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जिस कॉमेडी के चलते बीत गए गोविंदा, उससे करियर की जंग कैसे जीत पाएंगे वरुण धवन?

वरुण धवन की नई फिल्म है जवानी तो इश्क होना है बॉक्स ऑफिस पर दर्शकों को तरस रही है. फिल्म में वरुण का वही पुराना 90s वाला 'गोविंदा स्टाइल' कॉमिक अंदाज नजर आ रहा है, जिससे अब फैंस बोर हो चुके हैं. बदलापुर और अक्टूबर जैसी फिल्मों में वरुण के एक्सपेरिमेंट को पसंद कर चुकी जनता उनके 'गोविंदा टाइप' स्टाइल को कबतक स्वीकार करेगी?

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गोविंदा की परछाईं से अलग हुए बिना होगा वरुण का भला? (Photo: ITGD)
गोविंदा की परछाईं से अलग हुए बिना होगा वरुण का भला? (Photo: ITGD)

वरुण धवन एक बार फिर अपनी नई फिल्म के लिए सवालों के घेरे में हैं. किसी विवाद की वजह से नहीं, बल्कि इसलिए कि है जवानी तो इश्क होना है ने वरुण के फैंस को एक बार फिर से निराश कर दिया है. वरुण की फिल्म का ट्रेलर देखकर ही लोग बहुत खुश तो नहीं थे, लेकिन फिल्म देखने के बाद जनता का दिल थोड़ा और टूटा है.

वरुण की फिल्म में वैसी ही 90s स्टाइल स्टोरी है, जो कभी उनके पापा डेविड धवन अपने पार्टनर-इन-क्राइम गोविंदा या सलमान खान के साथ बनाया करते थे— साजन चले ससुराल, घरवाली बाहरवाली, बीवी नंबर 1, क्योंकि मैं झूठ नहीं बोलता वगैरह-वगैरह. गोविंदा की एक फिल्म सैंडविच (2006) डेविड धवन ने नहीं, अनीस बज़्मी ने बनाई थी लेकिन इसमें काफी हद तक वैसी ही कहानी थी जैसी अब वरुण की है जवानी तो इश्क होना है में है.

'गोविंदा-जैसा' के टैग में उलझे वरुण धवन

वरुण का ये गोविंदा-फिकेशन कोई नई बात नहीं है. स्टूडेंट ऑफ द ईयर (2012) से हिट डेब्यू के बाद ही वरुण ने दूसरी फिल्म मैं तेरा हीरो (2014) अपने पापा डेविड धवन के साथ की थी. डेविड की फिल्म में उनके बेटे वरुण का अवतार देखकर जनता ही नहीं, फिल्म क्रिटिक्स तक को गोविंदा की याद आई. डेविड की फिल्म होने की वजह से मैं तेरा हीरो का डिजाइन-ड्रामा-डांस-कॉमेडी सबकुछ गोविंदा की फिल्मों की याद तो दिला ही रहा था, मगर सबसे ज्यादा मेल खाने वाली चीज थी वरुण की एक्टिंग.

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उनकी बॉडी लैंग्वेज, ह्यूमर और डायलॉग डिलीवरी देख लोगों को गोविंदा ही याद आए थे. बहुत सारे नामी फिल्म क्रिटिक्स के रिव्यू, वरुण को 'नया गोविंदा' ही कह रहे थे. ये इमेज वरुण के साथ ऐसी जुड़ी है कि वो जब अपने पिता ही नहीं, दूसरे फिल्ममेकर्स के साथ भी कॉमेडी करते तो लोगों को उनमें डेविड धवन का हीरो ही नजर आता.

इससे एक बात तो क्लियर थी कि डेविड धवन की फिल्मों में गोविंदा, सलमान या अनिल कपूर का जो अंदाज नजर आता था वो असल में डेविड की देन था. वही अंदाज जब वरुण में दिखा तो पहली बार तो लोग खुशी के साथ सरप्राइज हुए. लेकिन जब वरुण ने सलमान खान के साथ अपने पापा की फिल्म जुड़वा का रीमेक किया, तो जनता ने दबी आवाज में कहना शुरू कर दिया— ये तो वही 90s वाला कॉमेडी स्टाइल है!

बाप-बेटे की इस जोड़ी ने जब 2020 में गोविंदा की कुली नं 1 का रीमेक किया तो बात वरुण-गोविंदा की समानता से आगे बढ़ गई. कई लोगों को गोविंदा की आइकॉनिक कॉमेडी फिल्म का रीमेक करना रास नहीं आया और वरुण धवन वाली कुली नं 1 को जमकर ट्रोल भी किया गया.

