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'हां, मैं मुस्लिम हूं, लेकिन नमाज नहीं पढ़ती', बोलीं शबाना आजमी, धर्म पर जावेद अख्तर संग होती है बहस

शबाना आजमी ने बताया कि वो भले ही मुस्लिम हैं लेकिन नमाज नहीं पढ़तीं.उन्होंने ये भी कहा कि धर्म से उनका खास जुड़ाव नहीं है. उन्होंने पति जावेद अख्तर को नास्तिक बताया.

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धर्म को लेकर क्या बोलीं शबाना आजमी? (Photo: Instagram @azmishabana18)
धर्म को लेकर क्या बोलीं शबाना आजमी? (Photo: Instagram @azmishabana18)

बॉलीवुड की दिग्गज एक्ट्रेस शबाना आजमी अपने विचारों को बेबाक और निडर होकर सबके सामने रखती हैं. हाल ही में उन्होंने धर्म, धार्मिक मान्यताओं और पति जावेद अख्तर की नास्तिक सोच पर अपनी राय रखी. शबाना ने इंटरव्यू में साफ कहा कि वो मुस्लिम हैं, लेकिन नमाज नहीं पढ़तीं. एक्ट्रेस ने ये भी बताया कि धर्म से उनका खास जुड़ाव नहीं है.

धर्म को लेकर बेबाकी से बोलीं शबाना
शबाना ने IIMUN के यूट्यूब चैनल पर बातचीत में बचपन में रहे घर के माहौल और धर्म को लेकर बात की. उन्होंने कहा- मेरे पिता और मशहूर शायर कैफी आजमी नास्तिक थे. जबकि मां शौकत आजमी कुछ धार्मिक परंपराओं का पालन करती थीं, लेकिन इसे लेकर वो बहुत गंभीर नहीं रहती थीं. मैं कभी-कभार माशाल्लाह और इंशाल्लाह जैसे शब्द बोलती हूं. इस पर पति जावेद अख्तर सवाल उठाते हैं. वो मुझे कहते हैं- तुम ये क्यों बोलती हो? अगर कोई हर वक्त कहेगा कि प्रभु जी की मर्जी, तो तुम्हें कैसा लगेगा? लेकिन मुझे लगता है कि ये मेरी भाषा का हिस्सा है. 

'नास्तिक हैं जावेद'
शबाना के मुताबिक, उन्हें बचपन से ही धर्म और भगवान को लेकर कोई खास जिज्ञासा नहीं रही है. उनके घर में धार्मिक रीति-रिवाजों को जिंदगी का अहम हिस्सा नहीं बनाया गया था. एक्ट्रेस ने बताया कि उनके पति और मशहूर गीतकार-लेखक जावेद अख्तर नास्तिक हैं. वो कहती हैं- जावेद कट्टर नास्तिक हैं. मैं उनसे कहती हूं कि आप अपने धार्मिक विचारों को इतना लाउड होकर क्यों बोलते हो? अगर किसी को धर्म का पालन करके सुकून मिलता है, तो उसे ऐसा करने दो. सबकी भावनाओं को ठेस क्यों पहुंचानी है? इस पर जावेद का जवाब होता है- मैं ऐसा इसलिए करता हूं क्योंकि धार्मिक लोग भी मुझे ठेस पहुंचाते हैं. क्या एक नास्तिक होने के नाते उन्हें बुरा फील करने का हक नहीं है?

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शबाना ने धर्म को लेकर खुद के विचार भी व्यक्त किए. वो कहती हैं- हां, मैं मुस्लिम हूं. मुझे ईद, उर्दू और खान-पान पसंद है. लेकिन हम नमाज नहीं पढ़ते और धर्म को लेकर हमारा कोई खास जुड़ाव भी नहीं है. शबाना ने माना कि भले ही वो खुद धार्मिक परंपराओं का पालन नहीं करतीं, लेकिन वो इस बात को समझती हैं कि धर्म एक इंसान का पर्सनल मैटर है. इसलिए सरकार को इसमें हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए. अगर किसी को प्रार्थना कर अच्छा लगता है तो उन्हें इससे कोई दिक्कत नहीं है.
 

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