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'TV की मंथरा', सगी बहन बनी सौतन, 3 दिन तक सड़ती रही लाश, एक्ट्रेस की दर्दनाक दास्तां

नितेश तिवारी की रामायण फिल्म रिलीज के बाद मंथरा के किरदार पर चर्चा तेज हो गई है. मंथरा की भूमिका निभाने वाली ललिता पवार ने 9 साल की उम्र से अभिनय शुरू किया और 700 से अधिक फिल्मों में काम किया. उनका जीवन संघर्षों से भरा था, जिसमें परिवारिक विश्वासघात और अकेलापन शामिल था.

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Lalita Pawar Death Mystery (Photo: Social Media)
Lalita Pawar Death Mystery (Photo: Social Media)

नितेश तिवारी के निर्देशन में बनी रामायण 5 नवंबर को बड़े पर्दे पर रिलीज हो चुकी है. फिल्म रिलीज के बाद इसके किरदारों पर जमकर बात हो रही है. राम, सीता, रावण और लक्ष्मण के अलावा मंथरा बनीं शीबा चड्ढा भी खूब वाहवाही लूट रही हैं. ऐसे मौके पर रामानंद सागर की रामायण में मंथरा का रोल निभाने वाली ललिता पवार की याद आ गई. ललिता पवार ने मंथरा का किरदार इतनी खूबसूरती से निभाया था कि लोग उन्हें आजतक नहीं भूल पाए हैं. 

जिन दर्शकों ने उन्हें मंथरा के रूप में देखा, उनके लिए वो षड्यंत्र की प्रतीक बन गईं. पर वास्तविक जीवन में उन्होंने खुद विश्वासघात और अकेलेपन का भारी दंड झेला. 

9 साल की उम्र में एक्टिंग डेब्यू 
ललिता पवार का जन्म 18 अप्रैल 1916 को नासिक में हुआ था. उन्होंने 9 साल की उम्र में अभिनय शुरू किया और सात दशकों के करियर में 700 से अधिक फिल्मों में काम किया. शुरुआत में हीरोइन के रूप में चर्चित रहीं, पर जंग-ए-आजादी की शूटिंग के दौरान एक सीन में मिले जोरदार थप्पड़ से उनका चेहरा बिगड़ गया और बाईं आंख प्रभावित हो गई. ये घटना उन्हें लीड रोल से खलनायिका के किरदारों की ओर ले आई. 

अकेलेपन में गुजरी मंथरा की जिंदगी

उनका सबसे गहरा घाव घर से आया. ललिता पवार की पहली शादी फिल्म निर्माता गणपतराव पवार से हुई थी. बाद में उन्हें पता चला कि उनके पति का संबंध उनकी ही छोटी बहन से है. रिपोर्ट्स के अनुसार, गणपतराव ने उनकी बहन से दूसरी शादी कर ली, जिससे ललिता की सगी बहन उनकी सौतन बन गई. इस विश्वासघात के बाद ललिता ने तलाक लिया और बाद में निर्माता राजप्रकाश गुप्ता से शादी कर ली. इस रिश्ते से उनका बेटा जय पवार हुआ.

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मुश्किल में बीते अंतिम दिन
उनकी जिंदगी के अंतिम दिन कठिन रहे. 1990 के दशक में उन्हें कैंसर हुआ और वो पुणे स्थित अपने घर में रहने लगीं. उस समय उनके पति अस्पताल में थे, जबकि बेटा मुंबई में रहता था. 24 फरवरी 1998 को 81 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया. निधन के बाद तीन दिनों तक उनकी लाश उसी घर में सड़ती रही. इस बात का पता तब चला जब उनके बेटे ने फोन किया और कोई जवाब नहीं मिला. पुलिस ने आकर घर का दरवाजा तोड़ा, तब जाकर ललिता पवार का शव बरामद हुआ. 

ललिता पवार का नाम आज भी मंथरा के किरदार से जुड़ा है, पर उनकी असली पहचान उनके साहस, अभिनय और संघर्ष में है. उनकी मृत्यु केवल एक दुखद अंत नहीं, बल्कि पारिवारिक रिश्तों, बुजुर्गों की उपेक्षा और अकेलेपन पर एक चेतावनी है. 

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