scorecardresearch
 

अखिलेश से मिला झटका, राजा भैया को पड़ रही है शिवपाल की जरूरत

असदुद्दीन ओवैसी, ओम प्रकाश राजभर, चंद्रशेखर के बाद शिवपाल यादव ने अखिलेश यादव के धुर विरोधी माने जाने वाले कुंडा से विधायक रघुराज प्रताप सिंह (राजा भैया) से मुलाकात किया. यह मुलाकात भले ही गुरुवार को अचानक हुई हो, लेकिन इसके पीछे दोनों ही नेताओं के सियासी मुफाद छिपे हुए हैं.  

Advertisement
X
राजा भैया और शिवपाल यादव
राजा भैया और शिवपाल यादव
स्टोरी हाइलाइट्स
  • अखिलेश यादव से राजा भैया का छत्तीस का आंकड़ा
  • शिवपाल यादव और राजा भैया क्या साथ आएंगे
  • कुंडा में इस बार राजा भैया के सामने बड़ी चुनौती

उत्तर प्रदेश में चार महीने बाद होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए सपा को गठबंधन के लिए आखिरी अल्टीमेटम देने वाले वाले प्रगतिशील समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव इन छोटे-छोटे दलों के साथ मिलकर बड़ा सियासी गुल खिलाने की तैयारी में है. ओवैसी-राजभर-चंद्रशेखर के बाद शिवपाल ने अखिलेश यादव के धुर विरोधी माने जाने वाले कुंडा से विधायक रघुराज प्रताप सिंह (राजा भैया) से मुलाकात किया. यह मुलाकात भले ही गुरुवार को अचानक हुई हो, लेकिन इसके पीछे दोनों ही नेताओं के सियासी मकसद छिपे हुए हैं.  

उत्तर प्रदेश में पिछले ढाई दशक से प्रतापगढ़ की सियासत को अपने हिसाब से चला रहे निर्दलीय विधायक व जनसत्ता पार्टी के अध्यक्ष राजा भैया के सामने इस बार अपने सियासी वर्चस्व को बचाए रखने की चुनौती है. 2022 के यूपी चुनाव में राजा भैया को न तो सपा का समर्थन होगा और न ही बीजेपी का वॉकओवर. अखिलेश इस बार कुंडा में राजा भैया के करीबी रहे गुलशन यादव पर दांव लगाने की तैयारी कर रहे हैं. इसी के चलते राजा भैया अपना किला दुरुस्त करने में जुटे हैं. शिवपाल के साथ हुई उनकी मुलाकात को इसी कड़ी में देखा जा रहा है.

राजा भैया की शिवपाल से मुलाकात

रघुराज प्रताप सिंह अपनी पार्टी जनसत्ता दल की जन संकल्प यात्रा के लिए लखनऊ से झांसी जा रहे थे. इसी दौरान उन्नाव के हाईवे पर राजा भैया ने अचानक अपना काफिला रुकवा दिया और उतरकर सीधे शिवपाल सिंह यादव के पास पहुंचे. दोनों नेताओं ने एक दूसरे से हाथ मिलाया, कुशल क्षेम पूछा इसके बाद सभी अपने रास्ते पर रवाना हो गए. मुलाकात के बाद राजा भैया ने कहा कि शिवपाल यादव से परिवारिक संबंध हैं. 

Advertisement

राजा भैया के सपा प्रमुख अखिलेश से भले ही रिश्ते खराब हो, लेकिन शिवपाल के साथ उनके बेहतर रिश्ते रहे हैं. राजा भैया और शिवपाल दोनों के लिए इस बार का विधानसभा चुनाव काफी चुनौती पूर्ण बना हुआ है. राजा के सामने अपना दुर्ग बचाने की चिंता है तो शिवपाल यादव को अपनी सियासी वजूद का बचाए रखना है. ऐसे में माना जा रहा है कि दोनों ही नेता एक दूसरे के लिए सियासी संजीवनी बन सकते हैं. 

