बॉलीवुड एक्ट्रेस प्रीति जिंटा ने लंबे समय बाद बड़े पर्दे पर वापसी की, तो फैंस के बीच भी खूब एक्साइटमेंट देखने को मिली. फिल्म में उनके साथ सनी देओल और शबाना आजमी जैसे दिग्गज कलाकार भी थे. लेकिन बड़े नामों और दमदार स्टारकास्ट के बावजूद ‘बंटवारा 1947’ बॉक्स ऑफिस पर कुछ खास कमाल नहीं दिखा पाई.
अब फिल्म के प्रदर्शन को लेकर प्रीति जिंटा ने खुलकर बात की है. एक्ट्रेस का कहना है कि एक कलाकार अपने काम और मेहनत पर कंट्रोल रख सकता है, लेकिन फिल्म रिलीज होने के बाद उसकी किस्मत में क्या लिखा है, ये उसके हाथ में नहीं होता.
फिल्म नहीं चली, लेकिन प्रीति को है गर्व
मिड-डे को दिए इंटरव्यू में प्रीति जिंटा ने फिल्म के प्रदर्शन पर बात करते हुए कहा कि उन्हें इस फिल्म पर गर्व है. उन्होंने बताया कि एक एक्टर के तौर पर वह हर फिल्म में अपनी तरफ से पूरी मेहनत करती हैं. प्रीति ने कहा कि जब वह किसी फिल्म पर काम कर रही होती हैं, तो अपनी तरफ से 100 फीसदी देती हैं. उनके लिए सबसे जरूरी है कि उन्होंने अपने हिस्से का काम पूरी ईमानदारी से किया या नहीं.
फिल्म बॉक्स ऑफिस पर चले या ना चले, प्रीति के लिए उनकी मेहनत की कीमत कम नहीं होती.
फिल्म के बॉक्स ऑफिस नतीजे पर बात करते हुए प्रीति ने अपनी सोच साफ शब्दों में रखी. उन्होंने कहा कि वह कर्म में विश्वास करती हैं.
एक्ट्रेस के मुताबिक, इंसान अपने कर्म कर सकता है और उसके बाद बाकी चीजें भगवान पर छोड़ देनी चाहिए. उन्होंने कहा कि हर फिल्म के लिए वह जितनी मेहनत कर सकती हैं, करती हैं और फिर फिल्म की किस्मत को अपने हाथ में रखने की कोशिश नहीं करतीं.
प्रीति ने यहां तक कहा कि वह हर फिल्म में अपना 1000 फीसदी देने की कोशिश करती हैं और उसके बाद नतीजा भगवान पर छोड़ देती हैं.
लंबे वक्त बाद हुई थी प्रीति की वापसी
‘बंटवारा 1947’ प्रीति जिंटा के लिए इसलिए भी खास थी क्योंकि उन्होंने इस फिल्म के जरिए लंबे समय बाद बड़े पर्दे पर वापसी की थी. फिल्म में वह सनी देओल के साथ नजर आईं. वहीं शबाना आजमी, करण देओल, अली फजल, अभिमन्यु सिंह, खुशी हजारे, कनिका कपूर और ईशा संधीर जैसे कलाकार भी फिल्म का हिस्सा हैं.
फिल्म का निर्देशन राजकुमार संतोषी ने किया है, जबकि इसे आमिर खान ने प्रोड्यूस किया है. इतनी बड़ी स्टारकास्ट देखकर उम्मीद थी कि फिल्म बॉक्स ऑफिस पर अच्छी शुरुआत करेगी, लेकिन रिलीज के बाद कहानी कुछ और ही निकली.
आखिर किस बारे में है ‘बंटवारा 1947’?
फिल्म की कहानी 1947 के भारत-पाकिस्तान विभाजन के दौर में सेट है. कहानी लाहौर की पृष्ठभूमि में आगे बढ़ती है और उस दौर में बंटवारे की वजह से पैदा हुए हालात और इंसानी रिश्तों को दिखाती है. फिल्म की कहानी असगर वजाहत के नाटक ‘जिस लाहौर नइ देख्या, ओ जम्या ई नइ’ पर आधारित है.
कहानी में सनी देओल का किरदार सिकंदर मिर्जा अपने परिवार के साथ भारत से लाहौर पहुंचता है. परिवार को एक हवेली रहने के लिए मिलती है, लेकिन वहां पहले से दुर्गावती नाम की एक हिंदू महिला रह रही होती हैं. दुर्गावती अपने बेटे के वापस लौटने का इंतजार कर रही हैं. यहीं से कहानी में रिश्तों, बंटवारे, दर्द और इंसानियत का सिलसिला शुरू होता है.
फिल्म भले ही दर्शकों को सिनेमाघरों तक खींचने में ज्यादा सफल नहीं रही, लेकिन प्रीति जिंटा का नजरिया काफी अलग है. उनके लिए फिल्म का नतीजा ही सब कुछ नहीं है. वह मानती हैं कि एक कलाकार के हाथ में सिर्फ उसकी मेहनत होती है. रिलीज के बाद दर्शक फिल्म को कितना पसंद करेंगे, बॉक्स ऑफिस पर कैसी कमाई होगी और फिल्म की किस्मत क्या होगी-इन चीजों को कोई एक्टर पूरी तरह कंट्रोल नहीं कर सकता.