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डूब रही 'INDIA' ब्लॉक की नैया, तमिलनाडु और बंगाल में बदल गई सियासी फिजा

पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की हार और तमिलनाडु में एमके स्टालिन की सत्ता से विदाई ने विपक्षी एकजुटता के चूल्हे हिला दिए हैं. इन दोनों नेताओं की हार इंडिया गठबंधन के लिए बड़ा झटका है. बंगाल और तमिलनाडु के चुनावी नतीजों ने सियासी फिजा को ही बदल दिया है.

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ममता बनर्जी और एमके स्टालिन की हार विपक्ष के लिए बड़ा झटका (Photo-PTI)
ममता बनर्जी और एमके स्टालिन की हार विपक्ष के लिए बड़ा झटका (Photo-PTI)

पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों के नतीजे आ रहे हैं, लेकिन अब तक रुझानों ने सियासी तस्वीर साफ कर दी है. पश्चिम बंगाल में टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी का किला ध्वस्त होता नजर आ रहा है तो दक्षिण के तमिलनाडु में एमके स्टालिन की सत्ता से विदाई तय मानी जा रही है. असम में बीजेपी सत्ता की हैट्रिक लगाने में कामयाब हो रहा है. 

2024 के लोकसभा चुनाव में जिस विपक्षी 'INDIA' गठबंधन ने एकजुटता की कसम खाई थी, 2026 के विधानसभा चुनाव आते-आते उसकी नैया बीच समंदर में डगमगाती नजर आ रही है.खासकर तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल, जो विपक्षी एकता के दो सबसे मजबूत स्तंभ माने जा रहे थे, वहां पर भी सियासी हवा ने करवट बदल गई है. 

कांग्रेस के नेतृत्व वाले 'INDIA ब्लॉक' ने 2024 में बीजेपी को बहुमत के आंकड़े से पीछे रखने में जरूर कामयाब रही थी, लेकिन अब दो साल बाद पूरी तरह से सियासी फिजा बदल गई. बीजेपी ने ममता बनर्जी को बंगाल में मात देकर विपक्ष के सारे अरमानों पर पानी फेर दिया तो विपक्ष को दूसरा झटका तमिलनाडु में लगा, जहां स्टालिन को मात मिली है. 

स्टालिन के किले में 'थलापति' की सेंधमारी
तमिलनाडु में द्रविड़ राजनीति का दशकों पुराना 'बाइनरी' (DMK vs AIADMK) ढांचा आज पूरी तरह चरमरा गया है. चुनाव के रुझानों में जो सबसे चौंकाने वाला नाम उभरा है, वह है अभिनेता से राजनेता बने विजय और उनकी पार्टी 'तमिलगा वेत्री कड़गम' (TVK). मुख्यमंत्री एमके स्टालिन विपक्षी गठबंधन के सबसे बड़े चेहरा थे, लेकिन जिस तरह उनकी पार्टी तीसरे नंबर पर पहुंच गई है, उससे सिर्फ डीएमके को ही नहीं बल्कि विपक्षी गठबंधन को झटका लगा है. 

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डीएमके के साथ कांग्रेस और लेफ्ट का गठबंधन था. इसके बाद भी करारी मात खाती नजर आ रही है. तमिलनाडू के रुझानों में विजय की पार्टी 100 से अधिक सीटों पर बढ़त बनाए हुए है, यह 'इंडिया ब्लॉक' के लिए सबसे बड़ा झटका है क्योंकि DMK के वोट बैंक में सीधी सेंध लगी है. ताजा आंकड़ों के मुताबिक, DMK के नेतृत्व वाला गठबंधन तीसरे नंबर पर खिसकता दिख रहा है, जबकि AIADMK और विजय के बीच कांटे की टक्कर है.

बंगाल में ममता की साख और BJP की ललकार
पश्चिम बंगाल की खाड़ी से जो सियासी हवाएं चल रही हैं, वे 'दीदी' के लिए सुकून वाली नहीं हैं. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भले ही 226 सीटों का दावा करती रहीं, लेकिन रुझान में बीजेपी प्रचंड बहुमत के साथ कमल खिलता नजर आ रही है. बीजेपी को 190 सीटों पर बढ़त बनाए हुए और टीएमसी 100 से कम सीटों पर सिमटती नजर आ रही है. 

कांग्रेस और लेफ्ट के अलग लड़ने से विपक्षी वोटों का जो बिखराव हुआ, उसका सीधा फायदा बीजेपी को मिलता दिखा.  बीजेपी ने भ्रष्टाचार के आरोप और 'संदेशखाली' जैसी घटनाओं ने ममता की घेराबंदी की. इसके अलावा बीजेपी ने घुसपैठियों को बाहर करने का दांव चलकर बंगाल की सियासी जमीन को टीएमसी के पैरों तले से खींच लिया है. 

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ममता बनर्जी अगर बीजेपी को सीधे मुकाबले में चुनाव जीतती, तो  राष्ट्रीय स्तर पर सबसे बड़ी 'बीजेपी विरोधी' चेहरे के रूप में उभर सकती थी, लेकिन बंगाल की मिली हार सिर्फ टीएमसी नहीं बल्कि विपक्ष के लिए भी झटका है. ममता बनर्जी के अरमानों पर पानी फेर दिया है. 

डगमगा रही है 'INDIA ब्लॉक' की नैया?
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि 'INDIA' गठबंधन की इस हालत के पीछे तीन बड़े कारण हैं. बंगाल में ममता का 'एकला चलो' और तमिलनाडु में कांग्रेस की 'जूनियर पार्टनर' वाली स्थिति ने गठबंधन की साख को नुकसान पहुंचाया. इन क्षेत्रीय दिग्गजों की हार से विपक्ष के पास राष्ट्रीय स्तर पर भाजपा को चुनौती देने वाले भरोसेमंद चेहरों की कमी हो जाएगी.

तमिलनाडु में विजय (TVK) जैसे नए चेहरों ने जनता को एक तीसरा विकल्प दिया, जिससे परंपरागत गठबंधन के आधार हिल गए. इस हार ने इंडिया ब्लाक के चूल्हे हिला दिए हैं. बंगाल और तमिलनाडु दोनों राज्यों में सत्ताधारी दलों के खिलाफ पैदा हुई नाराजगी को विपक्ष (भाजपा और नए दल) ने बखूबी भुनाया है.

बंगाल और तमिलनाडु के नतीजों 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले 'INDIA' ब्लॉक के लिए एक बहुत बड़ी चेतावनी होगी. कांग्रेस, जो इस गठबंधन की धुरी बनी हुई थी, क्षेत्रीय क्षत्रपों के हारने या कमजोर होने से खुद को अलग-थलग पा सकती है. विपक्षी दल अब भी एकजुट होकर वापसी कर पाएंगे, या फिर 2026 के ये चुनाव 'INDIA' गठबंधन के अंत की शुरुआत साबित होंगे?

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