यश राज फिल्म्स की स्पाई यूनिवर्स अब सिर्फ टाइगर, पठान और कबीर तक सीमित नहीं रही. इस बार एंट्री हुई है दो महिला जासूसों की, जो अपने दम पर दुश्मनों के होश उड़ाने की हिम्मत रखती हैं. 'अल्फा' सिर्फ एक और स्पाई फिल्म नहीं, बल्कि इमोशन, एक्शन और ट्विस्ट का ऐसा कॉकटेल है जो शुरुआत से आखिर तक दर्शकों को सीट से बांधे रखता है.
ट्रेलर देखकर अगर आपको लगा था कि कहानी सीधी-सादी होगी, तो फिल्म आपको बार-बार चौंकाती है. परत-दर-परत खुलती कहानी कई ऐसे मोड़ लेकर आती है जो स्पाई थ्रिलर का मजा दोगुना कर देते हैं.
कहानी: अल्फा बनने की कीमत क्या होती है?
फिल्म की कहानी सीता (आलिया भट्ट) के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसे बचपन से ही एक खास मिशन के लिए तैयार किया जाता है. उसे दुनिया से काटकर ऐसी ट्रेनिंग दी जाती है कि वह एक 'अल्फा' सोल्जर बन सके. उसकी ट्रेनिंग करता है फतह सिंह लखावत (बॉबी देओल), जो खुद भारतीय सेना का हिस्सा है लेकिन अब 'ऑपरेशन ओडिसी' के जरिए भारत को तबाह करने की साजिश रच रहा है.
अल्फा सोल्जर्स कोई आम एजेंट नहीं हैं. उनकी सुनने की क्षमता असाधारण है, वो बिना देखे दुश्मन की मौजूदगी भांप लेते हैं और कई मिनटों तक सांस रोककर मिशन पूरा करने का हुनर रखते हैं.
लेकिन कहानी सिर्फ इतनी नहीं है. दुर्गा (शरवरी वाघ) की एंट्री के साथ कहानी नया मोड़ लेती है. दोनों अल्फा हैं, लेकिन दोनों की दुनिया और परवरिश बिल्कुल अलग रही है. यही फर्क फिल्म के सबसे दिलचस्प हिस्सों में से एक बन जाता है. बाकी राज जानने के लिए थिएटर जाना ही बेहतर रहेगा.
कास्ट ने किया क्या कमाल?
आलिया भट्ट ने इस फिल्म से साबित कर दिया कि वह सिर्फ रोमांस या इमोशनल ड्रामा ही नहीं, बल्कि बड़े स्केल की एक्शन स्पाई फिल्मों का भी मजबूत चेहरा बन सकती हैं. जिस रोल को लेकर रिलीज से पहले काफी सवाल उठे थे, उसी किरदार में वह सबसे ज्यादा प्रभावित करती हैं.
शरवरी वाघ हर बार स्क्रीन पर आते ही ध्यान खींच लेती हैं. उनका स्क्रीन प्रेजेंस, एक्शन और कॉन्फिडेंस उन्हें फिल्म का सबसे बड़ा सरप्राइज पैकेज बनाता है. कई जगह तो वह आलिया के बराबर खड़ी नजर आती हैं. आने वाले समय की बड़ी स्टार बनने के सारे गुण उनमें दिखाई देते हैं.
बॉबी देओल एक बार फिर खतरनाक विलेन के रूप में जमे हैं. हालांकि हरियाणवी लहजे पर उनकी पकड़ कुछ कमजोर महसूस होती है और उनके अतीत को थोड़ा और गहराई से दिखाया जाता तो किरदार और असरदार बन सकता था.
अनिल कपूर अपने पुराने विक्रांत कॉल वाले अंदाज में कहानी को मजबूती देते हैं. उनका सफर एक आर्मी ऑफिसर से रॉ अधिकारी बनने तक स्पाई यूनिवर्स को और डिटेल देता है.
