
‘तू है मेरी किरण...’ 33 साल पहले जब शाहरुख खान ने जूही चावला के लिए ये गाना गाया था, तब हमें इसमें सिर्फ मोहब्बत नजर आई थी. एक मासूम-सा आशिक, एक खूबसूरत लड़की और उसके लिए पागलपन की हद तक प्यार. लेकिन वक्त के साथ जब ‘डर’ को दोबारा देखा, तो समझ आया कि वो मोहब्बत जितनी रोमांटिक लगती थी, उतनी ही डरावनी भी थी.
क्योंकि राहुल की कहानी सिर्फ प्यार की कहानी नहीं थी. वो ऑब्सेशन, जुनून और एकतरफा प्यार के उस खतरनाक चेहरे की कहानी थी, जहां सामने वाले का ‘ना’ भी आशिक को सुनाई नहीं देता. अब 33 साल बाद उसी एहसास को एक नई फिल्म फिर से कुरेदती दिख रही है. नाम है ‘तू है मेरी किरण’ और इस बार ऑब्सेसिव आशिक बने हैं जहीर इकबाल, जबकि किरण के किरदार में हैं सोनाक्षी सिन्हा.
फिल्म का ट्रेलर सामने आ चुका है और पहली झलक यही कहती है कि यहां प्यार जितना दिखाई दे रहा है, उसके पीछे छिपा डर उससे कहीं ज्यादा बड़ा है.
प्यार समझा, जबकि वो सिर्फ अच्छाई थी
ट्रेलर की शुरुआत जहीर के किरदार समर से होती है. वो एक साधारण-सा लड़का दिखाई देता है, लेकिन उसके भीतर कुछ बहुत असामान्य चल रहा है. वो किरण की अच्छाई को प्यार समझ बैठता है. समर खुद मानता है कि किरण जैसी लड़की का उसके जैसे लड़के से प्यार करना मुश्किल है. दुनिया उसे ‘लूजर’ कहती रही है, लेकिन किरण उसकी जिंदगी में आई तो उसे लगा कि शायद पहली बार किसी ने उसे समझा है. यहीं से कहानी एक खतरनाक मोड़ लेती है.
क्योंकि समर के लिए प्यार का मतलब अब सिर्फ प्यार करना नहीं है. वो चाहता है कि किरण भी उससे प्यार करे. किसी भी कीमत पर. ट्रेलर की सबसे डरावनी बात यही है कि किरण उसे साफ तौर पर दूर रहने को कहती है. लेकिन समर इसे स्वीकार नहीं करता. और यहीं ‘तू है मेरी किरण’ का असली कॉन्फ्लिक्ट सामने आता है. जिसे समर प्यार कह रहा है, वो धीरे-धीरे स्टॉकिंग और ऑब्सेशन में बदलता दिखाई देता है. वह किरण की जिंदगी में इस तरह घुसने लगता है कि उसकी पर्सनल लाइफ, रिश्ते और मानसिक शांति तक प्रभावित होने लगती है.

मतलब ये वो कहानी नहीं जहां हीरो लड़की को पाने के लिए सिर्फ फूल लेकर घूमता है. यहां हीरो का प्यार ही लड़की के लिए सबसे बड़ा खतरा बन जाता है.
शाहरुख की ‘डर’ याद आएगी, लेकिन कहानी अलग लगती है
फिल्म के टाइटल से लेकर इसके कॉन्सेप्ट तक ‘डर’ की याद आना स्वाभाविक है. 1993 में आई यश चोपड़ा की फिल्म में शाहरुख खान का राहुल भी जूही चावला की किरण के प्यार में जुनूनी था. लेकिन ‘तू है मेरी किरण’ सिर्फ ‘डर’ को दोहराने की कोशिश करती हुई नहीं लगती.
यहां ट्रेलर जिस तरह ऑब्सेशन को दिखाता है, उसमें मेंटल हेल्थ और एक इंसान के धीरे-धीरे मानसिक रूप से अस्थिर होने का एंगल भी महसूस होता है. समर को सिर्फ विलेन की तरह देखना शायद इस कहानी को बहुत आसान बना देगा. ट्रेलर इशारा करता है कि उसके व्यवहार के पीछे कुछ ऐसी मानसिक उलझनें हैं, जिन्हें फिल्म खोल सकती है.
