'स्कूल में टीचर नहीं, हमारी पढ़ाई से खिलवाड़...', लखनऊ की सड़कों पर फूटा Gen-अल्फा का गुस्सा
जंतर-मंतर और झारखंड में हुए प्रदर्शन को लेकर विवाद अभी तक थमा नहीं था कि अब लखनऊ में Gen Alfa का विवाद सामने आ गया है. शिक्षकों की कमी से नाराज सैकड़ों स्कूली छात्रों ने सड़क पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किया. यह पहली बार नहीं है जब छात्र प्रदर्शन करने के लिए सड़कों पर उतरें. तीन दिन पहले भी इस तरह के प्रदर्शन की तस्वीरें सामने आई थी.
लखनऊ की सड़कों पर एक बार फिर जेन अल्फा की गूंज सुनाई दे रही है. यह पूरा मामला महज तीन दिन पहले से शुरू होता है, जब लखनऊ के दुबग्गा स्थित जयप्रकाश नारायण सर्वोदय विद्यालय के छात्रों ने शिक्षकों की भारी कमी और अव्यवस्थाओं को लेकर पहली बार मोर्चा खोला था. शुक्रवार को जब इन स्कूली बच्चों का गुस्सा सड़क पर उफन पड़ा, तब कन्नौज जा रहे समाज कल्याण मंत्री असीम अरुण और विभाग के निदेशक अनुराग यादव को खुद अपना काफिला रोककर रास्ते में उतरना पड़ा. अधिकारियों और मंत्री जी ने मौके पर पहुंचकर बच्चों को दुलारा, समझाया और जल्द से जल्द स्कूल में पर्याप्त शिक्षक तैनात करने का ठोस आश्वासन देकर उस वक्त प्रदर्शन खत्म करवा दिया.
फिर सोमवार को सड़कों पर उतरे छात्र
लेकिन, साहब! तीन दिन बीत जाने के बाद भी जब जमीन पर कोई बदलाव नहीं दिखा और वादे सिर्फ कागजी आश्वासन बनकर रह गए, तो सोमवार को इन बच्चों का सब्र का बांध एक बार फिर टूट गया.लखनऊ में दुबग्गा के जयप्रकाश नारायण स्कूल के सैकड़ों छात्र पर्याप्त शिक्षक नहीं होने से पहले से नाराज छात्र छात्र छात्राएं चुप बैठने के बजाय सीधी कार्रवाई के मूड में दिखे . वे स्कूल से निकलकर बालागंज चौराहे पर आ बैठीं और धरना देकर रास्ते को पूरी तरह जाम कर दिया.
नाराज होकर बालागंज चौराहे पर उतर आए और धरना देकर रास्ता जाम कर दिया. शिक्षकों की कमी का असर केवल स्कूलों तक सीमित नहीं रहा है. इससे पहले भी शिक्षक भर्ती और भर्ती परीक्षाओं को लेकर अभ्यर्थी सड़कों पर प्रदर्शन करते रहे हैं. ऐसे में छात्रों का यह विरोध प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में शिक्षकों की उपलब्धता और रिक्त पदों पर नियुक्ति को लेकर एक बड़ा सवाल खड़ा करता है.
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थम गई वाहनों की रफ्तार
थम गई वाहनों की रफ्तार: छात्राओं के इस अचानक विरोध प्रदर्शन से दुबग्गा और बालागंज रोड पर गाड़ियों के पहिये थम गए. राहगीरों और ऑफिस जाने वालों को खासी मशक्कत करनी पड़ी.
पुलिस-प्रशासन की दौड़-भाग: खबर फैलते ही स्थानीय पुलिस के साथ प्रशासनिक अधिकारी तुरंत मौके पर पहुंचे. अधिकारियों ने छात्राओं को समझा-बुझाकर उनकी मांगों को शासन तक पहुंचाने का भरोसा दिलाया.
सीएम आवास की तरफ कूच: प्रशासनिक बातचीत के बाद छात्राओं ने प्रदर्शन तो समाप्त किया, लेकिन अपनी मांग मनवाने के लिए उन्होंने सीधे मुख्यमंत्री आवास की ओर बढ़ना शुरू कर दिया. इसके बाद पुलिस ने उन्हें बालागंज चौराहे पर रोककर वापस भेजा.
पुलिस के आश्वासन के बाद खत्म हुआ प्रदर्शन
जब पुलिस को इस प्रदर्शन की जानकारी मिली तो, वह मौके पर पहुंचे. उनके साथ ही प्रशासनिक अधिकारी भी मौके पर पहुंचे. अधिकारियों ने छात्राओं को समझा-बुझाकर उनकी मांगों को शासन तक पहुंचाने का भरोसा दिलाया. पुलिस ने दुबग्गा चौराहे से प्रदर्शन समाप्त कराया. इसके बाद छात्राओं ने सीएम आवास की तरफ जाने के लिए कूच किया. इस पर उन्हें बालागंज चौराहे पर रोककर वापस किया गया. करीब 10 बजे अधिकारियों के ठोस आश्वासन के बाद छात्राएं शांत हुईं और धरना खत्म किया, जिसके बाद मार्ग पर यातायात दोबारा बहाल हो सका.
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और भी जगह हो चुके हैं प्रदर्शन
Gen Alpha के प्रदर्शन अब उत्तर प्रदेश से आगे भी कई राज्यों में देखने को मिले हैं. रिपोर्टों के मुताबिक उत्तर प्रदेश के फतेहपुर और हमीरपुर, बिहार, राजस्थान के बाड़मेर और जालौर, मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा और सिरोंज और महाराष्ट्र में स्कूली बच्चों ने अपनी समस्याओं को लेकर विरोध किया है. कहीं बच्चों ने स्कूलों में पंखे, साफ पानी, शौचालय, शिक्षक और बेहतर मिड-डे मील की मांग की, तो कहीं स्कूल तक पक्की सड़क, शिक्षकों की नियुक्ति और बस किराया बढ़ोतरी का विरोध किया गया.
इस प्रदर्शन ने बड़ा रूप ले लिया है. उत्तर प्रदेश से लेकर राजस्थान तक के स्कूलों में जेन अल्फा धरने पर बैठ गए हैं. हर जगह छात्रों की केवल यही मांग है कि स्कूल में वे सभी सुविधाएं मिले जो जरूरी है. लेकिन पहले जान लेते हैं कहां-कहां पहुंच गया है ये विवाद?
हमीरपुर में पक्की सड़कों की हो रही है मांग
उत्तर प्रदेश के हमीरपुर में जेन अल्फा हाथों में तिरंगा और आंखों में आंसू लेकर पक्की सड़क की मांग कर रहे हैं. प्रशासन के सामने बच्चे कह रहे हैं कि हम भी पढ़-लिखकर कुछ बनना चाहते हैं लेकिन गांव की सड़के हमारी पढ़ाई और स्कूल के रास्ते में अड़चन बन रही हैं.
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अलवर में जर्जर स्कूल की छत
वहीं, अलवर में भी अलग नजारा देखने को मिला, जहां स्कूल की छत ही जर्जर हो गई. राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय की छत गिरने के बाद से वहां भी जेन-अल्फा प्रदर्शन पर बैठे हैं.
कन्नौज में खाने की गुणवत्ता पर उठे सवाल
इसके बाद कन्नौज में खाने की गुणवत्ता को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं जिसके बाद से जेन अल्फा विरोध कर रहे हैं. स्कूलों में मिलने वाले खाने का बहिष्कार किया है.