यूपी की राजधानी लखनऊ में 'पंचायत आजतक' के मंच पर अपना दल (एस) की राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल ने दावा किया कि साल 2027 का चुनाव 2017 और 2022 के चुनावों से बिल्कुल अलग होगा. उन्होंने हुए कहा कि आगामी विधानसभा चुनाव में एनडीए (NDA) ऐतिहासिक जीत दर्ज करेगा और 2024 के लोकसभा चुनाव में हुए नुकसान की पूरी भरपाई कर देगा और विपक्ष इस बार साफ हो जाएगा.
साल 2024 के लोकसभा चुनाव में पूर्वांचल समेत उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में पार्टी को लगे झटके पर बेबाकी से बात करते हुए अनुप्रिया पटेल ने कहा पिछले चुनाव में संविधान को लेकर विपक्ष द्वारा फैलाई गई अफवाहों का गहरा असर पड़ा था. हम केवल इसलिए पीछे रह गए क्योंकि हम समय रहते उस झूठ और अफवाह का मुकाबला नहीं कर पाए. लेकिन अब उत्तर प्रदेश की जनता उस भ्रम से पूरी तरह बाहर आ चुकी है. हमारे पास केंद्र सरकार के 12 वर्षों और राज्य सरकार के 9 वर्षों के विकास कार्यों का मजबूत ट्रैक रिकॉर्ड है, जिसके दम पर हम 2027 में बड़ी जीत हासिल करेंगे.
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वंचितों को प्राथमिकता और मोदी कैबिनेट में प्रतिनिधित्व
अनुप्रिया पटेल ने कहा कि एनडीए सरकार की नीतियां हमेशा से समाज के दबे-कुचले और वंचित वर्गों को प्राथमिकता देने वाली रही हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कैबिनेट में ओबीसी (OBC) और एससी (SC) वर्ग का ऐतिहासिक प्रतिनिधित्व इसका सबसे बड़ा उदाहरण है. उन्होंने नीट (NEET) परीक्षा में ओबीसी वर्ग के लिए आरक्षण लागू कराने के फैसले को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि ऐसे कल्याणकारी निर्णयों का जमीनी स्तर पर व्यापक और सकारात्मक प्रभाव देखने को मिल रहा है.
'कोटा विद इन कोटा और जातीय जनगणना के संवेदनशील मुद्दे पर अपना दल (एस) का रुख स्पष्ट करते हुए उन्होंने कहा जब यह मुद्दा उठा था, तब भी हमारी पार्टी ने स्पष्ट किया था कि सबसे पहले अलग-अलग जातियों के प्रामाणिक आंकड़े सामने आने चाहिए. जब तक हमारे पास स्पष्ट आंकड़े नहीं होंगे, तब तक किसी भी नीति को पारदर्शी रूप से लागू नहीं किया जा सकता.
उन्होंने आरक्षण की जमीनी हकीकत पर चिंता जताते हुए कहा कि यदि ईमानदारी से समीक्षा की जाए, तो पता चलेगा कि 27 फीसदी ओबीसी आरक्षण का पूरा लाभ अभी भी लक्षित लाभार्थियों तक नहीं पहुंचा है और वर्षों का बैकलॉग बढ़ता जा रहा है, जो सबसे पिछड़ा है, उसका हाथ पकड़कर आगे बढ़ाना जरूरी है, लेकिन इसके लिए लिया जाने वाला कोई भी फैसला पूरी तरह से पारदर्शी और तथ्यों पर आधारित होना चाहिए.
'जिसकी जितनी संख्या भारी, उसकी उतनी हिस्सेदारी'
आरक्षण की तय सीमा को तोड़ने के सवाल पर अनुप्रिया पटेल ने कहा, "जिसकी जितनी संख्या भारी, उसकी उतनी हिस्सेदारी, और जिसकी जितनी हिस्सेदारी, उसकी उतनी जिम्मेदारी" उन्होंने कहा कि हिस्सेदारी के साथ हमेशा जिम्मेदारी भी आती है. भारत एक विविधताओं से भरा देश है, जहां अलग-अलग जातियों के लोग रहते हैं. देश के समग्र विकास के लिए यह बेहद जरूरी है कि नीति-निर्माण और प्रशासन में सभी वर्गों का प्रतिनिधित्व बढ़े.
एनडीए में सीटों का बंटवारा और बीजेपी के साथ रिश्ते
बीजेपी के साथ तालमेल और आगामी रणनीति पर बात करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि सीटों का बंटवारा समय आने पर आपसी सहमति से तय कर लिया जाएगा. हमारा एकमात्र और मुख्य लक्ष्य एनडीए की धमाकेदार जीत सुनिश्चित करना है. अपना दल (एस) का एक-एक कार्यकर्ता इसके लिए बूथ स्तर पर तैयारी कर रहा है.
उन्होंन कहा कि हम पिछले 9 साल से मजबूती से साथ खड़े हैं. उत्तर प्रदेश में 70-80 फीसदी आबादी दलित और पिछड़ों की है. अगर उनके अधिकारों को लेकर कोई विषय सामने आता है, तो सहयोगी दल होने के नाते उसे सरकार के सामने उठाना हमारा कर्तव्य है, इसे 'शिकायत' नहीं कहा जाना चाहिए. कई मुद्दों का समाधान हुआ है और बचे हुए मसलों पर बातचीत जारी है. उन्होंने साफ किया कि चुनाव में हार-जीत चलती रहती है, लेकिन 2024 में बीजेपी ने हमारा पूरा साथ दिया.
राज्य मंत्री के पद को लेकर पूछे गए सवाल पर अनुप्रिया पटेल ने कहा, "मैं किसी पद के लालच में राजनीति में नहीं आई हूं. मेरी पार्टी, अपना दल (एस), उत्तर प्रदेश की तीसरी सबसे बड़ी राजनीतिक शक्ति है. हम अपने सिद्धांतों और नीतियों के दम पर आगे बढ़ रहे हैं और भविष्य में भी पार्टी का जनाधार लगातार मजबूत होता रहेगा.
जब अनुप्रिया पटेल से पूछा गया कि क्या वह अपना दल का मुख्यमंत्री या प्रदेश में नेतृत्व देखना चाहती हैं, तो उन्होंने कहा कि दुनिया की ऐसी कौन सी राजनीतिक पार्टी है जो खुद को आगे बढ़ते हुए या अपने नेतृत्व को शीर्ष पर नहीं देखना चाहती? हर पार्टी अपने संगठनात्मक विस्तार और राजनैतिक प्रभुत्व के लिए काम करती है. मैं व्यक्तिगत रूप से मुख्यमंत्री बनने की लालसा से कहीं अधिक यह देखना चाहती हूं कि उत्तर प्रदेश में हमारी पार्टी का जनाधार मजबूत हो और भविष्य में अपना दल (एस) की सरकार बने.
मां कृष्णा पटेल से रिश्तों पर तोड़ी चुप्पी: 'मां हमेशा पूजनीय रहेंगी'
लंबे समय से दोनों परिवार के बीच चल रही राजनीतिक और पारिवारिक तल्खी के सवाल पर अनुप्रिया भावुक और बेहद गंभीर नजर आईं, उन्होंने इस विवाद को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा "मां हमारे लिए हमेशा पूजनीय थीं, हैं और रहेंगी. उनके साथ मेरा कोई विवाद है ही नहीं. राजनीति अपनी जगह है, लेकिन पारिवारिक और भावनात्मक स्तर पर मां का आशीर्वाद दिल से हमेशा मेरे साथ है और रहेगा."
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