जब शिक्षा से जुड़ा कोई बड़ा विवाद सामने आता है, तो शिक्षा मंत्री की इस्तीफे की मांग सबसे पहले उठती है. नीट को लेकर चल रहे विवाद ने एक बार फिर उन मांगों को उठा दिया है, जिसमें कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी), कांग्रेस और कई छात्र समूह कथित परीक्षा अनियमितताओं को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं. दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए बड़े प्रदर्शनों सहित कई हफ्तों तक चले विरोध प्रदर्शनों ने इस मुद्दे को सुर्खियों में बनाए रखा है और राजनीतिक जवाबदेही पर बहस को फिर से हवा दे दी है. लेकिन इतिहास गवाह है कि शिक्षा मंत्री शायद ही कभी परीक्षाओं में गड़बड़ी या नीतियों की आलोचना के चलते पद छोड़ा हो. कई देशों में नेता या मंत्री तब ही इस्तीफा देते हैं, जब कोई घोटाला इतना बड़ा हो जाता है कि उसे बचाना या सही ठहराना मुश्किल हो जाता है.
लेकिन इस लिस्ट में कुछ ऐसे शिक्षा मंत्रियों के नाम हैं, जिन्होंने इस्तीफा दिया है.
1. जम्मू-कश्मीर, भारत, 2012: पीरजादा मोहम्मद सईद
(फोटो: पीटीआई)
(फोटो: पीटीआई)
शिक्षा संबंधी विवाद को लेकर भारत में सबसे चर्चित इस्तीफा शायद 2012 में जम्मू और कश्मीर में हुआ था. जम्मू-कश्मीर के शिक्षा मंत्री पीरजादा मोहम्मद सईद ने राज्य की क्राइम ब्रांच की ओर से फैसला आने के बाद इस्तीफा दे दिया. जांच में पता चला था कि उनके बेटे ने 2009 की कक्षा 10 की बोर्ड परीक्षाओं के समय अनुचित साधनों या नकल का उपयोग किया था. जांचकर्ताओं ने आरोप लगाया कि अधिकारियों ने छात्र को पास कराने में मदद करने के लिए उत्तर पुस्तिकाओं को फिर से लिखा और मूल्यांकन प्रक्रिया में हेरफेर किया.
ये आरोप कई दिनों तक सुर्खियों में छाए रहे. मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने जांच रिपोर्ट मिलने के बाद सार्वजनिक रूप से कार्रवाई का वादा किया, वहीं कांग्रेस नेतृत्व पर भी दबाव बढ़ गया. घोटाले के बढ़ते जाने और क्राइम ब्रांच की रिपोर्ट में सीधे तौर पर उन्हें दोषी ठहराए जाने के बाद सईद ने अपना इस्तीफा दे दिया.
2. गोवा, भारत, 1981: छात्रों के विरोध के कारण फ्रांसिस्को सरदिन्हा को बाहर निकाला गया
(फोटो: एएनआई)
भारत में ऐसा एक पुराना उदाहरण 1981 का है. उस समय गोवा के शिक्षा मंत्री फ्रांसिस्को सार्डिन्हा ने इस्तीफा दे दिया था. उन पर परीक्षा के अंकों में गड़बड़ी के आरोप लगे थे. छात्रों ने विरोध प्रदर्शन किया और जवाबदेही की मांग की. आंदोलन बढ़ने के बाद आखिरकार उन्हें अपना पद छोड़ना पड़ा. यह भारत में छात्र आंदोलन के कारण किसी शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के प्रमुख उदाहरणों में से एक माना जाता है.
3. जर्मनी, 2013: साहित्यिक चोरी के घोटाले के कारण एनेट शावन का कार्यकाल समाप्त हुआ

(फोटो: एएफपी)
2013 में जर्मनी की शिक्षा मंत्री एनेट शवन ने इस्तीफा दे दिया था. उनकी डॉक्टरेट डिग्री रद्द कर दी गई थी, क्योंकि विश्वविद्यालय ने उनके शोध में साहित्यिक चोरी (प्लेजरिज्म) पाई थी. शवन ने जानबूझकर गलती करने से इनकार किया और फैसले को चुनौती दी, लेकिन उन्होंने माना कि इस विवाद से सरकार पर दबाव बढ़ रहा है. इसलिए उन्होंने खुद ही पद छोड़ दिया ताकि सरकार की छवि पर असर न पड़े.
4. नॉर्वे, 2024: सैंड्रा बोर्च ने कुछ ही दिनों के भीतर पद छोड़ दिया

(फोटो: Facebook.com/@SandraBorchSenterpartiet)
जनवरी 2024 में नॉर्वे की अनुसंधान और उच्च शिक्षा मंत्री सैंड्रा बोर्च ने इस्तीफा दे दिया था. उन पर आरोप लगा कि उनकी मास्टर थीसिस में दूसरे छात्रों के काम की नकल की गई थी. मीडिया में मामला सामने आने के बाद उन्होंने अपनी गलती स्वीकार की और माफी मांगी. उन्होंने कहा कि उनसे बड़ी गलती हुई है. विवाद बढ़ने के कुछ ही दिनों बाद उन्होंने पद छोड़ दिया. वहीं, भारत के पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने 2021 में स्वास्थ्य कारणों से इस्तीफा दिया था. उनका इस्तीफा किसी शिक्षा विवाद से जुड़ा नहीं था.
हर संकट का अंत इस्तीफा नहीं होता
कई देशों में परीक्षा से जुड़ी बड़ी समस्याओं और शिक्षा व्यवस्था के संकट के बावजूद शिक्षा मंत्रियों ने इस्तीफा नहीं दिया. सरकारों पर दबाव तो बना, लेकिन कई मामलों में मंत्री अपने पद पर बने रहे.
1. यूके, 2020: ए-लेवल एल्गोरिदम को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर हंगामा, लेकिन गैविन विलियमसन पद पर बने रहे

