केरल में चुनावी सरगमी चरम पर है. कांग्रेस के लिए ये मुकाबला 'करो या मरो' जैसा बन गया है. UDF ने वापसी के लिए खास 'ट्रोइका स्ट्रैटेजी' अपनाई है. इसमें युवाओं, ईसाइयों और मुसलमानों तक सीधा पहुंच बनाने की कोशिश हो रही है. सचिन पायलट, केजे जॉर्ज और इमरान प्रतापगढ़ी जैसे बड़े नेता अलग-अलग मोर्चों की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं.
कांग्रेस आलाकमान द्वारा चुने गए तीनों नेताओं को केरल के विविध धार्मिक समुदायों और अत्यधिक शिक्षित शहरी मतदाताओं से जुड़ने का काम सौंपा गया है. यह चुनाव से पहले मतदाताओं से अधिकतम जुड़ाव सुनिश्चित करने की रणनीति का हिस्सा है. राजस्थान के पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट पिछले करीब एक महीने से केरल में डेरा डाले हुए हैं.
उनका फोकस खासतौर पर युवाओं और शहरी मतदाताओं को लामबंद करने पर है. उन्होंने राज्य के राजनीतिक माहौल में खुद को तेजी से ढाला है. छात्रों और कामकाजी पेशेवरों के लिए कई कार्यक्रम आयोजित किए हैं. उन्होंने 1 अप्रैल को कोट्टायम में महिला सम्मेलन को संबोधित किया, जबकि अगले दिन त्रिशूर में विजन डेवलपमेंट कॉन्क्लेव में हिस्सा लिया.
6 अप्रैल को मलप्पुरम में पेशेवरों की बैठक में उन्होंने कांग्रेस के विजन को रखा. इसके साथ ही सचिन पायलट डिजिटल प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया के जरिए Gen Z मतदाताओं तक पहुंचने की भी कोशिश कर रहे हैं. गौरतलब है कि कांग्रेस ने 92 उम्मीदवार उतारे हैं, जिनमें से 52 की उम्र 50 साल से कम है. इसे युवा नेतृत्व को बढ़ाने की रणनीति माना जा रहा है.

ईसाई मतदाताओं को साधने में जुटे जॉर्ज
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता के. जे. जॉर्ज को ईसाई मतदाताओं को एकजुट करने की जिम्मेदारी दी गई है. वो खुद मलयाली ईसाई हैं. कर्नाटक में ऊर्जा मंत्री भी हैं. सूत्रों के अनुसार, वे पूरे राज्य में दौरे कर रहे हैं. बिशप, पादरियों और ईसाई समुदाय के प्रभावशाली लोगों से मुलाकात कर रहे हैं. उनके अभियान में औपचारिक बैठकों के साथ जमीनी स्तर पर लोगों से संपर्क भी शामिल है.
प्रतापगढ़ी पर अल्पसंख्यकों की जिम्मेदारी
कांग्रेस ने 22 ईसाई उम्मीदवारों को मैदान में उतारा है, जो किसी भी समुदाय के मुकाबले सबसे ज्यादा है. इससे साफ है कि पार्टी इस वर्ग पर खास भरोसा जता रही है. अल्पसंख्यक विभाग के प्रमुख इमरान प्रतापगढ़ी मुस्लिम मतदाताओं तक पहुंच बनाने का काम संभाल रहे हैं. उनका फोकस मालाबार, त्रिशूर और मलप्पुरम जैसे इलाकों पर है, जहां इस समुदाय का खासा प्रभाव है.

कांग्रेस ने उतारे 12 मुस्लिम उम्मीदवार
इमरान प्रतापगढ़ी अब तक 25 से ज्यादा रैलियां और रोडशो कर चुके हैं. हाल ही में उन्होंने इस्लामी विद्वान ए. पी. अबूबकर मुसलियार से मुलाकात की थी. नॉलेज सिटी का दौरा कर बुद्धिजीवियों से संवाद किया था. केरल में मुस्लिम आबादी करीब 26–27 फीसदी है. कांग्रेस ने 12 मुस्लिम उम्मीदवार उतारे हैं, जबकि कई सीटें सहयोगी दल इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग को दी गई हैं.
UDF और LDF के बीच सीधी टक्कर
उन्होंने कहा कि राज्य के कई परिवारों के सदस्य विदेशों में रहते हैं, जिससे उर्दू में संवाद करना उनके लिए जुड़ाव का माध्यम बन रहा है. केरल में कांग्रेस की यह रणनीति सत्ताधारी लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (LDF) के खिलाफ सीधी चुनौती के तौर पर देखी जा रही है. UDF का ये सेगमेंटेड अप्रोच यानी अलग-अलग वर्गों को टारगेट करने की रणनीति बेहद सोच-समझकर बनाई गई है.

जमीन वापस पाने की कोशिश में कांग्रेस
इसमें युवाओं को जोड़ना, समुदाय आधारित संपर्क और एक मजबूत नैरेटिव तैयार करना शामिल है. भारत के सबसे राजनीतिक रूप से जागरूक राज्यों में से एक केरल में कांग्रेस इस रणनीति के जरिए अपनी खोई जमीन वापस पाने की कोशिश कर रही है. अब देखना होगा कि यह 'ट्रोइका फॉर्मूला' उसे सत्ता तक पहुंचा पाता है या नहीं, या फिर उसे अगले चुनाव का इंतजार करना होगा.