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‘पापा... मुझे बचा लो’, 11 साल के बेटे की दर्दभरी पुकार आज भी नहीं भूले शेखर सुमन, पत्नी ने डॉक्टरों से कहा- अब इसे जाने दो

शेखर सुमन ने 11 साल के बेटे आयुष के आखिरी पलों को याद किया. बेटे ने कहा था, ‘पापा, मुझे बचा लो.’ जानिए पत्नी अलका ने डॉक्टरों से क्या गुजारिश की थी.

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11 साल का बेटा खोया, टूट गए थे शेखर सुमन (Photo: Screengrab)
11 साल का बेटा खोया, टूट गए थे शेखर सुमन (Photo: Screengrab)

किसी भी मां-बाप के लिए अपनी आंखों के सामने बच्चे को दर्द से तड़पते देखना कितना मुश्किल होता है, इसका अंदाजा लगाना भी आसान नहीं है. एक्टर शेखर सुमन ने अपनी जिंदगी में ऐसा ही दर्द झेला है, जिसे याद करके आज भी किसी का दिल भर आए. उन्होंने अपने 11 साल के बेटे आयुष को हमेशा के लिए खो दिया था. अब सालों बाद शेखर ने उस मुश्किल दौर को याद किया है, जब उनका बेटा जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहा था और परिवार की आंखों के सामने उसकी तकलीफ बढ़ती जा रही थी.

‘पापा, मुझे जाने मत दो... मुझे बचा लो’

शेखर सुमन ने द लल्लनटॉप से बातचीत में बेटे आयुष के आखिरी पलों को याद करते हुए बताया कि वह एक ऐसी बीमारी से जूझ रहा था, जिसका कोई इलाज नहीं था. आयुष को एंडोमायोकार्डियल फाइब्रोसिस (EMF) नाम की दुर्लभ दिल की बीमारी थी. साल 1995 में इसी बीमारी के चलते महज 11 साल की उम्र में उसकी मौत हो गई.

शेखर ने बताया कि बेटे के आखिरी समय में कुछ ऐसा हुआ, जिसे वह आज तक नहीं भूल पाए हैं. उनके मुताबिक, आयुष संस्कृत के श्लोक पढ़ने लगा था. उसने कहा कि उसे एक सुनहरी रोशनी आती हुई दिखाई दे रही है. इसके बाद उसने अपने पिता का हाथ पकड़कर कहा, “पापा, मुझे जाने मत दो. मुझे बचा लो.”

एक पिता के लिए अपने बच्चे के मुंह से ऐसी बातें सुनना कितना दर्दनाक रहा होगा, इसकी कल्पना करना भी मुश्किल है. शेखर ने बताया कि आयुष ने उस वक्त वहां मौजूद परिवार के लोगों और यहां तक कि उनके ड्राइवर से भी कहा कि वह उनसे प्यार करता है. शेखर के लिए उनका बेटा किसी फरिश्ते से कम नहीं था.

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बेटे की तकलीफ देख टूट गई थीं मां, डॉक्टरों से कर दी थी बड़ी गुजारिश

आयुष की हालत लगातार बिगड़ती जा रही थी. परिवार उसे बचाने की हर मुमकिन कोशिश कर रहा था, लेकिन उसकी तकलीफ कम नहीं हो रही थी. शेखर ने बताया कि एक समय ऐसा आया, जब उनकी पत्नी अलका सुमन बेटे को दर्द में तड़पते नहीं देख पा रही थीं.

उन्होंने डॉक्टरों से गुजारिश की कि अब आयुष को जाने दिया जाए, क्योंकि वह बहुत तकलीफ में था. शेखर ने बताया कि पत्नी की बात सुनकर उन्होंने कहा कि वे आखिरी दम तक लड़ेंगे. लेकिन अलका जानती थीं कि बेटे की हालत बेहद गंभीर है और उसे इस तरह तड़पते देखना अब उनसे बर्दाश्त नहीं हो रहा था.

शेखर ने माना कि उस वक्त उनकी पत्नी की बात भी अपनी जगह सही थी. आखिर एक मां अपने बच्चे को दर्द से तड़पते कैसे देख सकती है? बेटे को बचाने की उम्मीद और उसकी तकलीफ खत्म होने की चाह के बीच पूरा परिवार बेबस था.

बेटे की बीमारी के बीच काम की तलाश में थे शेखर

शेखर सुमन ने यह भी बताया कि जब उन्हें बेटे की बीमारी के बारे में पता चला, तब वह काम की तलाश में संघर्ष कर रहे थे. परिवार की जिम्मेदारियों को निभाने और इलाज के खर्च में मदद के लिए उन्होंने टीवी की दुनिया में काम करने का फैसला किया.

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इसी दौरान उन्होंने जया बच्चन के प्रोडक्शन वाले शो ‘देख भाई देख’ में काम किया. शूटिंग के वक्त भी वह अपना फोन पास रखते थे, ताकि बेटे की तबीयत की खबर मिलती रहे. काम पर रहते हुए भी उनका ध्यान अपने बेटे पर ही लगा रहता था.

आयुष की मौत ने शेखर सुमन को अंदर तक तोड़ दिया था. उन्होंने कहा कि बेटे को खोने के बाद पैसे और शोहरत में उनकी दिलचस्पी खत्म हो गई थी. हालांकि, परिवार की जिम्मेदारियों के चलते उन्होंने काम करना जारी रखा.

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