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ना 4000 करोड़ बजट, ना तकनीक और ना रणबीर! रामायण को आदिपुरुष से बेहतर बनाती है बस ये एक चीज

रामायण के टीजर पर सोहल मीडिया पर हर तरह के रिएक्शन हैं. मगर सब लोग एक बात तो मान ही रहे हैं कि ये प्रभास की आदिपुरुष से बेहतर है. लेकिन रामायण अपने ग्रैंड विजुअल्स या 4000 करोड़ रुपये बजट की वजह से बेहतर नहीं है. इसे बेहतर बनाता है राम के किरदार का ट्रीटमेंट. कैसे? चलिए बताते हैं.

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कैसे आदिपुरुष से बेहतर है रामायण? (Photo: ITGD)
कैसे आदिपुरुष से बेहतर है रामायण? (Photo: ITGD)

रणबीर कपूर की रामायण का टीजर इस वक्त सबसे बड़ा 'राष्ट्रीय मुद्दा' बन चुका है. हर मुद्दे की तरह, इस टीजर पर भी जनता में तीन तरह के रिएक्शन हैं— नमित मल्होत्रा की रामायण का स्केल, रणबीर के राम और टीजर का फील एक ग्रुप को बहुत पसंद आ रहा है. दूसरे को फिल्म के VFX, ग्राफिक्स से बने राक्षस और राम बने रणबीर खटक रहे हैं. तीसरे, इंडियन सिनेमा के नए लेवल से एक्साइटेड हैं और रिलीज तक रामायण की छोटी-मोटी कमियां दूर होने की आस में हैं. रामायण पर रिएक्शंस का एक लेवल ऐसा भी है जहां ऊपर लिखे तीनों लेवल के दर्शक एक साथ हैं— ये आदिपुरुष से तो काफी बेहतर है!

ये तुलना तो होनी ही थी
नमित मल्होत्रा की रामायण, जिसमें रणबीर कपूर राम बने हैं, 2017 में अनाउंस हुई थी. उसके बाद रामायण पर बेस्ड कहानियां लेकर और भी कई खिलाड़ी ट्रैक पर उतर गए थे. इसमें अक्षय कुमार की राम सेतु और कंगना रनौत की अपराजिता अयोध्या जैसे कई चर्चित प्रोजेक्ट थे. लेकिन उस वक्त शुरू हुई बॉलीवुड रेस में वाइल्ड कार्ड खिलाड़ी बनकर आई थी डायरेक्टर ओम राऊत की आदिपुरुष.

प्रभास जैसा पैन इंडिया स्टार, रावण के रोल में सैफ अली खान जैसा दमदार एक्टर और सीता के रोल में कृति सेनन जैसी यंग बॉलीवुड स्टार की कास्टिंग. टी-सीरीज जैसे बड़े प्रोडक्शन हाउस के सपोर्ट से आई आदिपुरुष का बजट 600 करोड़ से ज्यादा रखा गया था. मेकर्स का वादा था कि नई मॉडर्न सिनेमैटिक प्रेजेंटेशन के साथ रामायण की कहानी को आदिपुरुष ऐसे अंदाज में दिखाएगी कि जनता देखती रह जाएगी. लेकिन पहले टीजर से ही जनता को आदिपुरुष की प्रेजेंटेशन खटकने लगी थी. डायलॉग्स का मॉडर्न टच, एनिमेटेड विजुअल्स और सैफ अली खान का रावण जनता को हजम ही नहीं हुए.

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नमित मल्होत्रा की रामायण 2017 में अनाउंस हुई थी. इसके 3 साल बाद, 2020 में आदिपुरुष अनाउंस हुई. 2023 में आदिपुरुष स्क्रीन्स पर भी आ गई और फ्लॉप भी हो गई. जबकि तब तक रामायण का शूट भी शुरू नहीं हो पाया था, डायरेक्टर नितेश तिवारी प्री-प्रोडक्शन में ही लगे हुए थे. 2017-2020 तक जितनी भी रामायण-बेस्ड फिल्में अनाउंस हुईं, उनमें नमित मल्होत्रा की रामायण सबसे पहली थी. लेकिन ये स्क्रीन्स तक सबसे बाद में पहुंच रही है और तब तक दर्शक आदिपुरुष से जीभ जला चुके हैं. इसलिए दोनों फिल्मों में तुलना तो रिलीज के बाद भी होती ही रहेगी.

