दिग्गज एक्टर अनंत नाग को 22 सितंबर को 72वें नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स में दादा साहब फाल्के सम्मान से सम्मानित किया गया. भारतीय सिनेमा में उनके योगदान के लिए दर्शकों ने खड़े होकर उनका सम्मान किया.
दादा साहब फाल्के सम्मान पाने के बाद अपने भाषण में अनंत नाग ने उन सभी लोगों का शुक्रिया अदा किया, जिन्होंने उनके करियर में उनकी मदद की. उन्होंने कहा, 'यह अवॉर्ड सिर्फ मेरा नहीं है. यह उन सभी का भी है- प्रोड्यूसर, डायरेक्टर, एसोसिएट डायरेक्टर, असिस्टेंट डायरेक्टर. यह अवॉर्ड उन लाखों लोगों का भी है जिन्होंने दशकों तक मेरे किरदारों के लिए अपने दिल और दिमाग के दरवाजे खोले.'
दादा साहब फाल्के अवॉर्ड पाने के बाद दर्शकों को संबोधित करते हुए अनंत नाग ने सिनेमा में अपने पांच दशक के सफर को याद किया. अपने करियर और सम्मान के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा, 'मैं इस समारोह की भव्यता को समझने की कोशिश कर रहा हूं. आज आप सबके बीच आकर मुझे बहुत खुशी हो रही है. एक एक्टर के तौर पर, आपने मेरा काम देखा है.आपने कुछ झलकियां देखी हैं. मैं एक आश्रम में पला-बढ़ा. 12 साल की उम्र तक मेरा बचपन वहीं बीता. मुंबई में मुझे एक नाटक में अभिनय करने का मौका मिला.'
उन्होंने आगे एक अभिनेता के तौर पर कर्नाटक के ब्रांड एंबेसडर होने के बारे में बात की और कहा कि अलग-अलग भाषाओं में काम करने के बावजूद, उन्हें कर्नाटक में ही सबसे ज्यादा प्यार और सम्मान मिला.
VIDEO | Ekta Nagar, Kevadia: After receiving Dadasaheb Phalke Award at the 72nd National Film Awards, veteran actor Anant Nag says, “In about five years, I acted in around 50 plays, different plays, which served as my training ground for acting…Over the last 50 years, I was… pic.twitter.com/GFQro05h6b
— Press Trust of India (@PTI_News) September 22, 2026
पिछले साल, मुझे हमारी आदरणीय राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु जी के हाथों पद्म भूषण पाने का सौभाग्य मिला. और इस बार फिर, मैं खुद को बहुत खुशकिस्मत और सौभाग्यशाली मानता हूं कि मुझे सिनेमा के सबसे बड़े सम्मान माने जाने वाले दादा साहब फाल्के अवॉर्ड से एक बार फिर मुर्मु जी के हाथों ही सम्मानित किया गया. इस मौके पर मैं बहुत आभारी महसूस कर रहा हूं.'
अंत में उन्होंने कहा, 'अपनी बात खत्म करने से पहले, मैं श्री आदि शंकराचार्य की बात दोहराना चाहता हूं - 'वंदे मातरम... यह महान देश मेरी जन्मभूमि है; कर्नाटक मेरी कर्मभूमि है. भारत मेरी धर्मभूमि भी है.'
अनंत नाग का करियर
4 सितंबर 1948 को जन्मे नाग ने मुंबई में थिएटर में दिलचस्पी लेने के बाद 1970 के दशक की शुरुआत में अपने एक्टिंग करियर की शुरुआत की. उन्होंने 1973 में कन्नड़ फिल्म 'संकल्प' से फीचर फिल्मों में डेब्यू किया और श्याम बेनेगल की 'अंकुर' में भी काम किया, जो भारत के पैरेलल सिनेमा मूवमेंट की एक अहम फिल्म बनी. बेनेगल के साथ उनका साथ 'मंथन' और 'भूमिका' जैसी फिल्मों में भी जारी रहा.
इसके बाद नाग का करियर भारतीय सिनेमा के अलग-अलग तरह के सिनेमा के बीच आगे बढ़ा. जहां उनके शुरुआती काम में पैरेलल सिनेमा मूवमेंट से जुड़ी फिल्में शामिल थीं, वहीं वे कन्नड़ कमर्शियल सिनेमा के जाने-माने लीडिंग एक्टर भी बने.
'बयालु दारी', 'कन्नेश्वर राम', 'ना निन्ना बिदलारे', 'चंदनदा गोम्बे' और 'बेन्किया बाले' जैसी फ़िल्मों ने उन्हें इंडस्ट्री में एक बड़ी पहचान दिलाई. उन्होंने कन्नड़, हिंदी, तेलुगु, तमिल, मलयालम, मराठी और अंग्रेज़ी सिनेमा में काम किया और उनके नाम 300 से ज्यादा फिल्में दर्ज हैं.