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हनुमान अंश का चमत्कार! चर्चा में प्रयागराज का वो घर, जहां कभी रुके थे नीम करोली बाबा, कहा था- मैं यहीं रहूंगा

Hanuman Ansh की चर्चा के बीच प्रयागराज का वो घर भी सुर्खियों में है, जहां कभी नीम करौली बाबा रुके थे. न मंदिर, न मूर्ति, फिर भी प्रयागराज के इस घर में रोज पहुंचते हैं भक्त. जानिए घर से जुड़ी पूरी कहानी।

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हनुमान अंश की सफलता के बीच क्यों वायरल हो रहा ये घर? (Photo: ITGD)
हनुमान अंश की सफलता के बीच क्यों वायरल हो रहा ये घर? (Photo: ITGD)

प्रयागराज के एक शांत से इलाके में बना एक साधारण-सा घर इन दिनों लोगों की आस्था का बड़ा केंद्र बना हुआ है. न यहां कोई भव्य मंदिर है, न बड़ी मूर्ति और न ही किसी तरह का दिखावा. फिर भी शाम होते ही लोग इस घर के बाहर पहुंचने लगते हैं. वजह है इस घर का नीम करौली बाबा से जुड़ा होना.

फिल्म हनुमान अंश ने नीम करौली बाबा की कहानी को बड़े पर्दे पर पहुंचाया, तो उनके जीवन से जुड़े पुराने ठिकानों को लेकर भी लोगों की दिलचस्पी बढ़ गई. प्रयागराज के 18/4 चर्च लेन स्थित इसी घर पर इन दिनों भक्त दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं.

आखिर इस घर में ऐसा क्या है?

बाहर से देखने पर यह घर अपने आसपास के बाकी मकानों जैसा ही लगता है. लेकिन घर के अंदर एक कमरा आज भी उसी तरह संभालकर रखा गया है, जहां माना जाता है कि नीम करौली बाबा ठहरा करते थे और प्रार्थना करते थे.

यह घर कभी इलाहाबाद यूनिवर्सिटी के अर्थशास्त्र के प्रोफेसर सुधीर मुखर्जी का था. बताया जाता है कि बाबा साल में एक-दो बार उनसे मिलने यहां आया करते थे.

आज घर की देखभाल सत्या पांडे और उनके पति इंद्रेश प्रसाद करते हैं. यहां शाम 5 बजे से रात 8 बजे तक लोग दर्शन के लिए आ सकते हैं. खास बात यह है कि यहां कोई चढ़ावा स्वीकार नहीं किया जाता. दर्शन के बाद श्रद्धालुओं को लड्डू प्रसाद के रूप में दिए जाते हैं.

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वो कमरा आज भी वैसा ही है

घर का सबसे खास हिस्सा वही कमरा है, जहां बाबा के ठहरने की बात कही जाती है. वहां रखा उनका तख्त और तकिया आज भी श्रद्धा के साथ पूजे जाते हैं. रोज फूल चढ़ाए जाते हैं और हर मंगलवार बिस्तर की चादर बदली जाती है. कहा जाता है कि बाबा को लौकी की सब्जी, मूंग दाल और बेसन की रोटी पसंद थी. इसलिए आज भी इन्हीं चीजों का भोग लगाया जाता है. यह कोई फिल्म का सेट नहीं, बल्कि बाबा से जुड़ी एक पुरानी याद को संभालकर रखा गया घर है.

प्रयागराज का वो घर

हनुमान अंश की वजह से फिर बढ़ी लोगों की दिलचस्पी

यह साफ कर दें कि हनुमान अंश की शूटिंग इस घर के अंदर नहीं हुई है. फिल्म ने बाबा के जीवन और उनकी आध्यात्मिक यात्रा को कहानी के रूप में पेश किया है, जिसके बाद उनसे जुड़े स्थानों को देखने की लोगों की उत्सुकता बढ़ी है.

फिल्म के लेखक और निर्देशक विशाल चतुर्वेदी हैं और कहानी उनकी किताब डिवाइन डिटूर: दैट चेंज्ड माय लाइफ पर आधारित है. फिल्म में शोक में डूबे लक्ष्मीनारायण की कहानी दिखाई गई है, जो अपनी मां की मौत के बाद जीवन, मृत्यु और दुख के सवालों के जवाब तलाशने निकलता है और आगे चलकर वही शख्स नीम करौली बाबा के रूप में जाना जाता है.

