क्रिकेट में अच्छी बल्लेबाजी किसे कहते हैं? और अगर पिच ही बल्लेबाज की परीक्षा लेने पर आमादा हो तो अच्छी बल्लेबाजी की परिभाषा क्या होगी? न्यूजीलैंड के खिलाफ ऑकलैंड के ईडन पार्क में बुधवार को विराट कोहली ने इन सवालों का जवाब अपने बल्ले से दिया. उन्होंने बताया कि मुश्किल पिच पर सिर्फ गेंद को सम्मान देना ही बल्लेबाजी नहीं है, कई बार जोखिम उठाकर गेंदबाजों को उसी की भाषा में जवाब देना भी अच्छी बल्लेबाजी होती है.
भारत के सामने 186 रनों का लक्ष्य था. पिच में जबरदस्त उछाल थी और गेंद सीम भी हो रही थी. ऐसे में शुभमन गिल और विराट कोहली ने एक ही परिस्थिति में बल्लेबाजी के दो बिल्कुल अलग तरीके दिखाए. बारिश के कारण खेल रुकने तक दोनों दूसरे विकेट के लिए 53 रन जोड़ चुके थे. गिल 32 गेंदों पर 17 रन बनाकर खेल रहे थे, जबकि कोहली के खाते में 27 गेंदों पर 29 रन थे.
आंकड़े देखें तो गिल का बल्ला ज्यादा सुरक्षित नजर आ रहा था. उन्होंने लगभग हर गेंद को नियंत्रण के साथ खेला. गेंद को अपने करीब आने दिया, शरीर के पास रहकर शॉट लगाए और अतिरिक्त जोखिम से बचे. दूसरी तरफ कोहली 27 गेंदों में 10 बार चूक चुके थे. वह लगातार उछाल लेती गेंदों पर आगे बढ़कर शॉट खेल रहे थे. कई ऐसी गेंदों पर भी ड्राइव करने से नहीं हिचक रहे थे, जिन्हें दूसरे बल्लेबाज सपाट पिचों पर भी छेड़ने से बचते.
The King leaves to a round of applause after scoring match-winning 74. 👏 Watch the HERO VIDA India Tour of New Zealand 1st ODI, LIVE NOW on Sony Sports Network TV channels, Sony Vizha and Sony LIV. #SonySportsNetwork #SonyVizha #SonyLIV #NZvIND https://t.co/zDOBL4nH6J
— Sony Sports Network (@SonySportsNetwk) November 4, 2026
लेकिन स्कोरबोर्ड पर कहानी कुछ और थी. कोहली गिल से 12 रन आगे थे. यही विराट की बल्लेबाजी का अंदाज था. वह जोखिम उठा रहे थे, लेकिन गेंदबाजों पर दबाव बनाने का मौका भी नहीं छोड़ रहे थे.
बारिश से पहले ही दिखा दिया था विराट का जलवा
बारिश आने से ठीक पहले कोहली ने ऐसा शॉट खेला, जिसे लंबे समय तक याद रखा जाएगा. ब्लेयर टिकनर की अच्छी लेंथ की गेंद पर उन्होंने आगे बढ़कर बल्ला चलाया और गेंद को हवा में नहीं, बल्कि जबरदस्त टाइमिंग के साथ शॉर्ट एक्स्ट्रा कवर और मिडऑफ के बीच से निकाल दिया. दोनों फील्डर 30 गज के घेरे के भीतर थे, लेकिन गेंद उनके बीच से बिजली की रफ्तार से निकल गई.
यह कोई आसान शॉट नहीं था. गेंद में उछाल इतना ज्यादा था कि उस पर सही समय पर बल्ला लाना ही चुनौती थी. लेकिन कोहली ने न सिर्फ गेंद की उछाल को समझा, बल्कि उसे अपने अंदाज में बाउंड्री तक पहुंचा दिया.
