फिल्म हनुमान अंश का बॉक्स ऑफिस पर डंका बज रहा है. महज 2 करोड़ में बनी फिल्म ने बड़ी मूवीज को चारों खाने चित्त कर दिया है. हनुमान अंश का कलेक्शन 250 करोड़ के पार हो गया है. नीम करोली बाबा की जिंदगी पर बनी फिल्म ने कईयों की किस्मत बदली है. इस फेहरिस्त में इसके म्यूजिक कंपोजर धीरेन्द्र मुलकलवार भी शामिल हो गए हैं.
एक वक्त था जब इंडस्ट्री में उन्हें रिजेक्ट किया जा रहा था. लेकिन अब हनुमान अंश के ब्लॉकबस्टर होने के बाद हर कोई उनके साथ काम करना चाह रहा है. धीरेन्द्र ने हिंदुस्तान टाइम्स संग बातचीत में कहा- ये हमारे लिए किसी चमत्कार से कम नहीं है. हमें अभी तक समझ नहीं आ रहा कि कैसे रिएक्ट करें. मुझे लगता है हमने खुद को बाबा जी को सरेंडर कर दिया था. अब उनकी हम पर कृपा बरस रही है.
फिल्म ने बदली किस्मत
धीरेंद्र ने बताया कि लिमिटेड बजट के साथ ये फिल्म बनाना बड़ा चैलेंज था. हालांकि दिक्कतें हमेशा नहीं रही. सुबह पहला शॉट शुरू करने से पहले पूरा क्रू 30-40 मिनट हनुमान चालीसा पढ़ता था और आरती करता था. जैसे ही प्रार्थना खत्म होती थी मामला खुद से सुलझ जाता था. या फिर उन्हें परेशानियों का हल मिल जाता था. क्रू ने शूटिंग के दौरान सात्विक खाना और लाइफस्टाइल को अपनाया था. फिल्म के म्यूजिक कंपोजिशन को लेकर भी चमत्कार देखने को मिला था.
धीरेन्द्र के मुताबिक, फिल्म के पहले थीम पर करीब दो महीने तक काम किया. काफी कोशिशों के बाद भी जब बात नहीं बनी तो उन्होंने बाबा जी का ध्यान किया. इसके बाद महज कुछ मिनटों में उनके दिमाग में धुन आ गई थी. ऐसा फिल्म पर काम करते हुए कई बार हुआ. जैसे कि चीजें बीच में अटक जाती थीं. धीरेंद्र ने बताया कि फिल्म के म्यूजिक पर काम करने के बाद उन्होंने अपने दोस्तों की भी राय ली थी. सभी को ये डिवाइन लगा. उनका मानना है फिल्म की सफलता के पीछे सोशल मीडिया का अहम योगदान है.
छोड़ने वाले थे इंडस्ट्री, फिर...
धीरेंद्र को सालों की मेहनत के बाद सफलता मिली है. लेकिन उन्होंने मायानगरी में खुद को स्थापित करने के लिए सालों दिए हैं. वो महाराष्ट्र के चंद्रपुर से आते हैं. जंगलों और आदिवासी-लोक संगीत के माहौल में पले-बढ़े धीरेन्द्र का सपना था कि एक दिन बड़े पर्दे पर अपना नाम बतौर म्यूजिक कंपोजर देखेंगे. मुंबई आने के बाद उन्होंने ऐड फिल्मों और जिंगल्स पर काम किया. लेकिन फिल्मों में एंट्री आसान नहीं थी. उनके कई प्रोजेक्ट बंद हो गए, कई जगह उन्हें सिर्फ इसलिए रिप्लेस कर दिया गया क्योंकि वो नए थे. करीब 20 साल के संघर्ष के बाद धीरेन्द्र ने मुंबई छोड़कर घर लौटने तक का मन बना लिया था. तभी उनकी जिंदगी में एक बड़ा मोड़ आया.
दरअसल, वो पिछले चार साल से कैंची धाम जाने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन हर बार बात नहीं बन पाती थी. आखिरकार वो वहां पहुंचे. इसके बाद हुआ मैजिक. दो महीने बाद डायरेक्टर विशाल चतुर्वेदी ने उन्हें 'हनुमान अंश' ऑफर कर दी. धीरेन्द्र इसे महज संयोग नहीं मानते. उन्हें लगता है कि बाबा जी ने उन्हें मेहनत का फल दिया है. कभी धीरेन्द्र को रिजेक्ट करने वाले लोग अब उन्हें खुद से फोन कर ऑफर दे रहे हैं. अब उनकी डिमांड बढ़ती जा रही है.