भारत भर में आज नए-नए एक्सप्रेसवे, हाई स्पीड ट्रेन के ट्रैक और हाईवे का विस्तार हो रहा है. ऐसे में देश के सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने एक नई तरह की परिवहन व्यवस्था देश में लाने की बात कही है, इसका नाम फ्यूनीक्यूलर रेलवे है. ऐसे में ये जानते हैं कि ये फ्यूनीक्यूलर रेल होता क्या है?
फ्यूनीक्यूलर रेल केबल से जुड़ी रोपवे की तरह एक व्यवस्था होती है. लेकिन, इसमें केबल कार की तरह डिब्बे हवा में लटके नहीं होते हैं, बल्कि इसके लिए ट्रैक बनी होती है. इसका इस्तेमाल खड़ी ढलान पर ऊपर से नीचे और नीचे से ऊपर लाने और ले जाने के लिए किया जाता है.
केबल-से जुड़ी इस परिवहन प्रणाली में दो डिब्बे होते हैं जो एक ही केबल के विपरीत सिरों से स्थायी रूप से जुड़े होते हैं. जैसे ही भारी, नीचे उतरने वाला डिब्बा हल्के डिब्बे को ऊपर की ओर खींचता है, यह ठीक लिफ्ट की तरह काम करते हुए ऊपर और नीचे ट्रैक पर ससरते जाते हैं.
कैसे पहाड़ों पर चलती है ये फ्यूनीक्यूलर रेल
सीधे शब्दों में कहें तो फ्यूनीक्यूलर रेल, खड़ी पहाड़ियों और पर्वतों पर यात्रियों को सुरक्षित रूप से ऊपर और नीचे ले जाने के लिए केबल और काउंटरबैलेंसिंग डिब्बों का इस्तेमाल करता है. इसमें ट्रैक के टॉप पर एक इलेक्ट्रिक मोटर या हाइड्रोलिक सिस्टम लगा होता है, जो केबल में लगी पुली को चलाता है.
इन ट्रेनों को पहाड़ों की खड़ी ढालों पर चलने के लिए ही डिजाइन किया गया है. इसलिए ये अक्सर पहाड़ी क्षेत्रों या खड़ी सड़कों वाले शहरों में चल सकती है. इस ट्रेन की वजह से पहाड़ के ऊपर चढ़ने के लिए घंटों ड्राइव करने या चढ़ाई करने में लगने वाला समय काफी कम हो जाता है.
ऐसी ट्रेने दुनिया के कई जगहों पर चलती है. स्वीट्जरलैंड, अमेरिका के लॉस एंजिल्स, चैटानूगा, पुर्तगाल के लिस्बन जैसे शहरों में खूब चलती है. यहां खड़ी पहाड़ियों पर ऊपर और नीचे आने-जाने के लिए यह फ्यूनीक्यूलर ट्रेन सबसे सुरक्षित और सुविधाजनक परिवहन विकल्प है.