रखने का अवसर देते हैं.
पाली में आयोजित इस मेले में सजावटी सामान बनाने वालों से लेकर घर पर खाद्य उत्पाद तैयार करने वाली महिलाओं तक को जगह मिली है. यहां ग्राहक सीधे उत्पाद देख सकते हैं और उन्हें बनाने वालों से बातचीत कर सकते हैं. इस आयोजन का उद्देश्य महिलाओं को सम्मान देने के साथ-साथ उनके बनाए सामान के लिए बाजार उपलब्ध कराना है. मेले में स्थानीय उत्पादों की प्रदर्शनी लगाई गई, ताकि घर से काम करने वाली महिलाओं को नए ग्राहक मिल सकें.
मेले में सजावटी सामान, गिफ्ट पैकिंग और घर पर तैयार किए गए खाद्य उत्पादों की मौजूदगी इसे अलग बनाती है. यह उन लोगों के लिए भी एक मौका है, जो अपना छोटा कारोबार शुरू कर चुके हैं, लेकिन अभी अपने उत्पादों को बड़े बाजार तक नहीं पहुंचा पाए हैं. फिलहाल यह पहल स्थानीय महिलाओं को अपने हुनर और उत्पाद दिखाने के लिए एक मंच उपलब्ध करा रही है. इसका लंबे समय तक कितना फायदा मिलता है, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि महिलाओं को कितने नए ग्राहक मिलते हैं और वे अपने कारोबार को आगे कितना बढ़ा पाती हैं.