महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (MPSC) की परीक्षाओं की तैयारी कर रहे लाखों अभ्यर्थियों का गुस्सा इस वक्त सड़कों पर उबल रहा है. हाल ही में पुणे और छत्रपति संभाजीनगर (औरंगाबाद) में अभ्यर्थियों द्वारा किए गए बड़े के बाद अब इस आंदोलन में राजनीतिक और सामाजिक संगठनों का समर्थन भी जुड़ने लगा है.
13 सितंबर को 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने घोषणा की कि वे और उनकी पार्टी MPSC अभ्यर्थियों के समर्थन में सड़कों पर उतरेंगे. छत्रपति संभाजीनगर के वालुज स्थित दिपके के आवास पर जब अभ्यर्थियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने उनसे मुलाकात की, उसके बाद CJP ने 24 सितंबर का अल्टीमेटम देते हुए राज्यव्यापी दौरे की चेतावनी दी है.
लेकिन सवाल यह है कि MPSC का वह कौन सा विवादित मामला है, जिसके कारण छात्र आयोग के अध्यक्ष व सचिव के इस्तीफे पर अड़ गए हैं और अभिजीत दिपके इस आंदोलन में कूद पड़े हैं? आइए समझते हैं इस पूरे मामले की इनसाइड स्टोरी.
क्या है MPSC का वो विवाद, जिस पर फूटा छात्रों का गुस्सा?
MPSC परीक्षाओं में कथित पेपर लीक और मूल्यांकन धांधली को लेकर छात्रों का असंतोष कई महीनों से सुलग रहा था, जो हाल की दो घटनाओं के बाद विस्फोटक बन गया:
1. ड्रग इंस्पेक्टर (Group-B) परीक्षा पेपर लीक घोटाला:
मार्च में आयोजित ड्रग इंस्पेक्टर स्क्रीनिंग परीक्षा का पर्चा परीक्षा से पहले ही लीक हो गया था. मुंबई क्राइम ब्रांच की शुरुआती जांच रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि यह पर्चा अभ्यर्थियों तक परीक्षा से पहले ही पहुंच गया था.
इस मामले में MPSC के अंडर-सेक्रेटरी अभिजीत लेंडवे और दो सहायक अनुभाग अधिकारियों (विश्वेश्वर नकाटे और गोपाल मराठे) सहित 7 लोगों को गिरफ्तार किया गया, जिसमें 7वीं रैंक हासिल करने वाली एक महिला उम्मीदवार भी शामिल है. छात्रों का कहना है कि जब आयोग के अपने ही शीर्ष अधिकारी पेपर बेचने में शामिल हैं, तो पूरी भर्ती प्रक्रिया की साख खत्म हो चुकी है.
2. डिस्क्रिप्टिव आंसर शीट्स के मूल्यांकन में गड़बड़ी:
राज्य सेवा मुख्य परीक्षा 2025 और कृषि सेवा परीक्षा में वर्णनात्मक उत्तर पुस्तिकाओं की चेकिंग में भारी गड़बड़ियों के आरोप लगे हैं, जिससे मेहनत करने वाले मेधावी छात्र बाहर हो गए.
MPSC अभ्यर्थियों की मुख्य 4 मांगें क्या हैं?
MPSC के अध्यक्ष (विवेक भीमनवार) और सचिव का तत्काल इस्तीफा लिया जाए और बेदाग छवि वाले अधिकारियों को बैठाया जाए.
ड्रग इंस्पेक्टर पेपर लीक पर मुंबई क्राइम ब्रांच द्वारा MPSC को सौंपी गई शुरुआती जांच रिपोर्ट को सार्वजनिक किया जाए.
गिरफ्तार अंडर-सेक्रेटरी अभिजीत लेंडवे के कार्यकाल के दौरान आयोजित सभी परीक्षाओं का स्वतंत्र फॉरेंसिक ऑडिट कराया जाए.
25 अक्टूबर 2026 को प्रस्तावित ग्रुप-सी (लिपिक व टंकक) प्रारंभिक परीक्षा को पूरी तरह पारदर्शी और सुरक्षित सिस्टम से कराया जाए.
अभिजीत दिपके और CJP की एंट्री का क्या मतलब है?
छत्रपति संभाजीनगर के वालुज में MPSC उम्मीदवारों से मुलाकात के बाद अभिजीत दिपके ने कहा कि जब तक आयोग के भ्रष्ट अधिकारियों के इस्तीफे नहीं होते, CJP छात्रों के साथ डटी रहेगी. यदि 24 सितंबर 2026 तक आयोग के अध्यक्ष और सचिव का इस्तीफा नहीं होता है, तो CJP राज्य भर में MPSC कोचिंग सेंटरों और जिलों का दौरा करके आंदोलन को और धार देगी.
वहीं कांग्रेस, एनसीपी (शरद पवार गुट) और अब CJP जैसी संस्थाओं के छात्रों के समर्थन में आने से राज्य सरकार (शिंदे-फडणवीस-अजित पवार महायुति) पर दबाव बढ़ गया है. हालांकि, MPSC अध्यक्ष विवेक भीमनवार का कहना है कि ड्रग इंस्पेक्टर का पेपर लीक उनके पद संभालने से पहले का है और आयोग ने भविष्य में सुधारों के लिए एक उच्चस्तरीय समिति बनाई है. लेकिन अभ्यर्थी किसी भी आश्वासन से संतुष्ट नहीं हैं और अपनी मांगों पर डटे हुए हैं.