बीजिंग में हुई हाइड्रोक्स प्रतियोगिता में ऑस्ट्रेलियाई एथलीट जोआना विएत्रज़िक का रेस के दौरान मल निकल गया. इस घटना ने सोशल मीडिया पर खूब चर्चा बटोरी है. लेकिन मेडिकल नजरिए से सवाल यह है कि एथलीट तो इतनी कड़ी एक्सरसाइज करते हैं. उनका अपने शरीर पर कंट्रोल भी बहुत अच्छा रहता है, तो उनके साथ ऐसा क्या हुआ कि वह अपना मल कंट्रोल नहीं कर पाईं?
हाई इंटेंसिटी रेस में एथलीट अपने शरीर को लगभग आखिरी लिमिट तक पुश करते हैं. इस दौरान शरीर पर कुछ मामलों में काफी प्रेशर पड़ता है. रेस या किसी हाई इंटेंसिटी वाली एक्सरसाइज के दौरान लंग्स हार्ट तक जरूरत के हिसाब से ब्लड फ्लो करते रहते हैं. लगातार ऐसा होने से कई बार इसका सीधा असर शरीर के पाचन तंत्र पर पड़ जाता है. इससे आंतों की एक्टिविटी बढ़ जाती है. कुछ मामलों में पेट में मरोड़, दस्त या अचानक मल त्याग की इच्छा हो सकती है. कई एथलीट इसको कंट्रोल कर लेते हैं, लेकिन कुछ ऐसा नहीं कर पाते हैं.
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किसी भी प्रतियोगिता से पहले हाइड्रेशन का ध्यान रखना जरूरी
दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में स्पोर्ट्स इंजरी विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. राहुल ग्रोवर ने इस बारे में बताया है. वह कहते हैं कि अगर रेस या किसी प्रतियोगिता से पहले एथलीट ने बहुत कम या बहुत ज्यादा पानी पी लिया है तो उसको पेट संबंधी समस्या होने का रिस्क होत है. इसको रनर डायरिया कहते है. मैराथन में भाग लेने वाले एथलीट में यह समस्या ज्यादा देखी जाती है. अगर हाइड्रेशन ठीक नहीं है तो रेस के दौरान पेट पर इसका असर पड़ता है और अचानक मल आ सकता है. अगर ये कंट्रोल न हो तो निकल सकता है.
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एथलीट्स इससे बचने के लिए क्या कर सकते हैं?
रेस से पहले अपने शरीर के लिए ट्रायल रन करना मददगार हो सकता है. यानी ट्रेनिंग के दौरान यह समझना कि कौन-सा खाना, कितना पानी और किस टाइमिंग से पेट आरामदायक रहता है.अगर रेस के दौरान तेज पेट दर्द, चक्कर या टॉयलेट की इमरजेंसी हो, तो कुछ मिनट रुक जाना सही है.