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पंजाब-हरियाणा में धान की खेती के लिए बेस्ट हैं ये 5 किस्में, जानें खासियत

कम पानी और कम समय में अधिक पैदावार देने वाली उन्नत धान की किस्में किसानों के लिए फायदेमंद साबित हो सकती हैं. पूसा बासमती 1121, 1509, 1718, PR 121 और बासमती 386 जैसी किस्में ना सिर्फ बेहतर गुणवत्ता और सुगंध के लिए जानी जाती हैं, बल्कि फसल प्रबंधन को भी आसान बनाती हैं.

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कम पानी और कम समय में तैयार होने वाली धान की किस्में (फाइल फोटो- PTI)
कम पानी और कम समय में तैयार होने वाली धान की किस्में (फाइल फोटो- PTI)

पंजाब और हरियाणा देश के प्रमुख धान उत्पादक राज्य हैं. यहां की मिट्टी और मौसम धान की खेती के लिए बहुत उपयुक्त है, लेकिन पानी की कमी, मजदूरी बढ़ना और पराली की समस्या ने किसानों को नई चुनौतियां दी हैं. ऐसे में कम अवधि वाली, कम पानी वाली और ज्यादा पैदावार देने वाली उन्नत किस्में किसानों के लिए वरदान साबित हो सकती हैं. पंजाब एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी (PAU) के मुताबिक, कुछ लोकप्रिय किस्में किसानों के बीच बहुत पसंद की जा रही हैं. आइए जानते हैं पंजाब और हरियाणा में बोई जाने वाली धान की उन्नत किस्मों के बारे में.

पूसा बासमती 1121
निर्यात के लिए टॉप किस्मों में शुमार इस किस्म की पकने की अवधि 135 से 145 दिन होती है. खास बात ये है कि पकाने के बाद इसके चावल की लंबाई बढ़ जाती है. चावल के दाने (8-9 मिमी कच्चे, पकने पर 2.5 गुना लंबे) शानदार सुगंध वाले होते हैं. यह कम पानी और कम समय वाली बेहतरीन किस्म है.

पूसा बासमती 1509 
यह सबसे कम समय में तैयार होने वाली धान की किस्म है, जो 115-120 दिन में पक जाती है. इसके लंबे दाने, अच्छी सुगंध वाले होते हैं. इस किस्म की बुवाई में पानी की बचत होती है और गेहूं की बुवाई के लिए खेत जल्दी खाली हो जाते हैं. बाजार में इसकी अच्छी कीमत भी मिलती है.

पूसा बासमती 1718
धान की ये किस्म रोगों के प्रति अधिक सहनशील होती है, जिससे किसानों को फसल प्रबंधन में आसानी होती है. इसकी पकने की अवधि करीब 135 से 140 दिन होती है. इसमें झुलसा रोग का खतरा कम रहता है और उत्पादन क्षमता भी अच्छी होती है. ऐसे में कम जोखिम वाली खेती के लिए यह किस्म बेहतर ऑप्शन साबिक हो सकती है. 

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PR 121 
धान की ये स्थिर पैदावार वाली विश्वसनीय किस्म है. जो लगभग 130-135 दिन में तैयार हो जाती है. इसके पौधे मजबूत और दाने अच्छी गुणवत्ता वाले होते हैं. खास बात ये है कि विभिन्न मौसम स्थितियों में इसका उत्पादन स्थिर रहता है. पंजाब और हरियाणा दोनों राज्यों में यह लोकप्रिय है.

बासमती 386
बासमती 386 उत्तर भारत की पुरानी और पारंपरिक बासमती किस्मों में शामिल है. हालांकि, इसकी पैदावार कुछ आधुनिक किस्मों की तुलना में कम हो सकती है, लेकिन इसकी क्वालिटी और पारंपरिक बासमती पहचान इसे खास बनाती है. इसकी फसल तैयार होने में लगभग 150 से 155 दिन का समय लगता है.


 

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