(फोटो: रॉयटर्स)
साल 2020 में ब्रिटेन में कोविड-19 के कारण ए-लेवल परीक्षाएं रद्द कर दी गईं. छात्रों के अंक देने के लिए एक सरकारी एल्गोरिदम इस्तेमाल किया गया, जिससे हजारों छात्रों के ग्रेड कम हो गए. खासकर सरकारी स्कूलों के छात्रों को नुकसान होने की शिकायतें सामने आईं.
इस फैसले के खिलाफ पूरे देश में विरोध प्रदर्शन हुए और सरकार की आलोचना हुई. विपक्ष ने शिक्षा सचिव गैविन विलियमसन से इस्तीफे की मांग की, लेकिन उन्होंने पद नहीं छोड़ा. बाद में सरकार ने एल्गोरिदम वाली व्यवस्था को हटाकर शिक्षकों के मूल्यांकन के आधार पर ग्रेड देने का फैसला किया. इसके बावजूद विलियमसन शिक्षा मंत्री बने रहे और 2021 तक अपने पद पर रहे.
2. यूके, 2023: आरएएसी स्कूल बिल्डिंग संकट के कारण गिलियन कीगन को अपनी नौकरी नहीं गंवानी पड़ी

(फोटो: रॉयटर्स)
2023 में ब्रिटेन के कई स्कूलों में आरएएसी नाम की कमजोर निर्माण सामग्री मिली, जिससे इमारत गिरने का खतरा था. सरकार ने कई कक्षाएं बंद कर दीं, जिससे छात्रों की पढ़ाई प्रभावित हुई. इस मामले को लेकर शिक्षा सचिव जिलियन कीगन की आलोचना हुई और उनसे इस्तीफे की मांग भी की गई, लेकिन प्रधानमंत्री ऋषि सुनक ने उनका समर्थन किया. कीगन ने इस्तीफा नहीं दिया और 2024 तक शिक्षा सचिव बनी रहीं.
छात्र आंदोलनों व विवादों के बाद पद छोड़ने वाले ये भी मंत्री थे
एम. सी. छागला (केंद्रीय शिक्षा मंत्री, 1967)
मुख्य कारण: त्रि-भाषा (हिंदी-अंग्रेजी) नीति के खिलाफ देशव्यापी विरोध.
पूरा मामला: दक्षिण भारत (विशेषकर तमिलनाडु) में अंग्रेजी की जगह हिंदी को प्राथमिकता देने पर भीषण छात्र आंदोलन छिड़ा. छागला का मानना था कि अंग्रेजी को अचानक हटाना नुकसानदेह होगा. इस नीतिगत मतभेद और जन-विरोध के बाद सितंबर 1967 में उन्होंने इस्तीफा दे दिया.
चिमनभाई पटेल (गुजरात, 1974)
मुख्य कारण: 'नवनिर्माण आंदोलन' (भारत का सबसे बड़ा ऐतिहासिक छात्र आंदोलन).
पूरा मामला: LD इंजीनियरिंग कॉलेज (अहमदाबाद) के छात्रों द्वारा हॉस्टल बिल वृद्धि और भ्रष्टाचार के खिलाफ शुरू हुआ आंदोलन पूरे राज्य में फैल गया. सरकार पर सीधा दबाव बना और तत्कालीन मुख्यमंत्री/शिक्षा मामलों के सर्वेसर्वा चिमनभाई पटेल को पद छोड़ना पड़ा.
डॉ. रमेश पोखरियाल 'निशंक' (केंद्रीय शिक्षा मंत्री, 2021)
मुख्य कारण: NEET/JEE, बोर्ड परीक्षाओं की अनिश्चितता और नई शिक्षा नीति (NEP) पर डिजिटल विरोध.
तथ्य: हालांकि आधिकारिक कारण स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं और कैबिनेट फेरबदल बताया गया, लेकिन उनके कार्यकाल के अंतिम दिनों में परीक्षा व्यवस्था और NEP को लेकर देशव्यापी छात्र/शिक्षक असंतोष चरम पर था.
किसी मंत्री के इस्तीफे का निर्धारण किन बातों से होता है?
किसी शिक्षा मंत्री का इस्तीफा सिर्फ खराब नतीजों या जनता की नाराजगी से तय नहीं होता. आमतौर पर मंत्री तब इस्तीफा देते हैं, जब उन पर गंभीर व्यक्तिगत आरोप लगते हैं, जैसे भ्रष्टाचार, नकल, साहित्यिक चोरी या कोई बड़ा घोटाला, जिसे सरकार के लिए बचाना मुश्किल हो जाए.
भारत में भी कई परीक्षा विवादों के बाद अक्सर मंत्री के बजाय परीक्षा एजेंसियों या अधिकारियों पर कार्रवाई की जाती है. जैसे NEET-UG विवाद के बाद एनटीए के अधिकारियों पर कार्रवाई हुई, लेकिन शिक्षा मंत्री अपने पद पर बने रहे.
इससे पता चलता है कि मंत्री का इस्तीफा केवल विवाद की गंभीरता पर नहीं, बल्कि राजनीतिक दबाव, जनता की प्रतिक्रिया और सरकार के फैसले पर भी निर्भर करता है.