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'घर पर भूखी बाघिनें इंतजार कर रही हैं', करवाचौथ पर CM भगवंत मान का मजाकिया अंदाज

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने एक रैली में करवाचौथ का जिक्र करते हुए कहा कि उनकी पत्नी ने उन्हें घर आकर चांद देखने के लिए कहा है. उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि घर पर भूखी शेरनियां इंतजार कर रही हैं, जिस पर लोग हंसने लगे. मान ने करवाचौथ को परिवार की सेहत और खुशहाली की कामना करने वाला त्योहार बताया.

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सीएम मान ने करवाचौथ को एक-दूसरे की सेहत और परिवार की खुशहाली की कामना करने वाला त्योहार बताया. (File Photo: PTI) 
सीएम मान ने करवाचौथ को एक-दूसरे की सेहत और परिवार की खुशहाली की कामना करने वाला त्योहार बताया. (File Photo: PTI) 

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान अपने भाषणों में राजनीतिक हमलों के साथ-साथ मजाकिया अंदाज के लिए भी जाने जाते हैं. ऐसा ही अंदाज एक रैली में देखने को मिला, जहां उन्होंने करवाचौथ का जिक्र करते हुए कहा कि उन्हें हर हाल में घर जाना पड़ेगा, क्योंकि उन्हें पत्नी से सख्त निर्देश मिले हैं कि करवाचौथ पर चांद देखना है. इसके बाद उन्होंने मजाकिया लहजे में कहा कि घर पर भूखी शेरनियां इंतजार कर रही हैं. 

सीएम भगवंत मान ने कहा कि वह पिछले दो-तीन दिनों से जालंधर और आसपास के इलाकों में घूम रहे थे. लेकिन आज उन्हें घर पहुंचना ही पड़ेगा. उन्होंने कहा, 'आज तो मुझे घर जाना पड़ेगा, क्योंकि सख्त निर्देश हैं कि घर आ जाओ, करवाचौथ का चांद देखना है.' इसके बाद उन्होंने वहां मौजूद लोगों से मजाक करते हुए कहा कि आज यहां भी बहुत से लोग बैठे हैं, इसलिए घर जाते समय सावधान रहना, घर पर भूखी बाघिनें इंतजार कर रही हैं. मुख्यमंत्री की इस टिप्पणी पर वहां मौजूद लोगों के बीच ठहाके लगने लगे.

इसके बाद सीएम मान ने करवाचौथ को एक-दूसरे की सेहत और परिवार की खुशहाली की कामना करने वाला त्योहार बताया. उन्होंने कहा कि इस त्योहार पर लोग अपने परिवार की अच्छी सेहत और लंबी उम्र की कामना करते हैं. उन्होंने भी परमात्मा से प्रार्थना की कि सभी के घरों में खुशहाली और अच्छी सेहत बनी रहे.

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'आपका प्यार किसी भी करेंसी से नहीं खरीदा जा सकता'

रैली में लोगों की भारी मौजूदगी और उनके स्वागत का जिक्र करते हुए भगवंत मान ने कहा कि बुजुर्गों, युवाओं, महिलाओं और बच्चों ने जिस तरह उनका स्वागत किया है, उसका कोई मोल नहीं है. उन्होंने कहा कि लोग अपने घरों की छतों पर चढ़कर उन्हें प्यार दे रहे हैं. इस प्यार की कीमत दुनिया की किसी भी करेंसी में नहीं लगाई जा सकती.

मुख्यमंत्री ने कहा कि जब वह लोगों के बीच जाते हैं तो माताएं उन्हें आशीर्वाद देती हैं और कहती हैं कि बेटा, खूब जी और तेरी उम्र लंबी हो. बहनें भी उनके लिए दुआएं करती हैं. युवा उनके कंधे पर हाथ रखकर सेल्फी लेते हैं. मान ने कहा कि जनता का यह प्यार उनके लिए सबसे बड़ी पूंजी है.

उन्होंने भावुक अंदाज में कहा कि जब वह शाम को घर जाएंगे तो शीशे के सामने खड़े होकर भी इस प्यार के बारे में सोचेंगे. उन्होंने लोगों का धन्यवाद करते हुए कहा कि उनके स्वागत और स्नेह का बदला किसी भी तरह नहीं चुकाया जा सकता.

'पहले यहां मुख्यमंत्री तो दूर, सरपंच भी नहीं देखा था'

भगवंत मान ने अपने भाषण में गांवों तक राजनीतिक नेतृत्व की पहुंच का मुद्दा भी उठाया. उन्होंने कहा कि इन पीपल और बरगद के पेड़ों के नीचे पहले पंचायतें लगती होंगी. बुजुर्ग यहां बैठते होंगे और गांव के लोग आपस में चर्चा करते होंगे. लेकिन यहां किसी मुख्यमंत्री का आकर लोगों से सीधे बातचीत करना लंबे समय से नहीं हुआ था.

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उन्होंने एक किस्सा सुनाते हुए कहा कि उन्होंने किसी से पूछा था कि क्या उन्होंने पहले कभी इतने करीब से मुख्यमंत्री को देखा है. इस पर उन्हें जवाब मिला कि उन्होंने तो इतने करीब से सरपंच तक नहीं देखा. मान ने कहा कि आज सरपंच भी यहां आकर अच्छी बातें कहकर गए हैं.

अकाली दल और कांग्रेस पर जमकर साधा निशाना

अपने भाषण में भगवंत मान ने शिरोमणि अकाली दल और कांग्रेस पर भी निशाना साधा. उन्होंने इन पार्टियों के नेताओं पर लोगों का भरोसा तोड़ने और लंबे समय तक सत्ता में रहने के बावजूद जनता को अपेक्षित लाभ नहीं पहुंचाने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि एक तरफ जनता उन्हें इतना प्यार दे रही है, वहीं दूसरी ओर अकाली दल और कांग्रेस के नेताओं के साथ हाथ मिलाने के बाद लोगों को यह तक देखना पड़ता है कि उनकी उंगलियां पूरी हैं या नहीं. 

मुख्यमंत्री ने लोगों से कहा कि अब उन्हें पुरानी पार्टियों को लेकर सतर्क रहना चाहिए. उन्होंने कहा कि इन दलों को पहले भी बहुत मौके दिए गए और लोगों ने उन्हें खूब वोट दिए, लेकिन जनता को बदले में क्या मिला? मान ने कहा कि अब लोगों को दोबारा अपना भरोसा देने से पहले सोच-विचार करना चाहिए. उन्होंने उंगली का उदाहरण देते हुए कहा कि अगर ये नेता उंगली पकड़कर नहीं ले जा सके तो उंगली से अंगूठी निकालकर ले जाएंगे. 

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