राजा भैया बीजेपी से सपा तक की सत्ता में रहे

राजा भैया साल 1993 से लगातार निर्दलीय विधायक चुने जाते आ रहे हैं और सपा और बीजेपी के सहयोग से मंत्री बनते रहे. सूबे में बीजेपी के कल्याण सिंह से लेकर राम प्रकाश गुप्ता और राजनाथ सिंह की सरकार में मंत्री रहे तो मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव के मुख्यमंत्री काल में सत्ता में बन रहे. ऐसे में पहले बीजेपी और फिर बाद सपा कुंडा में उन्हें समर्थन देकर वॉकओवर देती रही, जिससे राजा भैया आसानी से कुंडा से जीतते रहे हैं. लेकिन, इस बार उनकी सियासी राह कठिन हो गई है. 

दरअसल, 2018 में राज्यसभा के चुनाव में अखिलेश यादव के साथ राजा भैया के रिश्ते बिगड़ गए. इसके बाद राजा भइया ने जनसत्ता दल नाम से अपनी राजनीतिक पार्टी बना ली. 2019 लोकसभा के चुनाव में पार्टी से दो सीटों कौशांबी और प्रतापगढ़ सीट पर उम्मीदवार उतारे थे, लेकिन कोई भी जीत नहीं सका था.

Advertisement

सपा से रिश्ते बिगड़े तो समीकरण गड़बड़ाया

यूपी में बीजेपी की सत्ता में आने और अखिलेश यादव के साथ राजा भैया के रिश्ते बिगड़ने के साथ प्रतापगढ़ की सियासत भी बदल रही है. राजा भैया के कुंडा और बाबागंज क्षेत्र में यादव मतदाताओं का दबदबा है. राजा भैया यादव, पासी, मुस्लिम और ठाकुर वोटरों के सहारे सियासी दबदबा कायम रखा था. वहीं, बसपा छोड़कर सपा में आए पूर्व मंत्री इंद्रजीत सरोज और राजा के कभी करीबी रहे गुलशन यादव और छविनाथ यादव उनके धुर विरोधी हो गए हैं. 

बीजेपी ने भी राजा भैया के विरोधी शिव प्रकाश मिश्र सेनानी और पूर्व सांसद रत्ना सिंह को अपने खेमे में मिला रखा है. पहले कुंडा नगर पंचायत के चुनाव में गुलशन यादव ने राजा भैया के समर्थक को सियासी मात दी थी. अखिलेश ने छविनाथ को प्रतापगढ़ का सपा जिलाध्यक्ष बना रखा है तो कुंडा सपा की साइकिल दौड़ाने का जिम्मा इंद्रजीत सरोज पर है. राजा भैया को कुंडा में सपा नेताओं की तिकड़ी और बीजेपी को दो नेताओं के तालमेन ने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है. 

कुंडा में यादव वोट इस बार छिटकने का डर 

सपा की सक्रियता से कुंडा सीट पर यादव वोटों के छिटकने का डर राजा भैया को साफ नजर आ रहा है. इसीलिए वो पिछले दिनों कुर्मी वोटों को साधने के लिए पहले जिला पंचायत की कुर्सी पर प्रमोद तिवारी के समर्थन से कुर्मी समुदाय को जिताई और अब शिवपाल के जरिए यादव समुदाय के कुछ वोटों को अपने साथ जोड़ने की कवायद में है. 2022 चुनाव में शिवपाल का उन्हें समर्थन मिल जाता है तो यादव समाज को सियासी संदेश देने में सफल हो सकते हैं. 

Advertisement

शिवपाल के सामने सियासी साख बचाने की चिंता

वहीं, शिवपाल सिंह यादव यूपी में अपने सियासी वजूद को बचाने में जुटे हैं. अखिलेश यादव को उन्हें कोई खास तवज्जो नहीं दे रहे हैं. ऐसे में सपा को गठबंधन के लिए आखिरी अल्टीमेटम देने के बाद शिवपाल ने बुधवार को एआईएमआईएम अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी और सुभासपा अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर और आजाद समाज पार्टी के अध्यक्ष चंद्रशेखर रावण के साथ अपने आवास पर बैठक की है. ऐसे में इन चारों नेताओं की दूसरी बैठक अगले सप्ताह फिर होने वाली है. माना जा रहा है कि सपा के भाव न मिलने से शिवपाल अपना राजनीतिक विकल्प तैयार कर रहे हैं. ऐसे में शिवपाल यादव कुंडा विधायक राजा भैया को भी अपने साथ मिला सकते हैं. इस तरह के वो सूबे में छोटे-छोटे दलों के जरिए बड़ी ताकत बनने की कवायद मानी जा रही है. 

 

Advertisement
Advertisement