
सोशल मीडिया में हर तरफ राहुल गांधी के साथ सुप्रीम कोर्ट मार्च में नजर आई इस जेन-जी लड़की की चर्चा है. जब देश की राजनीति में बड़े-बड़े धुरंधर पसीना बहाते हैं, तब कोई युवा चेहरा अचानक से लाइमलाइट में आ जाए, तो हर किसी के मन में यह सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर ये लड़की है कौन?
हम बात कर रहे हैं श्यामा प्रसाद मुखर्जी कॉलेज (SPM College, DU) की बीए सेकेंड ईयर की छात्रा और एनएसयूआई कार्यकर्ता जन्नत बिश्नोई की. राजस्थान के श्रीगंगानगर (संगरिया) के एक साधारण परिवार से ताल्लुक रखने वाली जन्नत के पिता खेती-किसानी करते हैं और मां गृहिणी हैं. जन्नत ने सिर्फ सुप्रीम कोर्ट मार्च में ही नहीं बल्कि दिल्ली यूनिवर्सिटी के छात्र संघ चुनाव के इतिहास को भी पलटा है. असल में उन्होंने वो कर दिखाया है जो पिछले एक सदी में किसी लड़की ने नहीं किया. आइए जानते हैं जन्नत के राजनीतिक सफर के बारे में.
104 साल का इतिहास पलट डाला!
जन्नत ने aajtak.in से बातचीत में दावा किया कि दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) को बने 104 साल हो चुके हैं, लेकिन इन 104 सालों के इतिहास में आज तक कोई भी छात्रा 'DUSU की चीफ एग्जीक्यूटिव काउंसलर (CEC)' की कुर्सी तक नहीं पहुंच पाई थी. इस पर लड़कों का एकाधिकार था, जिसे जन्नत ने अपने संघर्ष और तीन-तीन चुनावों की भट्टी में तपकर पूरी तरह ध्वस्त कर दिया.
राहुल-प्रियंका के साथ ट्रक पर चढ़कर भरी हुंकार
हाल ही में जब 'इंडिया' अलायंस ने मुख्य चुनाव आयुक्त और मतदाता सूची के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट तक मार्च निकाला, तो ट्रक पर राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के साथ यह युवा नेत्री जोश में नारे लगाते हुए नजर आई. बस फिर क्या था, तस्वीरें वायरल हुईं और राजनीति के जानकारों की नींद उड़ गई कि कांग्रेस को उसका नया और एनर्जेटिक 'जेन-ज़ी चेहरा' मिल चुका है.
कैसे ली राजनीति में एंट्री
राजनीति में आने के सवाल पर जन्नत बड़े बेबाक अंदाज में कहती हैं कि जब उन्होंने कॉलेज में कदम रखा और खुद छात्रों की समस्याओं को झेला, तो उन्हें लगा कि NSUI के जरिए वे स्टूडेंट्स के हक की आवाज सबसे बेहतर तरीके से उठा सकती हैं. फिर क्या था, एक बार जो कदम आगे बढ़े, तो दिल्ली की सड़कों से लेकर संसद के घेराव तक, जन्नत हर मुद्दे पर हिम्मत और पूरे दमखम के साथ खड़ी नजर आईं.

क्या होता है DUSU में 'चीफ एग्जीक्यूटिव काउंसलर' होने का मतलब
बता दें कि डूसू में 'चीफ ईसी' यानी चीफ एग्जीक्यूटिव काउंसलर (CEC) का पद कोई चुनाव आयोग या ईवीएम वाला चुनाव आयुक्त नहीं होता है. दिल्ली यूनिवर्सिटी स्टूडेंट यूनियन (DUSU) की इस कार्यकारी समिति में यह एक बहुत बड़ा और पावरफुल ओहदा होता है.
इसका काम डूसू की एग्जीक्यूटिव बॉडी के फैसलों को लागू करना, छात्रों के तमाम हक-हकूक और यूनिवर्सिटी के अंदरूनी मुद्दों पर प्रशासनिक अधिकारियों से लोहा लेना और यूनियन की नीतियों को जमीन पर उतारना होता है. यानी कि सीधे शब्दों में कहें तो यह छात्रों की आवाज उठाने वाली मुख्य कार्यकारी कमान होती है.
डूसू की एग्जीक्यूटिव कमेटी (EC) के चुनाव में जब ये लोग उतरते हैं, तो सिर्फ खुद जीत कर नहीं आते, बल्कि अपनी पूरी टीम और पार्टी के लिए चुनावों का पूरा मैनेजमेंट संभालते हैं. कॉलेज दर कॉलेज जाकर वोट जुटाने की रणनीति बनाना, छात्रों के बीच कैंपेनिंग करना और पूरी चुनावी प्रक्रिया के हर दांव-पेंच को चलाना इनका मुख्य काम होता