ऑडियंस का बदलता स्वाद

लॉकडाउन को फिल्म ऑडियंस का जायका बदलने वाली सबसे बड़ी घटना माना जाता है, क्योंकि दर्शकों ने घर बैठे दुनिया भर का सिनेमा देखा और उनका सिनेमाई हाजमा पहले से कहीं ज्यादा तगड़ा हो गया. इसलिए लॉकडाउन के बाद बॉलीवुड के कई पॉपुलर ट्रेंड ऑडियंस को बोरिंग लगने लगे. दुनिया अब पॉलिटिकली बहुत करेक्ट हो चुकी है. पहले फिल्में 'कॉमेडी' या 'ह्यूमर' के नाम पर जो चीजें दिखा जाती थीं, अब उन्हें तुरंत जनता अपने सोशल मीडिया कोर्ट में घसीट लेती है.

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इसका सीधा सबूत वरुण की ही को-स्टार रह चुकीं जाह्नवी कपूर के, फिल्म पेद्दी के सीन्स हैं. इस फिल्म ने जाह्नवी के 'गांव की लड़की' वाले कैरेक्टर को जरूरत से ज्यादा सेक्शुअलाइज करने की कोशिश की है, जिसे जनता और सेलेब्रिटीज रोज सोशल मीडिया पर उधेड़ रहे हैं. लेकिन एक्ट्रेस को दिखाने का ये स्टाइल एक समय बॉलीवुड का ट्रेंड होता था, ठीक वैसे ही, जैसे गोविंदा स्टाइल की कॉमेडी होती थी.

गोविंदा को लोग आज भी नॉस्टैल्जिया की वजह से बहुत प्यार करते हैं. उनकी कॉमिक टाइमिंग, डांस और उनसे जनता को मिलने वाले कंप्लीट एंटरटेनमेंट पैकेज की मिसालें देते हैं. लोग गोविंदा को बड़े परदे पर मिस भी बहुत करते हैं. तो फिर सनी देओल, संजय दत्त या बॉबी देओल की तरह गोविंदा का धमाकेदार कमबैक क्यों नहीं हुआ? क्योंकि गोविंदा अपना अंदाज, अपनी फिल्मों की कहानियां और किरदारों के साथ एक्सपेरिमेंट करने के लिए तैयार नहीं थे. लेकिन इधर वरुण धवन नई कहानियों, नए किरदारों के लिए भूखी बैठी इस जनता के सामने एक बार फिर 'गोविंदा' स्टाइल में आ बैठे हैं!

वरुण के एक्सपेरिमेंट को भी मिला है लोगों का अप्रूवल

ऐसा नहीं है कि वरुण ने एक्सपेरिमेंट किया नहीं, या उनकी नई कोशिशों को जनता ने सपोर्ट नहीं किया. बदलापुर, अक्टूबर या सुई धागा— रिव्यूज से लेकर जनता की सोशल मीडिया पोस्ट्स तक में वरुण को इन फिल्मों के लिए तारीफ मिली और बॉक्स ऑफिस सक्सेस भी. वरुण के साथ जो एंटरटेनमेंट पैकेज आता है, वो बॉलीवुड में कामयाबी की एक अलग आर्ट है. लेकिन उसके लिए वरुण को सही कहानियां, सही फिल्ममेकर चुनने की जरूरत है.

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वेब सीरीज सिटाडेल: हनी बनी में वरुण ने राज एंड डीके के साथ काम किया, तो उनकी परफॉर्मेंस, उन्हीं के रूटीन फिल्मी किरदारों से बहुत अलग निकल के आई. तारीफ भी खूब मिली. लेकिन इस शो और बॉर्डर 2 जैसी हार्डकोर बॉलीवुड स्टाइल देशभक्ति फिल्म में लोगों को इंप्रेस करने के बाद वरुण ने फिर है जवानी तो इश्क होना है जैसी फिल्म कर डाली. इसके लिए सिर्फ उनकी आलोचना ही नहीं हो रही, इस फिल्म के बॉक्स ऑफिस पर कामयाब कहलाने के चांस भी बहुत कमजोर हैं.

अपने डेब्यू से लेकर 2018 तक, 7 सालों में लगातार 11 कामयाब फिल्में देने वाले वरुण को जनता का हमेशा पर्याप्त सपोर्ट मिला है. बॉलीवुड लवर्स में उन्हें मौका देने का सॉफ्ट-स्पॉट भी रहा है. लेकिन इन मौकों के साथ वो अगर इसी तरह गोविंदा-स्टाइल किरदारों में बदलते रहे तो मजा नहीं आएगा. इस जनता ने जब खुद असली गोविंदा से सुरक्षित दूरी मेंटेन कर ली, तो वरुण के लिए भी चांस बहुत मजबूत नहीं होंगे!

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