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...इन 3 फॉर्मूलों से बसपा को त्रिकोणीय मुकाबले में उतारने का मायावती का है प्लान

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही बसपा प्रमुख मायावती ने गुरुवार को लखनऊ में 75 जिलाध्यक्षों और शीर्ष पदाधिकारियों संग महाबैठक बुलाई है. 'एकला चलो' की रणनीति के तहत अकेले मैदान में उतरने का ऐलान कर चुकीं मायावती इस बैठक के जरिए 2007 वाले 'सोशल इंजीनियरिंग' फॉर्मूले की समीक्षा कर प्रत्याशियों के चयन पर अंतिम मुहर लगाएंगी.

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मिशन-2027 में जुटी बसपा प्रमुख मायावती (Photo-ITG)
मिशन-2027 में जुटी बसपा प्रमुख मायावती (Photo-ITG)

उत्तर प्रदेश का विधानसभा चुनाव बसपा प्रमुख मायावती के लिए अपने सियासी वजूद को बचाए रखने का है. बीजेपी और सपा गठबंधन के बीच सिमटते चुनाव को मायावती त्रिकोणीय बनाने की कोशिश में जुट गई हैं. लखनऊ स्थित पार्टी के प्रदेश मुख्यालय (12 मॉल एवेन्यू) में एक अहम और बड़ी बैठक बुलाई गई है, जिसमें मिशन-2027 को फतह करने की रणनीति बनाई जाएगी.

बसपा ने यह बैठक आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की तैयारियों को अंतिम रूप देने और संगठन की धार तेज करने के उद्देश्य से बुलाई है. बैठक में बसपा राज्य इकाई के सभी स्तर के छोटे-बड़े पदाधिकारियों, मंडल समन्वयकों और प्रदेश के सभी 75 जिलों के जिलाध्यक्षों को बुलाया गया है. बैठक में मायावती के भतीजे और बसपा के राष्ट्रीय संयोजक आकाश आनंद भी मौजूद रहेंगे.

उत्तर प्रदेश में बसपा ने अपने उम्मीदवारों के नामों का ऐलान शुरू कर दिया है. आकाश आनंद और बसपा के मंडल कोऑर्डिनेटर अलग-अलग क्षेत्रों में जाकर बसपा प्रत्याशियों के नामों का ऐलान कर रहे हैं. इन सबके बीच मायावती ने उत्तर प्रदेश के नेताओं की बड़ी बैठक बुलाई है, जिसमें 2027 का चुनाव जीतने की रणनीति पर मंथन किया जाएगा.

मायावती की मिशन-2027 का त्रिपल प्लान

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उत्तर प्रदेश में सियासी जमीन तलाशने की जद्दोजहद से गुजर रही बसपा ने आगामी विधानसभा चुनावों के मद्देनजर अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं. कमजोर होते जनाधार को दोबारा मजबूत करने के इरादे से बसपा प्रमुख मायावती ने आज सुबह 11 बजे राजधानी लखनऊ में पार्टी की एक अहम बैठक बुलाई है. प्रदेश के सभी 75 जिलों के अध्यक्षों और विभिन्न स्तरों के प्रमुख पदाधिकारियों की मौजूदगी में होने वाले इस सम्मेलन में चुनावी रणनीति पर गहन मंथन किया जाएगा.

मायावती बैठक में न केवल संगठन को जमीनी स्तर पर सक्रिय करने के गुर सिखाएंगी, बल्कि जिताऊ प्रत्याशियों के चयन के मानक भी तय करेंगी. इस दौरान मायावती पार्टी संगठन को बूथ और कैडर स्तर पर मजबूत करने, जनआधार बढ़ाने और सर्वसमाज (सोशल इंजीनियरिंग) को साधने के लिए पहले दिए गए दिशा-निर्देशों की रिपोर्ट लेंगी.

चुनावी रणनीति और प्रत्याशियों के चयन पर जोर

बसपा के प्रदेश कार्यालय द्वारा जारी बयान के मुताबिक, पूर्व मुख्यमंत्री मायावती गुरुवार को प्रदेश इकाई के सभी वरिष्ठ पदाधिकारियों और जिला प्रभारियों को संबोधित करेंगी. विधानसभा चुनावों को देखते हुए इस बैठक को बेहद निर्णायक माना जा रहा है.

जमीनी स्तर पर संगठन को चुस्त-दुरुस्त करने, चुनावी तैयारियों की समीक्षा करने और प्रभावी उम्मीदवारों के नाम तय करने के निर्देश दिए जाएंगे. इसके साथ ही 'सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय' की नीति के तहत सभी वर्गों में पार्टी का दायरा बढ़ाने के लिए पूर्व में दिए गए कार्यों की समीक्षा कर आगे की रूपरेखा तय होगी.

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लखनऊ में 6 दिसंबर को बड़ी रैली की तैयारी

सूत्रों के मुताबिक, इस बैठक के मंच से 6 दिसंबर को लखनऊ में एक विशाल जनसभा आयोजित करने का ऐलान भी हो सकता है. अगले वर्ष की शुरुआत में संभावित विधानसभा चुनावों को देखते हुए जहां अन्य दल सक्रिय हैं, वहीं दलित राजनीति का प्रमुख केंद्र रही बसपा ने भी अकेले चुनाव लड़ने का फैसला स्पष्ट कर दिया है.

बसपा के समक्ष प्रमुख राजनीतिक चुनौतियां

मौजूदा सियासी परिदृश्य में बसपा के सामने अपने परंपरागत वोट बैंक को एकजुट रखने की सबसे बड़ी परीक्षा है. सपा अपने 'पीडीए' (पिछड़े, दलित, अल्पसंख्यक) गठजोड़ के जरिए बसपा के कोर मतदाताओं में सेंध लगाने की पुरजोर कोशिश कर रही है.

वहीं, चंद्रशेखर आजाद की आजाद समाज पार्टी भी दलित युवाओं के बीच अपनी पैठ बनाकर नया विकल्प पेश कर रही है, जिससे बसपा के आधार मतों में बिखराव की आशंका भी गहरा गई है.

बसपा की वापसी के लिए मायावती प्लान

हालिया चुनावों में पार्टी का प्रदर्शन काफी कमजोर रहा है. बसपा ने वर्ष 2007 में प्रदेश में पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई थी. इसके बाद हुए चुनावों में पार्टी का प्रदर्शन बहुत कमजोर रहा. वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में पार्टी को केवल एक सीट पर जीत मिली थी. इस बार मायावती वर्ष 2007 की तरह अपने सोशल इंजीनियरिंग के फॉर्मूले को दोहराने की कोशिश में हैं और ब्राह्मणों को जोड़ने का प्रयास हो रहा है.

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मायावती के सामने कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाने और संगठनात्मक ढांचे में नई जान फूंकने की दोहरी जिम्मेदारी है. हालांकि प्रचार के लिए आकाश आनंद को आगे किया गया है, लेकिन कैडर को सक्रिय किए बिना चुनाव में उतरना आसान नहीं होगा.

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