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दिनेश शर्मा बने अंडमान-निकोबार के उपराज्यपाल, यूपी चुनाव को लेकर बीजेपी ने दिया ये संदेश

दिनेश शर्मा की नियुक्ति अंडमान-निकोबार में उपराज्यपाल के पद पर ऐसे समय हुई है, जब उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने हैं. इस नियुक्ति को केवल प्रशासनिक फेरबदल के तौर पर नहीं, बल्कि व्यापक राजनीतिक संदर्भ में देखा जा रहा है.

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दिनेश शर्मा बने अंडमान-निकोबार के उपराज्यपाल (Photo: ITG)
दिनेश शर्मा बने अंडमान-निकोबार के उपराज्यपाल (Photo: ITG)

उत्तर प्रदेश के पूर्व उप-मुख्यमंत्री और बीजेपी के वरिष्ठ नेता डॉ. दिनेश शर्मा को अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह का नया उपराज्यपाल नियुक्त किया गया है. राष्ट्रपति भवन की ओर से शनिवार देर रात जारी आदेश के मुताबिक, उनकी नियुक्ति उस तारीख से प्रभावी होगी, जिस दिन वे उपराज्यपाल पद का कार्यभार संभालेंगे.

62 वर्षीय दिनेश शर्मा फिलहाल राज्यसभा सांसद हैं और उनका कार्यकाल नवंबर 2026 में समाप्त होना था. ऐसे में राज्यसभा का कार्यकाल पूरा होने से पहले उन्हें उपराज्यपाल की जिम्मेदारी दिया जाना राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है.

यूपी की राजनीति में लंबा अनुभव
दिनेश शर्मा उत्तर प्रदेश की राजनीति में लंबे समय से सक्रिय रहे हैं. वे 2017 से 2022 के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली पहली सरकार में डिप्टी सीएम रहे. इस दौरान उनके पास माध्यमिक शिक्षा, उच्च शिक्षा, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी और आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी थी.

राजनीति में आने से पहले दिनेश शर्मा लखनऊ विश्वविद्यालय में वाणिज्य विभाग के प्रोफेसर रहे. वे दो बार लखनऊ के महापौर भी रह चुके हैं. 2008 में पहली बार मेयर बनने के बाद 2012 में उन्होंने दोबारा यह पद संभाला. इसके बाद संगठन में भी उनका कद लगातार बढ़ता गया. 2014 में उन्हें बीजेपी का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया. वे भाजपा के गुजरात प्रभारी की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं.

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साल 2023 में उन्हें उत्तर प्रदेश से राज्यसभा के लिए निर्विरोध चुना गया था. उनकी राज्यसभा सीट का कार्यकाल नवंबर 2026 तक था.

यूपी चुनाव से जोड़कर देखा जा रहा फैसला
दिनेश शर्मा की नियुक्ति ऐसे समय हुई है जब उत्तर प्रदेश में अगले साल यानी 2027 की शुरुआत में विधानसभा चुनाव होने हैं. यही वजह है कि इस नियुक्ति को केवल प्रशासनिक फेरबदल के तौर पर नहीं, बल्कि व्यापक राजनीतिक संदर्भ में देखा जा रहा है.

बीजेपी ने हाल के दिनों में यूपी को लेकर अपने संगठन में बड़े बदलाव किए हैं. पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की नई राष्ट्रीय टीम में उत्तर प्रदेश से आठ नेताओं को जगह मिली है. इसे 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए संगठन को मजबूत करने और अलग-अलग सामाजिक समूहों तक पहुंच बढ़ाने की कवायद के तौर पर देखा जा रहा है.

ब्राह्मण चेहरे को अहम जिम्मेदारी
दिनेश शर्मा ब्राह्मण समुदाय से आते हैं. यूपी बीजेपी में वे लंबे समय से इस समुदाय के प्रमुख चेहरों में गिने जाते रहे हैं. ऐसे में उनकी नियुक्ति को यूपी के सामाजिक और राजनीतिक समीकरणों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है.

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बीजेपी उत्तर प्रदेश में अपने पारंपरिक सवर्ण आधार को मजबूत बनाए रखने के साथ-साथ अलग-अलग सामाजिक समूहों के बीच संतुलन साधने की कोशिश कर रही है. खास तौर पर पार्टी के संगठनात्मक फैसलों में ब्राह्मण प्रतिनिधित्व को लेकर हाल के दिनों में चर्चा रही है.