सरप्राइज फैक्टर 'कबीर'
फिल्म का सबसे बड़ा सरप्राइज ऋतिक रोशन का कैमियो है. ट्रेलर में उनकी आंखों की झलक ने जिस तरह एक्साइटमेंट बढ़ाई थी, फिल्म में उनकी एंट्री भी वैसी ही सीटियां बजवाती है. लेकिन अफसोस, कबीर का किरदार जितनी तेजी से आता है, उतनी ही जल्दी चला भी जाता है. उनका स्क्रीन टाइम बेहद कम है, जिससे फैंस थोड़े अधूरेपन का एहसास लेकर बाहर निकलते हैं. फिर भी उनकी मौजूदगी स्पाई यूनिवर्स के अगले चैप्टर की उत्सुकता जरूर बढ़ा देती है.
स्क्रीनप्ले और म्यूजिक: कम गाने, ज्यादा रफ्तार
फिल्म की सबसे बड़ी ताकत इसका तेज रफ्तार स्क्रीनप्ले है. कहानी कहीं ज्यादा भटकती नहीं और लगातार आगे बढ़ती रहती है. हर कुछ मिनट बाद नया ट्विस्ट या नया मिशन दर्शकों की दिलचस्पी बनाए रखता है.
फिल्म में गानों की भरमार नहीं है, जो इसके पक्ष में जाता है. बैकग्राउंड में बजने वाला इंग्लिश-पंजाबी रैप और दमदार बैकग्राउंड स्कोर एक्शन सीक्वेंस को और प्रभावशाली बनाता है. सिनेमैटोग्राफी और विजुअल्स बड़े पर्दे पर शानदार अनुभव देते हैं.
निगेटिव पॉइंट्स: जहां फिल्म थोड़ी चूक गई
फिल्म की सबसे बड़ी कमजोरी इसका कुछ हद तक प्रेडिक्टेबल स्क्रीनप्ले है. कई ट्विस्ट का अंदाजा पहले ही लगाया जा सकता है. पाकिस्तान कनेक्शन और उसके नेटवर्क को जिस तरह कहानी में पेश किया गया है, वह पूरी तरह स्थापित नहीं हो पाता. कई सवाल अनसुलझे रह जाते हैं. इसके अलावा बॉबी देओल के किरदार की बैकस्टोरी थोड़ी और मजबूत होती तो फिल्म का इमोशनल और ड्रामेटिक असर बढ़ सकता था. आलिया ने अपने किरदार को निभाने में जी-जान लगा दी है, लेकिन अगर ट्रेनिंग के दौरान उनकी फिजिकल अपीयरेंस पर और ध्यान दिया जाता तो ज्यादा इम्पैक्ट छोड़ता.
डायरेक्शन: शिव रवैल ने संभाल ली बड़ी जिम्मेदारी
'द रेलवे मैन' के बाद शिव रवैल ने इस बड़े स्पाई यूनिवर्स प्रोजेक्ट को आत्मविश्वास के साथ संभाला है. इतना बड़ा फ्रेंचाइजी प्रोजेक्ट संभालना आसान नहीं होता, लेकिन उन्होंने एक्शन, इमोशन और स्पाई थ्रिल को संतुलित रखने की पूरी कोशिश की है.
यशराज की स्पाई फिल्मों की पहचान सिर्फ एक्शन नहीं, बल्कि मजबूत इमोशनल कनेक्शन भी रहा है. जहां 'टाइगर' और 'पठान' में प्यार, 'वॉर' में दोस्ती देखने को मिली, वहीं 'अल्फा' बाप-बेटी के रिश्ते के जरिए दिल को छूने की कोशिश करती है और इसमें काफी हद तक सफल भी रहती है.
फाइनल वर्डिक्ट
अगर आप यशराज स्पाई यूनिवर्स के फैन हैं, दमदार एक्शन, बड़े विजुअल्स, तेज रफ्तार कहानी और इमोशनल टच वाली फिल्म देखना चाहते हैं, तो 'अल्फा' आपको निराश नहीं करेगी. हां, कहानी कुछ जगह अनुमानित लग सकती है और कुछ प्लॉट पॉइंट्स बेहतर लिखे जा सकते थे, लेकिन कुल मिलाकर यह एक एंटरटेनिंग स्पाई थ्रिलर है, जो आलिया भट्ट और शरवरी वाघ की जोड़ी के दम पर अपनी अलग पहचान बनाने में सफल रहती है. तो आप एक बार तो देख ही सकते हैं.