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फैक्ट चेक: क्या सीजेपी प्रदर्शनकारियों को अब ढूंढ-ढूंढकर पकड़ रही है पुलिस? वायरल वीडियो की सच्चाई कुछ और है

सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल कर दावा किया जा रहा है कि पुलिस सीजेपी के प्रदर्शन में शामिल छात्रों को ढूंढ-ढूंढकर गिरफ्तार कर रही है. आजतक फैक्ट चेक की जांच में यह दावा भ्रामक पाया गया है.

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आजतक फैक्ट चेक

दावा
वीडियो में देखा जा सकता है कि सीजेपी के प्रदर्शन में शामिल छात्रों को अब पुलिस ढूंढ-ढूंढकर पकड़ रही है.
Social Media Users
सच्चाई
ये वीडियो फरवरी 2026 में दिल्ली के मॉरिस नगर थाने में आइसा कार्यकर्ताओं और कंटेंट क्रिएटर रिचा तिवारी से जुड़े विवाद के दौरान का है. सीजेपी के प्रदर्शन के साथ इसका कोई लेना-देना नहीं है.

शिक्षा मंत्री के तौर पर धमेंन्द्र प्रधान के इस्तीफे, और कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के विरोध प्रदर्शन खत्म होने के बाद, कई जगहों से ऐसी खबरें आईं  कि प्रदर्शनकारियों को खोज-खोज कर गिरफ्तार किया जा रहा है.  अब सोशल मीडिया पर इसी को लेकर एक वीडियो वायरल हो रहा है. इसमें दिखता है कि किसी पुलिस थाने पर अफरा-तफरी मची है और खूब हंगामा हो रहा है. 

इस वीडियो में एक महिला पुलिसकर्मी, दो लड़कियों को किसी घर के अंदर धकेलते हुई दिखती है. वीडियो बनाने वाला शख्स उन लड़कियों को धमका भी रहा है. दरवाजे के बाहर गुस्साए लोगों की भीड़ है जो अंदर घुसने की कोशिश कर रही है और पुलिसकर्मी उन्हें रोक रहे हैं. इस वीडियो को शेयर करने वाले कुछ यूजर्स का आरोप है कि पुलिस सीजेपी के प्रदर्शन में शामिल छात्रों की पहचान कर उन्हें एक-एक कर पकड़ रही है, और पार्टी इस पर चुप्पी साधे बैठी है.

CJP Protesters Police Arrest Fact Check
एक व्यक्ति ने लिखा: "प्रोटेस्ट में जो बच्चे थे, अब वीडियो से ढूंढ-ढूंढ कर पुलिस पकड़ रही है उनको. अगर ये सच है तो @CJP_for_India कुछ करती क्यों नहीं. इन्हीं के कहने पर स्टूडेंट प्रोटेस्ट हुआ था न. क्या प्रोटेस्ट के बाद उनकी सुरक्षा इनकी जिम्मेदारी नहीं? फेसबुक पर भी इस वीडियो को लेकर ऐसी ही बातें कही जा रही हैं. 

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आजतक फैक्ट चेक ने पाया कि ये वीडियो है तो दिल्ली का ही, लेकिन ये फरवरी की घटना है, जिसका सीजेपी के प्रदर्शन से कोई लेना-देना नहीं है.

कैसे पता की सच्चाई?

वीडियो में पुलिसकर्मी जैकेट पहने नजर आ रहे हैं जिससे पता चलता है कि ये वीडियो सर्दियों का हो सकता है. वायरल वीडियो के कीफ्रेम्स को रिवर्स इमेज सर्च करने पर ये वीडियो हमें लोकसभा सांसद राजकुमार रोत के इंस्टाग्राम हैंडल पर मिला. इसे उन्होंने बीते 16 फरवरी को पोस्ट किया था. राजकुमार राजस्थान के बांसवाड़ा-डूंगरपुर से भारत आदिवासी पार्टी के सांसद हैं. इससे साफ हो जाता है कि ये वीडियो हालिया किसी घटना का नहीं है, और इसका सीजेपी के प्रदर्शन से भी कोई संबंध नहीं है.


CJP Protesters Police Arrest Fact Check

वीडियो शेयर करते हुए राजकुमार ने लिखा था कि ये घटना दिल्ली के मॉरिस नगर थाने की है और ये मामला केंद्र सरकार द्वारा लाए गए, यूजीसी के नए नियमों के विरोध से जुड़ा है. 

कीवर्ड सर्च करने पर हमें इससे जुड़ी ‘द हिंदू’ और ‘द लल्लनटॉप’ की कई रिपोर्ट्स मिलीं. इनके मुताबिक, फरवरी के दूसरे हफ्ते में वामपंथी छात्र संगठन आइसा (ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन) ने डीयू की आर्ट्स फैकल्टी के बाहर नए यूजीसी नियमों के समर्थन में प्रदर्शन किया था. 

वहीं दूसरा पक्ष इन नियमों का विरोध कर रहा था. इसी बीच वहां यूट्यूबर और कंटेंट क्रिएटर रिचा तिवारी भी पहुंच गईं जिनके साथ भी कहासुनी हुई. बात इतनी बढ़ गयी थी कि पुलिस को बुलाया गया और दोनों पक्षों के लोगों को मॉरिस नगर थाने जाना पड़ा. दोनों पक्षों की शिकायतों पर एक-दूसरे के खिलाफ क्रॉस-एफआईआर दर्ज की गई थी. वायरल वीडियो में इसी विवाद के दौरान थाने के भीतर-बाहर मची अफरा-तफरी कैद है. 

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हालांकि, ये बात सच है कि सीजेपी के प्रदर्शन में शामिल कई लोगों को देश के अलग-अलग राज्यों जैसे बिहार, पश्चिम बंगाल और असम में गिरफ्तार किया गया था. लेकिन बाद में बिहार और असम पुलिस (https://tinyurl.com/3z4hbzpx) ने प्रदर्शनकारियों पर दर्ज किए गए केस वापस ले लिए.सीजेपी ने 27 जुलाई की रात केंद्र सरकार के साथ मीटिंग की और इन गिरफ्तारियों को लेकर विरोध जताया.  

28 जुलाई को एक सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने भी इस मामले में आदेश दिया कि सभी नाबालिगों और बिना आपराधिक रिकॉर्ड वाले गिरफ्तार प्रदर्शनकारियों को तुरंत रिहा किया जाए. कोर्ट ने ये भी कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना हर नागरिक का अधिकार है, और बिना ठोस वजह पुलिस बल का इस्तेमाल गलत है.

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