जब दूसरे बल्लेबाजों के लिए उछाल बनी मुसीबत, कोहली ने उसी पर लगाए शॉट
ईडन पार्क की पिच कितनी खतरनाक तरीके से उछाल ले रही थी, इसका अंदाजा न्यूजीलैंड के बल्लेबाजों के विकेट देखकर लगाया जा सकता था. न्यूजीलैंड के चार बल्लेबाज पुल शॉट खेलने के प्रयास में अपना नियंत्रण खो बैठे थे. गिल जैसे बेहतरीन पुल शॉट खेलने वाले बल्लेबाज भी अतिरिक्त उछाल के कारण गेंद को ठीक से टाइम नहीं कर सके.
श्रेयस अय्यर के साथ तो यह उछाल तीन अलग-अलग अंदाज में सामने आई. पहले पुल शॉट पर टॉप एज लगा और गेंद चार रनों के लिए चली गई. फिर एक गेंद उनके बल्ले से अनजाने में हवा में उठी और विकेट के पीछे साइटस्क्रीन के ऊपर से छह रन के लिए निकल गई. आखिरकार एक और पुल शॉट पर उनका नियंत्रण बिगड़ा और वह मिडविकेट पर कैच दे बैठे.
कोहली भी आखिरकार पुल शॉट खेलने के प्रयास में ही आउट हुए. लेकिन तब तक वह इस शॉट का शानदार प्रदर्शन कर चुके थे. उन्होंने 12 बार पुल शॉट खेलने की कोशिश की और पांच चौके तथा एक छक्का हासिल किया. 51 गेंदों पर 74 रन बनाकर जब वह पवेलियन लौटे तो दर्शकों ने खड़े होकर उनका अभिवादन किया.
विराट के पुल शॉट में दिखा नया अंदाज
आमतौर पर जब क्रिकेट में बेहतरीन पुल शॉट खेलने वाले बल्लेबाजों की चर्चा होती है तो रोहित शर्मा और रिकी पोंटिंग का नाम सबसे पहले आता है. नई पीढ़ी शुभमन गिल और मिचेल मार्श की तारीफ करती है, जबकि स्पिन गेंदबाजी के खिलाफ हेनरिक क्लासेन का पुल शॉट अलग ही पहचान रखता है. पुराने दौर के क्रिकेट प्रेमी गॉर्डन ग्रीनिज, एलेक स्टीवर्ट, अरविंदा डी सिल्वा और इंजमाम उल हक को भी इस सूची में शामिल करना नहीं भूलते.
इस चर्चा में विराट कोहली का नाम अक्सर नहीं आता. इसकी वजह भी है. कोहली का पुल शॉट आमतौर पर जोखिम से बचने वाला होता है. वह शरीर को ऑफ साइड की तरफ ले जाते हैं, गेंद की उछाल के ऊपर आते हैं और कलाई को मोड़कर गेंद को जमीन पर रखते हैं. रोहित शर्मा की तरह नीचे से ऊपर की तरफ बल्ला चलाकर पुल शॉट पर छक्के उड़ाना उनका सामान्य अंदाज नहीं रहा है.
लेकिन ऑकलैंड में कोहली ने अपना यह सुरक्षित अंदाज पीछे छोड़ दिया. उन्होंने पुल शॉट के कई रूप दिखाए.
जैकब डफी की कमर तक आती गेंद को उन्होंने कलाई के जोर से बैकवर्ड स्क्वायर लेग की तरफ भेजा. काइल जैमीसन की गेंद पर उन्होंने शरीर को तेजी से घुमाते हुए पुल शॉट खेला और गेंद को डीप स्क्वायर लेग के बाईं तरफ जमीन से सटाकर बाउंड्री तक पहुंचाया.
