फिल्ममेकर राम गोपाल वर्मा ने एक्टर टाइगर श्रॉफ से जुड़ी गोलीबारी की घटना पर अपना विचार शेयर किया है. उन्होंने तर्क दिया कि हमला करने वालों की गिरफ्तारी से जरूरी नहीं कि उनके पीछे का नेटवर्क कमजोर हो जाए. इसलिए, हमलावरों की गिरफ्तारी पर जश्न नहीं मनाना चाहिए.
राम गोपाल वर्मा ने लिखा, 'जो लोग टाइगर श्रॉफ के शूटर्स के पकड़े जाने का जश्न मना रहे हैं, उन्हें असलियत जान लेनी चाहिए... अंडरवर्ल्ड में, जो इंसान असल में ट्रिगर दबाता है, वह उनके पूरे सिस्टम का सबसे आसानी से बदला जा सकने वाला, सबसे कम अहमियत रखने वाला और सबसे सस्ता हिस्सा होता है. इसीलिए शूटर को सबसे कम पैसे मिलते हैं, क्योंकि उसकी अहमियत सिर्फ शारीरिक होती है और वह भी कुछ समय के लिए... एक बार काम पूरा हो जाए, तो उसकी कोई जरूरत नहीं रह जाती.'
राम गोपाल वर्मा का पोस्ट
राम गोपाल वर्मा ने आगे कहा, 'संगठन उसे सोचने, मैनेजमेंट करने, मोल-भाव करने, कंट्रोल रखने या सिस्टम को बनाए रखने के लिए इस्तेमाल नहीं करता. उन्हें किसी इमारत के निर्माण में लगे मजदूरों की तरह समझा जा सकता है, क्योंकि मजदूर न तो इमारत का डिजाइन बनाते हैं और न ही उसके मालिक होते हैं. अंडरवर्ल्ड में, शूटर वही मजदूर है. जो लोग काम सौंपते हैं और तय करते हैं कि कौन जिंदा रहेगा और कौन मरेगा, वे असल में आर्किटेक्ट और मालिक होते हैं.'
'इसी तरह, राजा या सेनापति खुद जंग नहीं लड़ते; सैनिक लड़ते हैं. पूरी मिलिट्री व्यवस्था इस तरह बनाई जाती है कि फैसले लेने वाले लोग असल लड़ाई से दूर रहें. सेनापति लड़ने का आदेश देता है, और सैनिक ही होता है जो या तो किसी को मारता है, या खुद मारा जाता है, या फिर पकड़ा जाता है.'
अंत में फिल्ममेकर ने कहा, 'मेरा मकसद सेना और अंडरवर्ल्ड को एक ही श्रेणी में रखना नहीं है, बल्कि सत्ता के उस साफ लॉजिक को समझाना है. फैसले लेने वालों को जोखिम उठाने वालों से अलग रखकर, यह सिस्टम लंबे समय तक हिंसा जारी रख सकता है, जबकि टॉप पर बैठे लोग सुरक्षित रहते हैं. अगर डॉन को खुद हर हत्या करनी पड़े, तो हो सकता है कि वह भी मारा जाए; इसलिए वह ऐसे शूटर्स का इस्तेमाल करता है जिन्हें आसानी से बदला जा सकता है.'
'तो असल में, शूटर्स का पकड़ा जाना न तो पुलिस की कोई बड़ी जीत है और न ही अंडरवर्ल्ड का कोई बड़ा नुकसान. यही वजह है कि पूरे बॉलीवुड पर आज भी डर का साया छाया हुआ है.'