उत्तर प्रदेश की सियासत में इन दिनों 'धर्म और चंदे' को लेकर सियासी घमासान छिड़ा हुआ है. राम मंदिर में चढ़ावे और चंदा चोरी के मामले को लेकर सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने आक्रामक रुख अपनाते हुए बीजेपी के खिलाफ नैरेटिव सेट करने में जुटे हैं, जिसे काउंटर करने के लिए बीजेपी मंडल और कमंडल का एक साथ प्रयोग कर रही है.
सपा के सियासी तेवर को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस हमले को रक्षात्मक होकर झेलने के बजाय, एक ऐसा 'मथुरा कार्ड' खेला, जिसने सपा को राजनीतिक कशमकश में डाल दिया है.
सीएम योगी ने अखिलेश यादव को कृष्ण जन्मभूमि पर राजनीतिक स्टैंड लेने का चैलेंज दिया तो दूसरी तरफ बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने लखनऊ में राम मनोहर लोहिया के परिजनों से उनके घर पर जाकर मुलाकात किया. एक साथ जिस तरह से सीएम योगी और पंकज चौधरी ने सियासी दांव चला है, उसके पीछे सपा के चंदा चोरी वाले नैरेटिव को तोड़ने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है.
'चंदा चोरी' का नैरेटिव सेट करते अखिलेश
अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट में सीसीटीवी फुटेज और दान में गड़बड़ी के आरोपों को लेकर जैसे ही 8 लोगों की गिरफ्तारी हुई, अखिलेश यादव ने इसे सीधे योगी सरकार की नाकामी और बीजेपी के चरित्र से जोड़ दिया. अखिलेश ने प्रयागराज और आजमगढ़ की अपनी रैलियों में आरोप लगाया कि बीजेपी के लिए राष्ट्र नहीं, बल्कि 'दान' सबसे पहले है. इनके लिए धन ही धर्म है. सीसीटीवी का मतलब अब 'चंदा चोरी' और 'चढ़ावा चोरी' वीडियो बन गया है.
अखिलेश यादव ने चंदा चोरी को लेकर सियासी नैरेटिव सेट करने में जुटे हैं. अखिलेश का मकसद बीजेपी के सबसे मजबूत किले यानी 'हिंदुत्व और शुचिता' की छवि पर चोट करना और खुद को सनातन धर्म के रक्षक के रूप में पेश करते हुए यह कहना कि वे इटावा के केदारेश्वर मंदिर के निर्माण के बाद अयोध्या जाएंगे. अखिलेश यादव जिस तरह राम मंदिर के चंदा चोरी मामले को लेकर बीजेपी पर हमलावर है, उससे बीजेपी के लिए सियासी जवाब देना मुश्किल रहा था.
'अयोध्या' पर एक्शन, 'मथुरा' से सीधा चैलेंज
राम मंदिर पर सपा के तेवर को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और बीजेपी के रणनीतिकारों ने इस नैरेटिव को काउंटर करने की रणनीति अपनाई. पहला प्रशासनिक स्तर पर कड़ा रुख अपनाकर और दूसरा राजनीतिक रूप से 'मथुरा'का मुद्दा उछालकर. योगी सरकार ने चंदे में गड़बड़ी की शिकायत मिलते ही बिना किसी देरी के एसआईटी (SIT) जांच बैठा दी और सरकार ने तुरंत 8 आरोपियों को गिरफ्तार कियाय.
मुख्यमंत्री ने साफ संदेश दिया कि जन-आस्था से खिलवाड़ करने वाले किसी भी शख्स को बख्शा नहीं जाएगा. इस त्वरित और कठोर कार्रवाई ने अखिलेश के उस आरोप की धार कुंद कर दी कि सरकार भ्रष्टाचार को संरक्षण दे रही है. अखिलेश यादव को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाथरस के मंच से उन पर सीधा तीखा हमला बोला. योगी ने अखिलेश के 'धार्मिक नगरी' वाले बयानों पर तंज कसते हुए सपा के इतिहास की दुखती रगों पर हाथ रखा और कहा कि मथुरा में भगवान श्रीकृष्ण की भूमि पर अपना स्टैंड साफ करें.
