उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों के लिए बिछ रही सियासी बिसात ने राज्य के राजनीतिक पारे को बढ़ा दिया है. विधानसभा में विधायकों के मौजूदा आंकड़ों के हिसाब से बीजेपी सात सीटें आसानी से जीत लेगी और सपा की दो सीटों पर जीत तय मानी जा रही है. असली मुकाबला 10वीं राज्यसभा सीट को लेकर है, जिस पर काबिज होने के लिए सपा और बीजेपी के बीच शह-मात का खेल शुरू हो गया है.
राज्यसभा चुनाव को लेकर सपा की सोमवार को लखनऊ में बैठक हुई. सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने अपने नेताओं के साथ मीटिंग करने के बाद मीडिया से बात करते हुए कहा कि समाजवादी पार्टी राज्यसभा चुनाव में सरप्राइज देगी, जिसके बाद माना जा रहा है कि सपा 2 की जगह 3 उम्मीदवार उतारेगी.
वहीं, बीजेपी की कोर कमेटी की राज्यसभा चुनाव को लेकर बैठक हो चुकी है, जिसमें पार्टी ने 8 उम्मीदवार उतारने का फैसला किया है. बीजेपी सपा को चोट देने की तैयारी में है. ऐसे में सवाल यह उठता है कि क्या बीजेपी ने 2024 के राज्यसभा चुनाव वाला 'संजय सेठ दांव' एक बार फिर दोहराने का प्लान बनाया है?
क्या था 2024 का 'संजय सेठ मॉडल'?
उत्तर प्रदेश में साल 2024 के राज्यसभा चुनाव में सपा के पास अपने दो उम्मीदवारों को आसानी से जिताने भर के वोट थे, जबकि तीसरे उम्मीदवार के लिए कुछ वोटों की कमी थी. बीजेपी ने अपने 7 तय उम्मीदवारों के अलावा अचानक उद्योगपति संजय सेठ को 8वें उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतारकर पूरा गणित बिगाड़ दिया था.
उस समय सपा के मुख्य सचेतक मनोज कुमार पांडेय, राकेश प्रताप सिंह, अभय सिंह, पूजा पाल समेत 7 विधायकों ने बगावत करते हुए क्रॉस वोटिंग की थी, जिससे बीजेपी के 8वें प्रत्याशी संजय सेठ की जीत हुई थी और सपा को तगड़ा झटका लगा था. सपा के तीसरे कैंडिडेट रहे आलोक रंजन चुनाव हार गए थे, जो अखिलेश यादव के लिए बड़ा झटका था. बीजेपी राज्यसभा की 8 सीटें जीतने में सफल रही थी.
सपा और बीजेपी में फिर दो साल पुरानी फाइट
यूपी विधानसभा के कुल 403 सदस्यों में से वर्तमान में 397 विधायक हैं. ऐसे में राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए 38 प्रथम वरीयता वोटों की जरूरत है. बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए के पास कुल 292 विधायक हैं, जबकि सपा गठबंधन के पास 103 विधायक हैं.
एनडीए में बीजेपी के 256, अपना दल (एस) के 13, आरएलडी के 9, सुभासपा के 6 और निषाद पार्टी के 5 विधायक हैं. दो विधायक राजा भैया की पार्टी के हैं. इन्हें मिलाकर यह आंकड़ा 291 विधायकों का होता है. वहीं, सपा और कांग्रेस को मिलाकर कुल 103 विधायक हैं.
राज्यसभा की एक सीट के लिए 38 विधायकों की जरूरत के आधार पर बीजेपी को सात सीटें जीतने के लिए 266 विधायक चाहिए होंगे, जिसके बाद उसके पास 26 सरप्लस (अतिरिक्त) वोट बचेंगे. इसके बाद बीजेपी को आठवीं सीट जीतने के लिए 12 अतिरिक्त वोटों की जरूरत होगी.
वहीं, राज्यसभा की 2 सीटों को जिताने के लिए सपा को 76 वोटों की जरूरत है, जिसके बाद सपा के पास भी करीब 27 सरप्लस वोट बचते हैं. सपा को तीसरी सीट जीतने के लिए 11 अतिरिक्त वोटों की दरकार होगी. यही 11-12 वोटों का अंतर इस चुनाव को बेहद दिलचस्प और कांटे की टक्कर बना रहा है.
26 और 27 के फेर में कैसे फंसा राज्यसभा चुनाव?
एक तरफ जहां अखिलेश यादव ने 3 प्रत्याशी उतारने का ऐलान कर 'सरप्राइज' देने की बात कही है और बीजेपी के सहयोगी दलों (जैसे सुभासपा या निषाद पार्टी) में सेंधमारी की उम्मीद लगा रहे हैं; वहीं दूसरी ओर बीजेपी भी शांत नहीं बैठी है. बीजेपी ने 8 राज्यसभा उम्मीदवार उतारने का प्लान बनाया है. बीजेपी को आठवीं सीट जीतने के लिए 12 अतिरिक्त वोट चाहिए होंगे, तो सपा को 11 वोटों की जरूरत है.
बीजेपी राज्यसभा की 8वीं सीट जीतने के लिए सपा से निष्कासित और बागी विधायकों पर नजर गढ़ाए हुए है. बीजेपी के साथ सपा के बागी विधायक आ सकते हैं, जिन्हें मिलाकर यह आंकड़ा 32 पर पहुंच जाएगा. इसके बाद भी उसे 6 वोट चाहिए होंगे, लेकिन बीजेपी के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने सहयोगी दलों के विधायकों को एकजुट रखने की है.
वहीं, सपा की नजर सुभासपा और आरएलडी के कुछ विधायकों पर है, जिन्हें मिलाकर अखिलेश यादव अपना सियासी गणित बैठाना चाहते हैं. सुभासपा के 6 में से 4 विधायक पहले से ही सपा का झंडा लगाकर घूम रहे हैं. इसके अलावा आरएलडी के 9 में से 3 विधायक सपा बैकग्राउंड वाले हैं. इसीलिए सपा ने अपनी तीसरी सीट जीतने का नंबर जुटाने का दांव तैयार कर रखा है, जिसके लिए ही अखिलेश यादव सरप्राइज का दांव चल रहे हैं.
बीजेपी और सपा में शह-मात का खेल
यूपी में 10वीं सीट का यह संग्राम सिर्फ एक राज्यसभा सांसद चुनने का नहीं है, बल्कि 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव से पहले दोनों दलों के बीच मनोवैज्ञानिक बढ़त बनाने की एक बड़ी सियासी जंग बन चुका है. इसीलिए सपा और बीजेपी दोनों ही दांव चल रहे हैं, लेकिन क्रॉस वोटिंग का खतरा दोनों ही तरफ बना हुआ है.
बीजेपी राज्यसभा के लिए 8वां उम्मीदवार ऐसे नेता को बनाना चाहती है, जो सपा के सियासी गणित को बिगाड़ सके. सपा भी ऐसे चेहरे की तलाश में है, जो पीडीए समीकरण को मजबूत बनाए रखते हुए राज्यसभा चुनाव में जीत का परचम फहरा सके. इस तरह सपा और बीजेपी के बीच शह-मात का खेल शुरू हो गया है.