क्यों बेहतर लग रही है रामायण?
रामायण का बजट (दोनों पार्ट्स मिलाकर) 4000 करोड़ रुपये बताया गया है, जो आदिपुरुष से ऑलमोस्ट 6-7 गुना है. रामायण की पूरी कास्टिंग आदिपुरुष से बहुत बड़ी है. ओम राऊत की फिल्म में सबसे बड़ा नाम प्रभास थे. जबकि नितेश तिवारी की रामायण में रणबीर के अलावा, सीता का रोल कर रहीं साई पल्लवी, रावण बने यश और हनुमान बने सनी देओल तक एक-एक नाम बहुत बड़ा है. रामायण के टीजर में नजर आ रहे विजुअल्स से फिल्म का स्केल शानदार लग रहा है. लेकिन रामायण सिर्फ प्रोडक्शन, बजट, विजुअल्स या कास्टिंग के मामले में ही आदिपुरुष से बेहतर नहीं है. इसे ज्यादा दमदार बनाने वाली चीज है— राम कथा का ट्रीटमेंट.

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आदिपुरुष का पहला टीजर ही भगवान राम के योद्धा रूप को हाइलाइट करता नजर आ रहा था. रामायण के टेक्स्ट से लेकर, दूरदर्शन के रामायण टीवी सीरियल तक राम का चरित्र कभी भी इतना ज्यादा एक सुर में नहीं दिखाया गया. राम को सिर्फ रावण का संहार करने के लिए नहीं पूजा जाता. राम के प्रति जनता की आस्था उनके आदर्श व्यवहार में छुपी है.

रिश्तों की मर्यादाओं का ऐसा पालन करना कि पिता के वचन पूरे करने के लिए राज सिंहासन छोड़कर चल देना. एक बेटे, पति और भाई के रूप में आदर्श व्यवहार रखना. सगी और सौतेली का फर्क भूलकर अपनी तीनों माताओं को एक बराबर सम्मान देना. ये सब राम को मर्यादा पुरुषोत्तम बनाता है. रावण को युद्ध में हराकर राम ने मर्यादा और आदर्शों की पुनर्स्थापना की थी. रावण से उनकी कोई खानदानी दुश्मनी नहीं थी.

असुरों और राक्षसों के प्रति भी राम में दया भाव था. मगर आदिपुरुष ने अपने हीरो राघव को एक 'अवेंजर' की तरह ट्रीट किया था. इस फिल्म का हीरो हाइपर-एग्रेसिव वॉरियर है जो अपने राक्षसों का विनाश करने और बदला लेने की हीट में है. पहले टीजर से ही आदिपुरुष ने राम और रामायण को इसी तरह ट्रीट किया. आदिपुरुष का नैरेटिव राम को मर्यादित आचरण और खुद पर संयम का प्रतीक बनाने की बजाय, युद्ध करने का प्रतीक बना देता है.

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दूसरी तरफ रामायण का सिर्फ टीजर ही राम की मर्यादा पुरुषोत्तम शख्सियत को हाइलाइट करता है. रामायण के टीजर का बड़ा हिस्सा राम के वनवास जाने और अयोध्या छोड़ने वाले हिस्से पर फोकस करता है. ढाई मिनट के ही टीजर वीडियो में डायरेक्टर नितेश तिवारी का ट्रीटमेंट आपको बता देता है कि यहां कोशिश राम के किरदार को उसकी पूर्णता में दिखाने की है. रणबीर कपूर के राम सिर्फ युद्ध के लिए ललकारते योद्धा की तरह नहीं दिखने वाले. टीजर का ये पहलू रामायण को एक प्रॉमिसिंग प्रोजेक्ट बना देता है.

इसके टीजर में VFX की दिक्कतें जरूर हैं और अभी मेकर्स के पास इस तरह की दिक्कतें दूर करने के लिए पूरा समय है. लेकिन ऑरिजिनल कंटेंट को गंभीरता से ट्रीट करने के मामले में नमित मल्होत्रा की रामायण का दिल बिल्कुल सही जगह नजर आता है. देखना है कि टीजर में नजर आ रहा ये वादा, रामायण स्क्रीन पर पूरी तरह डिलीवर करने में कितनी कामयाब होती है.

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