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'मौत के लिए तैयार थे नाना, फार्महाउस पर इकट्ठी की थी लकड़ियां', देखकर शॉक्ड था करीबी दोस्त

नाना पाटेकर के निधन और अंतिम संस्कार के बाद अतुल कस्बेकर ने उनका एक पुराना किस्सा सुनाया. नाना ने अपने अंतिम संस्कार की लकड़ियां पहले ही सुखाकर रखी थीं, ताकि धुएं से लोग न रोएं.

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नाना की मौत से जुड़ा ये किस्सा (Photo: ITGD)
नाना की मौत से जुड़ा ये किस्सा (Photo: ITGD)

नाना पाटेकर का निधन 8 अक्टूबर को 75 साल की उम्र में कार्डियक अरेस्ट के चलते हो गया. उनके जाने से फिल्म इंडस्ट्री में शोक की लहर है. नाना पाटेकर का अंतिम संस्कार भी हो चुका है. इस बीच मशहूर फोटोग्राफर अतुल कस्बेकर ने नाना को याद करते हुए एक ऐसा किस्सा साझा किया है, जो उनके बेहद अलग और बेबाक अंदाज की पूरी कहानी कह देता है. नाना ने अपने ही अंतिम संस्कार के लिए लकड़ियां पहले से संभालकर रखी थीं और इसकी वजह भी ऐसी बताई थी कि सुनकर पहले हंसी आएगी, फिर आंखें नम हो जाएंगी.

‘नाना साहब… क्या आदमी थे!’

अतुल कस्बेकर ने गुरुवार को इंस्टाग्राम पर नाना की एक ब्लैक एंड व्हाइट तस्वीर शेयर करते हुए उन्हें याद किया. उन्होंने लिखा कि नाना के साथ उनका रिश्ता बेहद गर्मजोशी भरा था. दोनों अक्सर नहीं मिलते थे, लेकिन जब भी मिलते, ऐसा लगता जैसे कल ही मुलाकात हुई हो.

अतुल ने नाना को याद करते हुए उन्हें ‘अनप्रेडिक्टेबल, इंटेंस और अपने उसूलों पर चलने वाला इंसान’ बताया. उनके मुताबिक नाना ऐसे शख्स थे, जो अपनी मौजूदगी भर से पूरे फिल्म सेट पर असर डाल सकते थे.

फार्महाउस पर खुद खाना परोसते थे नाना

अतुल ने पुणे स्थित नाना के फार्महाउस की एक मुलाकात का किस्सा भी सुनाया. वह वहां एक फोटो सीरीज के लिए शूट करने पहुंचे थे. शूट के दौरान नाना ने अपने क्रू के लिए जिस तरह खाना खिलाया, उसे अतुल आज भी नहीं भूल पाए हैं.

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उन्होंने बताया कि नाना के असिस्टेंट, स्पॉट बॉय और ड्राइवर तक उनके मुख्य डाइनिंग एरिया में साथ बैठे थे. नाना खुद सबके पास जाकर रोटियां और अपने मशहूर मटन की अतिरिक्त सर्विंग परोस रहे थे. जिस अभिनेता की एक नजर से पूरा फिल्म सेट खामोश हो सकता था, वही नाना अपने लोगों के बीच बैठकर खुद खाना परोस रहे थे. न कोई छोटा-बड़ा, न कोई दिखावा- बस दिल खोलकर मेहमाननवाजी.

फिर नाना ने दिखाई वो लकड़ियां…

अतुल ने बताया कि नाना ने उन्हें अपना फार्महाउस घुमाया. यहां तक कि जिम में उन्होंने बिना किसी वार्मअप के करीब दर्जनभर ट्राइसेप डिप्स भी करके दिखाए. अतुल ने इस अंदाज में उन्हें मजाकिया तौर पर ‘शो-ऑफ’ तक कह दिया. लेकिन इसके बाद नाना ने जो दिखाया, वह यादगार बन गया.

अतुल ने लिखा कि नाना ने उन्हें अपने अंतिम संस्कार के लिए जमा करके रखी गई लकड़ियों का ढेर दिखाया था.

‘गीली लकड़ी से धुआं होगा, लोग रोएंगे नहीं तो?’

नाना ने अतुल को बताया था कि उन्होंने लकड़ियों को सूखा कर रखा है. वजह सुनकर शायद कोई भी हैरान रह जाए. नाना का कहना था कि अगर लकड़ी गीली हुई तो बहुत धुआं निकलेगा और अंतिम संस्कार में आने वाले लोग धुएं की वजह से आंखों में पानी आने पर रोने लगेंगे. वह नहीं चाहते थे कि उनके अंतिम संस्कार में लोग धुएं की वजह से रोएं.

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यही नाना का अंदाज था. जहां कोई इंसान मौत और अंतिम संस्कार की बात पर गंभीर हो जाता, वहां नाना ने उसी पल में भी अपना काला हास्य और बेबाकी खोज ली. अतुल ने लिखा कि सिर्फ नाना साहब ही अपने अंतिम संस्कार को भी कॉमेडी में बदल सकते थे.

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