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हालांकि, यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि किसी नियुक्ति को केवल जातीय समीकरण के आधार पर देखना पूरी तस्वीर नहीं बताता. दिनेश शर्मा का लंबा प्रशासनिक, राजनीतिक और संगठनात्मक अनुभव भी इस नियुक्ति का महत्वपूर्ण आधार हो सकता है.

सवर्ण असंतोष की चर्चाओं के बीच अहम फैसला
उत्तर प्रदेश की राजनीति में ब्राह्मण समुदाय को लेकर भाजपा की रणनीति की चर्चा ऐसे समय हो रही है, जब पार्टी के भीतर भी कुछ वर्गों में UGC के नए नियमों को लेकर असंतोष की रिपोर्ट सामने आई है. हाल ही में बीजेपी की नई राष्ट्रीय टीम के गठन के दौरान उत्तर प्रदेश से पूर्व सांसद हरीश द्विवेदी को राष्ट्रीय महामंत्री बनाए जाने को भी इसी संदर्भ में देखा गया.

पूर्व बीजेपी सांसद हरीश द्विवेदी को नितिन नवीन की टीम में राष्ट्रीय महामंत्री बनाया गया है. द्विवेदी बस्ती से दो बार लोकसभा सांसद रह चुके हैं और लंबे समय तक संगठन में सक्रिय रहे हैं. उनका राजनीतिक सफर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से शुरू हुआ था. उन्होंने भाजपा संगठन में भी कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाली हैं.

उनकी नियुक्ति को खास तौर पर इसलिए भी महत्वपूर्ण माना गया, क्योंकि वह ब्राह्मण समुदाय से आते हैं. उत्तर प्रदेश में उनका संगठनात्मक आधार रहा है.

उत्तर प्रदेश के संदर्भ में पार्टी ने एक तरफ ब्राह्मण चेहरे के तौर पर हरीश द्विवेदी को राष्ट्रीय संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी है, तो दूसरी तरफ OBC, दलित और मुस्लिम समुदायों से जुड़े नेताओं को भी संगठन में प्रमुख स्थान दिया गया है. इस तरह भाजपा की रणनीति केवल एक समुदाय पर केंद्रित होने के बजाय सामाजिक समीकरणों का व्यापक संतुलन साधने की दिखाई देती है.

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दिनेश शर्मा की नई भूमिका क्यों महत्वपूर्ण?
अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह का उपराज्यपाल पद संवैधानिक और प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है. दिनेश शर्मा का विश्वविद्यालय, संगठन, राज्य सरकार और संसद चारों स्तरों पर अनुभव रहा है. राज्यसभा में भी उनका संसदीय रिकॉर्ड सक्रिय रहा है. अगस्त 2026 तक उनकी राज्यसभा में उपस्थिति 94 प्रतिशत रही. उन्होंने 226 सवाल पूछे और 34 बहसों में हिस्सा लिया.

अब उनके सामने केंद्र शासित प्रदेश के प्रशासन की जिम्मेदारी होगी. खास बात यह है कि वह ऐसे समय राज्यसभा से उपराज्यपाल पद पर जा रहे हैं, जब उनका उच्च सदन का कार्यकाल समाप्त होने वाला था.

चुनावी गणित से आगे भी बड़ा संदेश
बीजेपी के लिए उत्तर प्रदेश 2027 का चुनाव बेहद महत्वपूर्ण है. 2024 के लोकसभा चुनाव में पार्टी को राज्य में अपेक्षाकृत झटका लगा था. उसके बाद संगठन के भीतर चुनावी प्रदर्शन, कार्यकर्ताओं की नाराजगी और सामाजिक समीकरणों को लेकर मंथन हुआ. बीजेपी की नई केंद्रीय टीम में यूपी से आठ नेताओं को जगह देना इसी चुनावी तैयारी का हिस्सा माना गया है.

ऐसे में दिनेश शर्मा की नई संवैधानिक भूमिका और हरीश द्विवेदी समेत उत्तर प्रदेश के कई नेताओं को राष्ट्रीय संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां मिलना बीजेपी की व्यापक रणनीति की ओर इशारा करता है. पार्टी एक ओर OBC, दलित और अन्य सामाजिक समूहों के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है, वहीं अपने पारंपरिक सवर्ण आधार को भी साथ बनाए रखने पर जोर दे रही है.

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