इसके बाद टिकनर की कंधे से ऊपर उछलती गेंद पर कोहली ने बैकफुट पर पूरा शरीर घुमाया. इस बार गेंद को जमीन पर रखने की कोई कोशिश नहीं की और उसे स्क्वायर लेग के ऊपर से छक्के के लिए उड़ा दिया. टिकनर के खिलाफ ही दो बार उन्होंने सीधे खड़े होकर फ्लैट बैट से गेंद को मिडऑन के बाहर जोरदार तरीके से मारा.
यह विराट का ऐसा रूप था, जिसमें तकनीक के साथ आक्रामकता और जोखिम लेने का साहस भी साफ नजर आया.
टेस्ट से विदाई के बाद वनडे में भी बदला विराट का अंदाज
कोहली की इस पारी को उनकी बल्लेबाजी में आए बड़े बदलाव के संदर्भ में भी देखना चाहिए. पिछले साल टेस्ट क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद वह अब सिर्फ एक इंटरनेशनल फॉर्मेट खेल रहे हैं. इसके बाद वनडे में उनके खेलने का अंदाज और ज्यादा आक्रामक हुआ है.
टेस्ट से संन्यास के बाद खेली गई 16 वनडे पारियों में कोहली का स्ट्राइक रेट 115.17 रहा है. यह उनके करियर के शानदार वनडे स्ट्राइक रेट से भी 20 से ज्यादा अंक ऊपर है. इस दौरान उनका औसत 77.07 का रहा है.
यानी कोहली अब सिर्फ लंबी पारी खेलने या पारी को संभालने के लिए नहीं खेल रहे. वह तेजी से रन बनाने और गेंदबाजों को लगातार दबाव में रखने का तरीका भी अपना रहे हैं.
इस बदलाव की झलक मैच से तीन दिन पहले ही ईडन पार्क के बाहरी मैदान पर नेट प्रैक्टिस के दौरान मिल गई थी. कोहली ने गुरनूर बराड़, अंशुल कंबोज और औकिब नबी जैसे भारतीय तेज गेंदबाजों के अलावा थ्रोडाउन विशेषज्ञों के सामने लंबा अभ्यास किया. इस दौरान उनका इरादा लगभग हर गेंद पर हमला करने का था. लाइन और लेंथ की परवाह किए बिना वह गेंद को बाउंड्री के पार पहुंचाने की कोशिश कर रहे थे.
ये भी पढ़ें -'दौड़ जा दिल्ली रोड...', जब मेरठ की बल्ला फैक्ट्री में मिले थे विराट कोहली, तब कहां पता था एक दिन बन जाएंगे 'किंग'
कुछ शॉट बेहद शानदार थे तो कुछ पर उनका बल्ला गेंद से ठीक से नहीं मिला. लेकिन कोहली मानो अपनी बल्लेबाजी की सीमाएं खुद परख रहे थे. वह जानना चाहते थे कि वह कितना जोखिम उठा सकते हैं और किस तरह के शॉट खेल सकते हैं.
बुधवार को उन्होंने नेट्स के उसी अंदाज को मैच में उतार दिया. फर्क सिर्फ इतना था कि इस बार सामने गेंदबाजों की पूरी टीम थी और पिच बल्लेबाजी के लिए बेहद मुश्किल.
कोहली का विकेट आखिरकार पुल शॉट पर ही गिरा, लेकिन उनकी 74 रनों की पारी ने एक बात साफ कर दी. विराट अब सिर्फ गेंद को नियंत्रित करने वाले बल्लेबाज नहीं रहना चाहते. वह मुश्किल हालात में भी गेंदबाजों को चुनौती देने के लिए तैयार हैं.
ईडन पार्क की उछाल ने कई बल्लेबाजों के बल्ले का नियंत्रण छीन लिया, लेकिन कोहली ने उसी उछाल को अपने शॉट्स का हथियार बना लिया. यही इस पारी की सबसे खास बात थी. विराट ने सिर्फ रन नहीं बनाए, उन्होंने मुश्किल पिच पर जोखिम उठाकर बल्लेबाजी करने का अपना नया अंदाज भी दिखा दिया.