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फिल्म में शोभिनाव सत्य, विहान शेडगे, चंदन के आनंद, पूर्णिमा तिवारी, अनिल रस्तोगी, गुलशन पांडे और भागवंदास नजर आए हैं.

बाबा और इस घर का कनेक्शन करीब 90 साल पुराना बताया जाता है

इस घर की कहानी सिर्फ कुछ दशक पुरानी नहीं है. बाबा और प्रोफेसर सुधीर मुखर्जी के संबंध को करीब एक सदी पुराना बताया जाता है. कहा जाता है कि दोनों की पहली मुलाकात 1935 में कोलकाता के दक्षिणेश्वर मंदिर में हुई थी. इसके बाद 1950 में इलाहाबाद में दोनों फिर मिले. उस समय प्रोफेसर मुखर्जी यूनिवर्सिटी में पढ़ा रहे थे. बाबा से प्रभावित होकर प्रोफेसर ने 1956 में चर्च लेन वाला यह घर बनवाया.

सत्या के मुताबिक, समय के साथ बाबा और मुखर्जी परिवार के बीच रिश्ता बेहद करीबी हो गया. दंपती की अपनी कोई संतान नहीं थी, इसलिए उन्होंने सत्या को बेटी के रूप में अपने परिवार में रखा.

कहते हैं, बाबा ने कहा था- 'मैं यहीं रहूंगा'

सत्या के मुताबिक, बाबा को भगवान हनुमान का भक्त माना जाता था और कुछ मान्यताओं में उन्हें हनुमान का अवतार भी बताया गया है. उनका दावा है कि बाबा ने एक बार प्रोफेसर मुखर्जी के सामने हनुमान के रूप में दर्शन दिए थे. सत्या यह भी बताती हैं कि बाबा अपने चमत्कारों का प्रचार करने में विश्वास नहीं रखते थे. उनका मानना था कि जो होना है, वह अपने आप होता है.

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प्रोफेसर मुखर्जी का निधन 1997 में हुआ. कुछ साल बाद उनकी पत्नी कमला भी नहीं रहीं. परिवार के मुताबिक, बाबा ने कभी प्रोफेसर से कहा था कि यह घर उनका है और वह हमेशा यहीं रहेंगे.

प्रयागराज का वो घर

आज भी परिवार को लगता है कि बाबा की मौजूदगी इस घर से जुड़ी हुई है. शायद यही वजह है कि एक आम-सा दिखने वाला घर, बिना किसी मंदिर या तामझाम के, लोगों के लिए आस्था की जगह बना हुआ है.

उधर बॉक्स ऑफिस पर भी Hanuman Ansh का जलवा जारी

जिस फिल्म ने नीम करौली बाबा की कहानी को नई पीढ़ी तक पहुंचाया, वह बॉक्स ऑफिस पर भी लगातार चर्चा में है. हनुमान अंश 7 अगस्त को रिलीज हुई थी. कथित तौर पर 2 करोड़ रुपये से कम बजट में बनी इस फिल्म ने शुरुआत धीमी की थी और पहले दो हफ्तों में करीब 1 करोड़ रुपये ही जुटाए थे. इसके बाद फिल्म ने रफ्तार पकड़ी और घरेलू बॉक्स ऑफिस पर 100 करोड़ रुपये का आंकड़ा पार कर लिया.

सैकनिल्क के आंकड़ों के मुताबिक, Day 40 पर फिल्म ने 9,175 शोज से 8.25 करोड़ का नेट कलेक्शन किया. इसके साथ भारत में फिल्म का कुल ग्रॉस कलेक्शन 272.90 करोड़ और नेट कलेक्शन 231.13 करोड़ पहुंच गया है.

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विदेशों में Day 40 पर फिल्म ने 2 करोड़ कमाए, जिससे ओवरसीज ग्रॉस 18.50 करोड़ हो गया. इस तरह फिल्म का वर्ल्डवाइड ग्रॉस कलेक्शन 291.40 करोड़ तक पहुंच चुका है. फिल्म की चर्चा बॉलीवुड तक भी पहुंची है और कंगना रनौत और वरुण धवन समेत कई सितारे इसकी तारीफ कर चुके हैं. मेकर्स ने फिल्म के सीक्वल की भी पुष्टि कर दी है.

लेकिन बॉक्स ऑफिस के इन बड़े आंकड़ों के बीच प्रयागराज का यह छोटा-सा घर शायद इस फिल्म की सबसे दिलचस्प कहानी बन गया है- जहां पर्दे पर दिखाए गए संत की याद आज भी लोगों को एक साधारण से दरवाजे तक खींच ला रही है.

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