मंडल के साथ कमंडल की बीजेपी पॉलिटिक्स
अयोध्या की श्रीराम मंदिर में चढ़ावा चोरी का मामला शांत पढ़ता न देख बीजेपी ने मंडल और कमंडल दोनों को साधना शुरू कर दिया है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अखिलेश यादव को दो चैलेंज दिए पहले की अखिलेश यादव अब भी अयोध्या राम मंदिर जाकर भगवान राम के दर्शन करें, और दूसरा मथुरा में भी भगवान कृष्ण के मंदिर मुक्ति को लेकर बोले योगी ने कहा अखिलेश अयोध्या की चिंता छोड़ें हिम्मत है तो कृष्ण जन्मभूमि पर बोलकर दिखाएं.
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि अखिलेश जी, अयोध्या की चिंता छोड़िए और प्रायश्चित करिए. अगर आप खुद को वाकई धार्मिक दिखाना चाहते हैं, तो खुलकर बोलिए कि जैसे राम जन्मभूमि की मुक्ति का आंदोलन चला था, वैसे ही मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मभूमि की मुक्ति का भी अभियान चलना चाहिए. सीएम योगी समाजवादी पार्टी को अयोध्या और मथुरा पर ललकार रहे थे तो पंकज चौधरी लखनऊ में लोहिया के परिजनों से मुलाकात किया.
बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने लखनऊ में समादवादी नेता और विचारक राम मनोहर लोहिया के परिजनों से मिले. इसके बाद चर्चा तेज हो गई कि बीजेपी कहीं राम मनोहर लोहिया के परिवार वालों को चुनावी राजनीति में लाने की कोशिश कर रही है, लेकिन दूसरी तरफ सपा के विचारक के घर बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष का जाना बता रहा है उसकी नजर सपा के वोटबैंक पर है. बीजेपी सिर्फ राम भरोसे नहीं है उसे मालूम है कि धर्म का मुलम्मा समाज के सभी तबकों का वोट नहीं दिला सकता, इसलिए अब भाजपा सपा के आईडियोलॉजी में भी सेंधमारी में जुट गई है.
सपा के लिए सियासी टेंशन बढ़ाएगी बीजेपी
योगी आदित्यनाथ के 'मथुरा चैलेंज' ने समाजवादी पार्टी के सामने एक ऐसा कुआं और खाई वाला धर्मसंकट खड़ा कर दिया है, जिससे निकलना उनके लिए नामुमकिन लग रहा है. इसके कई वजह हैं, जिसमें सबसे पहले सपा का सबसे मजबूत आधार कोर मुस्लिम और यादव वोटर के छिटकने का डर है. अखिलेश यादव 'श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति आंदोलन' का समर्थन करते हैं, तो पार्टी का कोर मुस्लिम वोट बैंक पूरी तरह छिटक सकता है.
भगवान श्रीकृष्ण को यादव समाज अपना आराध्य मानता है. योगी ने सीधे कृष्ण जन्मभूमि का मुद्दा उठाकर सपा के यादव वोट बैंक के भीतर एक मनोवैज्ञानिक दुविधा पैदा कर दी है. अगर अखिलेश इस पर चुप रहते हैं, तो बीजेपी उन्हें 'कृष्ण विरोधी' साबित करने में कसर नहीं छोड़ेगी. सीएम योगी ने याद दिलाया कि सपा सरकार के दौरान ही थानों और जेलों में जन्माष्टमी मनाने पर रोक लगाई गई थी और कांवड़ यात्रा प्रतिबंधित थी. इसके साथ ही 'कारसेवकों पर गोली चलाने' के अतीत को दोहराकर बीजेपी ने सपा को बैकफुट पर धकेल दिया.
अखिलेश यादव ने अयोध्या के बहाने बीजेपी को भ्रष्टाचार के मुद्दे पर घेरने की कोशिश जरूर की थी, लेकिन योगी आदित्यनाथ ने 'मथुरा' का पासा फेंककर पूरी बहस का रुख ही मोड़ दिया. अब गेंद सपा के पाले में डाल दिया है. तो वह मथुरा के मुद्दे पर बीजेपी की पिच पर आकर खेले, या फिर 'हिंदू विरोधी' होने के ठप्पे को झेलने को तैयार रहे. इस तरह शह-मात का खेल शुरू हो गया है, लेकिन सपा के चंदा चोरी वाले मुद्दे की हवा निकालने के लिए बीजेपी ने मथुरा का दांव चल दिया है.