फिर शुरू होता है पैरानॉर्मल खेल!
लेकिन कहानी सिर्फ साइकोलॉजिकल थ्रिलर बनकर नहीं रुकती. ट्रेलर में कुछ ऐसी घटनाएं भी दिखाई गई हैं, जो पैरानॉर्मल एक्टिविटी और ब्लैक मैजिक जैसी फील देती हैं. चीजें अचानक सामान्य दुनिया से निकलकर एक अजीब और डरावने जोन में पहुंचने लगती हैं. यहीं फिल्म थोड़ा और दिलचस्प हो जाती है.
क्योंकि सवाल उठता है- क्या किरण के साथ जो कुछ हो रहा है, वो सच में कोई पैरानॉर्मल ताकत है या फिर समर के दिमाग की बनाई हुई दुनिया? अगर फिल्म इस सवाल को ठीक से संभाल पाती है, तो इसकी कहानी सिर्फ एक ऑब्सेसिव लवर की कहानी से कहीं आगे जा सकती है.

असल डर भूत का है या इंसान का?
ट्रेलर देखने के बाद सबसे ज्यादा जो चीज दिमाग में रहती है, वो यही सवाल है. क्योंकि पैरानॉर्मल डर तो फिल्मों में बहुत देखा है. लेकिन जब कोई इंसान आपके ‘ना’ को स्वीकार करने से इनकार कर दे और आपकी जिंदगी को अपने जुनून के हिसाब से चलाना चाहे, तो वो डर कहीं ज्यादा असली लगता है. ‘तू है मेरी किरण’ शायद इसी डर को पर्दे पर उतारने की कोशिश कर रही है.
फिल्म की टैगलाइन भी इसी रहस्य को और गहरा करती है- जब दिमाग भूल जाए लेकिन वक्त सब याद रखता है. मतलब कहानी में याददाश्त, दिमाग और अतीत का भी कोई बड़ा कनेक्शन हो सकता है.
रियल लाइफ कपल, रील लाइफ में खतरनाक रिश्ता
फिल्म की एक और दिलचस्प बात सोनाक्षी सिन्हा और जहीर इकबाल की जोड़ी है. दोनों असल जिंदगी में पति-पत्नी हैं और इससे पहले ‘डबल XL’ में साथ काम कर चुके हैं. लेकिन यहां पर्दे पर इनका रिश्ता बिल्कुल अलग है.
सोनाक्षी किरण हैं और जहीर समर. एक ऐसी लड़की जो अपनी जिंदगी में आगे बढ़ना चाहती है और एक ऐसा लड़का जो उसके पीछे इस हद तक पड़ जाता है कि प्यार और डर के बीच की लाइन ही मिट जाती है. यही वजह है कि दोनों की केमिस्ट्री इस फिल्म में रोमांटिक कम और अनकंफर्टेबल ज्यादा लगती है और शायद यही इस कहानी की जरूरत भी है.
क्या ‘तू है मेरी किरण’ सिर्फ ‘डर’ की याद बनकर रह जाएगी?
ट्रेलर में आइडिया दमदार है. टाइटल पुरानी याद जगाता है, कहानी ऑब्सेशन को नए तरीके से छूती दिखती है और साइको एंगल इसे एक और लेयर देता है.
अगर कहानी ने ऑब्सेशन को सिर्फ ‘पागल आशिक’ वाली आसान कहानी बना दिया, तो बात कमजोर पड़ सकती है. लेकिन अगर फिल्म यह दिखाने में कामयाब होती है कि एकतरफा प्यार कब जुनून बनता है, जुनून कब मानसिक अस्थिरता में बदलता है और उस जुनून की कीमत सामने वाला इंसान कैसे चुकाता है, तो ‘तू है मेरी किरण’ एक दिलचस्प साइकोलॉजिकल थ्रिलर बन सकती है.
फिलहाल ट्रेलर इतना जरूर कहता है- 33 साल पहले शाहरुख ने कहा था, ‘तू है मेरी किरण...’ तब हमें प्यार दिखा था. इस बार वही नाम सुनकर शायद प्यार नहीं, डर महसूस हो. फिल्म 23 अक्टूबर 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है.