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पाकिस्तानी राष्ट्रपति जरदारी के 3-4% हिंदू वाले बयान पर भड़के जावेद अख्तर, याद दिलाया '10%' विवाद

पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने पाकिस्तान के स्वतंत्रता दिवस मौके पर वहां रह रहे हिंदूओं को लेकर ऐसा बयान दिया, जिससे जावेद अख्तर भी नाराज हो गए. उन्होंने उन्हें अपने अंदाज में फटकार लगाई.

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जावेद अख्तर ने दिया जवाब (Photo: PTI/File Photo)
जावेद अख्तर ने दिया जवाब (Photo: PTI/File Photo)

पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी इस समय अपने बयान को लेकर सुर्खियों में हैं. 14 अगस्त को पाकिस्तान के आजादी दिवस के मौके पर उन्होंने अपने देश में मौजूद हिंदू आबादी को लेकर विवादित बयान दिया. उन्होंने कहा था कि पाकिस्तान में मुसलमान हिंदुओं के प्रति सहनशील हैं और वो भारत की तुलना में पाकिस्तान में रहना पसंद करते हैं. 

पाकिस्तान राष्ट्रपति के इस बयान से मशहूर फिल्म राइटर जावेद अख्तर बिल्कुल सहमत नहीं दिखे. उन्होंने उन्हें अपने अंदाज में इस बात का जवाब दिया, और उनपर तंज भी कसा जो अब काफी वायरल हो रहा है. 

आसिफ अली जरदारी को मिला जवाब

जावेद अख्तर ने X के जरिए आसिफ अली जरदारी को उनके बयान पर घेरते हुए लिखा- पाकिस्तान के आसिफ अली जरदारी, जो बेनजीर भुट्टो से शादी के बाद सुर्खियों में आए थे, कहते हैं कि उनके देश में 3-4 प्रतिशत हिंदू आबादी को वो बर्दाश्त करते हैं. मिस्टर जरदारी, मैं आपकी बात समझता हूं. आप हमेशा उन सभी लोगों के प्रति असंवेदनशील रहे हैं, जिनकी आबादी 10 प्रतिशत से भी कम है. 

क्या है जावेद अख्तर का तंज?

आसिफ अली जरदारी को 1980 और 1990 के दशक में मिस्टर 10 परसेंट नाम दिया गया था. इसकी वजह थी कि उस दौर में उनपर भ्रष्टाचार के आरोप लगे थे. कहा जाता था कि सरकारी प्रोजेक्ट्स की मंजूरी दिलाने के लिए वो 10 प्रतिशत का कमिशन लेते थे. 1990 में तत्कालीन कार्यवाहक प्रधानमंत्री गुलाम मुस्तफा जताई ने भी जरदारी पर सरकारी प्रोजेक्ट्स और बैंक लोन से जुड़े मामलों में कमीशन लेने के आरोप लगाए थे. इसी वजह से उनका ये उपनाम काफी मशहूर हुआ. 

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आखिर क्या बोले थे पाकिस्तान के राष्ट्रपति?

आसिफ अली जरदारी दरअसल अपने देश की आजादी के दिन भारत पर निशाना साधने की कोशिश कर रहे थे. एक वायरल वीडियो में उन्होंने कहा था- भारतीयों का नजरिया अलग है. उनके दिमाग में अपना एजेंडा है. वो अखंड भारत में विश्वास रखते हैं. लेकिन इस बीच बहुत कुछ ऐसा है जिसे वो भूल गए हैं. हम मुसलमान हैं और वो नहीं हैं. लेकिन हमारा नजरिया ये है कि हम पाकिस्तान में रहने वाली 3-4 प्रतिशत हिंदू आबादी को सहन करते हैं. उन्हें भी उतनी ही आजादी और अच्छे अधिकार मिले हुए हैं, जितने कहीं और लोगों को मिलते हैं. वो (हिंदू)  बजाय उनके साथ रहने के हमारे साथ रहना ज्यादा पसंद करेंगे. 

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