सीबीएसई की 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाएं 16 फरवरी से 9 अप्रैल 2027 के बीच आयोजित होने की घोषणा के बाद यूपी और पंजाब समेत पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों की तारीखों को लेकर चर्चा और अटकलों का दौर तेज हो गया है. राजनीतिक गलियारों और मीडिया में चुनाव कार्यक्रम को लेकर कई तरह की संभावनाएं जताई जा रही हैं. हालांकि, निर्वाचन आयोग की ओर से जनवरी में चुनाव कराने को लेकर अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है.
परीक्षाओं और अन्य प्रशासनिक प्राथमिकताओं को देखते हुए चुनाव की तारीखों को लेकर कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं. एक संभावना यह है कि मतदान जनवरी के अंत या फरवरी की शुरुआत में कराया जाए, यानी चुनाव कार्यक्रम को करीब एक महीने पहले कर दिया जाए. वहीं, यूपी बोर्ड की परीक्षाएं भी 5 से 27 फरवरी 2027 के बीच प्रस्तावित हैं. ऐसे में एक विकल्प यह भी माना जा रहा है कि निर्वाचन आयोग जनवरी में ही मतदान प्रक्रिया पूरी कर ले.
हालांकि, जनवरी में चुनाव कराना आसान नहीं माना जा रहा है. उत्तर भारत, खासकर पंजाब और उत्तर प्रदेश में जनवरी के दौरान काफी ठंड और घना कोहरा रहता है. इससे रैलियां करने और मतदाताओं को पोलिंग बूथ तक पहुंचाने में व्यावहारिक दिक्कतें आ सकती हैं. ऐसे में पूरी तरह जनवरी में चुनाव कराना मुश्किल माना जा रहा है.
कार्यकाल खत्म होने से पहले विधानसभा चुनाव कराना जरूरी
उत्तर प्रदेश विधानसभा का कार्यकाल 22 मई 2027 तक है. संवैधानिक नियमों के मुताबिक, कार्यकाल खत्म होने से पहले विधानसभा चुनाव कराना जरूरी है. ऐसे में एक संभावना यह भी है कि निर्वाचन आयोग बोर्ड परीक्षाओं के साथ टकराव से बचने के लिए मतदान को मार्च के आखिरी हफ्ते या अप्रैल तक ले जाए. पहले भी बोर्ड परीक्षाओं और विधानसभा चुनावों के कार्यक्रम में तालमेल किया जाता रहा है. 2012 और 2017 में चुनाव मार्च तक चले थे और उसके बाद या उससे पहले बोर्ड परीक्षाओं के कार्यक्रम में बदलाव किया गया था.
निर्वाचन आयोग चुनाव की तारीखें तय करते समय परीक्षा शेड्यूल, सुरक्षा बलों की उपलब्धता और मौसम जैसे पहलुओं को ध्यान में रखता है. ऐसे में जनवरी में चुनाव होने की संभावना कम मानी जा रही है. ज्यादा संभावना इस बात की है कि मतदान फरवरी के शुरुआती 15 दिनों में करा लिया जाए या फिर इसे सीधे मार्च-अप्रैल तक ले जाया जाए.