एक्टर रजा मुराद उन कलाकारों में से हैं, जो ना सिर्फ अपनी एक्टिंग की वजह से बल्कि अपने बेबाक बयानों की वजह से भी हमेशा चर्चा में बने रहते है. वह सामाजिक और राजनीतिक दोनों ही मुद्दे पर अपनी राय रखने से कभी पीछे नहीं हटते हैं. हाल ही में इंटरव्यू के दौरान उन्होंने खुलासा किया कि वह क्यों राज कपूर और संजय लीला भंसाली को परफेक्शनिस्ट मानते हैं?
रजा मुराद ने अपने छह दशकों से ज्यादा लंबे बॉलीवुड करियर में 200 से ज्यादा फिल्मों की हैं. उन्होंने कई यादगार किरदार निभाए हैं. हाल ही में इंटरव्यू के दौरान रजा मुराद ने संजय लीला भंसाली को परफेक्शनिस्ट बताया. रजा के इस बयान को लेकर जब उनसे पूछा गया कि सुना है की संजय लीला भंसाली मूडी हैं और उन्हें बहुत जल्दी गुस्सा आ जाता है. इस पर रजा ने कहा, 'देखिए, बात अगर गुस्से की है तो, जब वह आपसे कुछ बोलना चाह रहे हों और आप वह समझ नहीं पा रहें तब उनको गुस्सा आता है. ऐसा नहीं हैं कि वह शुरुआत से ही गुस्से वाले व्यक्ति हैं और हां हर इंसान का अपना स्वभाव है. उनका गुस्सा किसी कलाकार के प्रति निजी नहीं होता था, बल्कि वह काम को सही तरीके से पूरा कराने के लिए नाराज होते थे. मैंने उन्हें सिर्फ असिस्टेंट्स ही नहीं, बल्कि बड़े स्टार्स पर भी गुस्सा करते देखा है
उनसे जब पूछा गया कि क्या उन्होंने भंसाली को रणवीर सिंह, दीपिका पादुकोण और प्रियंका चोपड़ा पर कभी चिल्लाते देखा है, तो इस पर रजा मुराद ने कहा, 'हां, उन्होंने ऐसा होते देखा है. भंसाली को जो चाहिए होता है, वह उसे हर हाल में हासिल करना चाहते हैं, मैंने उन्हें कई स्टार्स पर गुस्सा करते देखा है.'
काम से कभी नहीं करते थे समझौता
रजा मुराद का कहना है कि सिर्फ संजय लीला भंसाली ही नहीं बल्कि राज कपूर भी परफेक्शनिस्ट थे. उन्होंने कहा कि राज कपूर और भंसाली दोनों ही अपने काम के साथ कभी भी समझौता नहीं करते. दोनो ही परफेक्शनिस्ट हैं. उन्हें जो चाहिए वह उसे हासिल कर लेते हैं. उनके लिए समय, शिफ्ट, पैसा, सेट या डेट्स से ज्यादा जरूरी काम की इम्पोर्टेंस होती थी. अगर काम में चार दिन के बजाय आठ दिन भी लगता तो कोई बात नहीं. अगर वे लोग सेट पर हैं तो ये उनके लिए एक बिजनेस है.
रजा मुराद ने राज कपूर के साथ काम करने का अपना पहला अनुभव भी शेयर किया. उन्होंने कहा, 'जब मैं पहली बार 'प्रेम रोग' में राज साहब के साथ काम कर रहा था. वह मेरा पहला दिन था और मेरी क्या ही औकात थी उनके सामने. मेरे बेटों ने भी इस बात को लेकर आपत्ति जताई थी और कहा था कि मैं किरदार के लिए सही नहीं रहूंगा. मैं उस समय बहुत छोटा एक्टर था और राज साहब बोले, ये रोल कोई करेंगे तो वह रजा साहब ही करेंगे.'
रजा मुराद ने बताया कि संजय लीला भंसाली के साथ उनका पहला अनुभव भी कुछ ऐसा ही था. जब मैं पहली बार सेट पर गया तो उन्होंने पूरी यूनिट को बुलाकर मेरा परिचय करवाया और कहा, रजा साहब हमारे साथ काम कर रहे हैं. तो दोनों में यही चीज कॉमन थी. उन दोनों ने मुझे बहुत आदर और सम्मान दिया.
जब रजा से बातचीत के दौरान पूछा गया कि क्या राज कपूर भी संजय लीला भंसाली के तरह ही स्टार्स पर गुस्सा करते है. इस पर रजा ने कहा, राज कपूर जानते थे कि कलाकार काफी संवेदनशील होते हैं, लेकिन उन्हें यह भी पता था कि उनसे बेहतर काम कैसे करवाना है. वह हीरोइन पर गुस्सा हो जाते थे, बोलते थे, क्या कर रही है तू? ये क्या कर रही है? ऐसा मत करो. तुम काम नहीं कर रही हों, छोड़ो में दिखाता हूं कि काम कैसे करते हैं. इसके बावजूद एक्ट्रेस उनकी बातों का बुरा नहीं मानती थीं और उनके निर्देशों के मुताबिक अपना काम सुधारती थीं.