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Exclusive: 16 सालों में 32 IAS अफसरों के इस्तीफे, जानिए शाह फैसल से दिव्या मित्तल तक का सच

उत्तर प्रदेश में 2013 बैच की आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल के इस्तीफे के बाद इस विषय पर राजनीतिक विवाद छिड़ गया है. सरकार के अनुसार 2010 से अब तक 32 आईएएस अधिकारियों के इस्तीफे मंजूर किए गए हैं, लेकिन इस्तीफा वापस लेने वाले अधिकारियों का कोई रिकॉर्ड नहीं है. आइए जानते हैं ये डेटा क्या कहता है?

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कितने आईएएस अधिकारियों ने दिया इस्तीफा? RTI से खुलासा. (Photo: Representational)
कितने आईएएस अधिकारियों ने दिया इस्तीफा? RTI से खुलासा. (Photo: Representational)

जब 2013 बैच की आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल ने इस साल अपने 13 साल के करियर को 'अविस्मरणीय' यात्रा बताते हुए इस्तीफे का ऐलान किया, तो यह खबर सोशल मीडिया पर वायरल हो गई. हालांकि, उनके इस्तीफे की मंजूरी अभी भी उत्तर प्रदेश सरकार के स्तर पर लंबित है. इस फैसले ने यूपी में एक राजनीतिक विवाद भी खड़ा कर दिया. साथ ही, इसने लोगों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि आखिर ऐसा कितनी बार होता है? वास्तव में कितने आईएएस अधिकारी नौकरी छोड़ते हैं?

'इंडिया टुडे' द्वारा दायर की गई एक आरटीआई (RTI) याचिका से अब इसका एक जवाब मिला है. इसे कम से कम आंशिक जवाब तो कह ही सकते हैं. सरकार का कहना है कि 2010 से अब तक 32 आईएएस अधिकारियों के इस्तीफे स्वीकार किए जा चुके हैं.

सरकार ने उनके नाम, कैडर और इस्तीफे मंजूर होने की तारीखें भी जारी की हैं. लेकिन सरकार ने यह भी स्वीकार किया है कि उसके पास उन अधिकारियों का कोई रिकॉर्ड नहीं है जिन्होंने इस्तीफा तो दिया, लेकिन बाद में अपना इरादा बदलकर वापस लौट आए. सरकार का कहना है कि ऐसे आंकड़ों को एक जगह ट्रैक ही नहीं किया जाता.

पूरी सूची

साल-दर-साल के आंकड़े

बता दें कि इस्तीफे हर साल एक समान नहीं रहे. साल 2010 इसमें सबसे अलग नजर आता है, अकेले उसी एक साल में छह अधिकारियों के इस्तीफे स्वीकार किए गए, जो किसी भी अन्य साल से ज्यादा हैं. इसके बाद, यह आंकड़ा ज्यादातर प्रति वर्ष एक से चार के बीच रहा, जबकि 2018 में (चार अधिकारी) और 2024 में (तीन अधिकारी) फिर से इस्तीफों का एक छोटा दौर देखा गया.

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कैडर-दर-कैडर आंकड़े

किसी भी अन्य कैडर की तुलना में पश्चिम बंगाल कैडर में सबसे ज्यादा इस्तीफे देखे गए हैं. इसके बाद महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ और कर्नाटक का स्थान आता है. मंजूरी मिलने तक नौकरी जारी रहती है. इस सूची के पीछे की एक बारीक सच्चाई यह भी है: प्रत्येक नाम के आगे दर्ज तारीख वह नहीं है जब अधिकारी ने इस्तीफा दिया था, बल्कि वह तारीख है जब सरकार ने उस इस्तीफे को स्वीकार किया था.

सेवा नियमों के तहत, जब तक सक्षम प्राधिकारी इस पर हस्ताक्षर न कर दे, तब तक कुछ भी अंतिम नहीं होता. तब तक कोई भी अधिकारी अपना इस्तीफा वापस लेकर सेवा जारी रख सकता है. इस्तीफा सौंपने और उसकी स्वीकृति के बीच का यह समय ही वही जगह है जहां सरकार का गायब 'इस्तीफा वापसी' वाला डेटा मौजूद रहता है और यह महज एक सैद्धांतिक बात नहीं है.

शाह फैसल इस बात को किसी भी आंकड़े से बेहतर साबित करते हैं. 2010 बैच के यूपीएससी टॉपर शाह फैसल ने एक राजनीतिक दल शुरू करने के लिए जनवरी 2019 में आईएएस से इस्तीफा दे दिया था. 2020 में इंडिया टुडे द्वारा दायर एक आरटीआई से पता चला कि डेढ़ साल बाद भी उनका इस्तीफा लंबित था, और संबंधित विभाग सिर्फ यही जवाब दे रहा था कि 'मामला विचाराधीन है.'

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कागजों पर, वह तब भी एक कार्यरत अधिकारी थे, अपना मन बदलने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र. और आखिरकार यही हुआ: उनके पहली बार नौकरी छोड़ने के तीन साल से अधिक समय बाद, अप्रैल 2022 में सरकार ने इस्तीफा वापस लेने के उनके आवेदन को स्वीकार कर लिया और उन्हें बहाल कर दिया. अगस्त में उन्हें पर्यटन मंत्रालय में उप सचिव के पद पर तैनात किया गया. उनका नाम स्वीकृत इस्तीफों की सूची में कभी नहीं आया, क्योंकि वह कभी उसमें शामिल ही नहीं था और उनकी वापसी ठीक उसी तरह के मामलों को दर्शाती है जिसका सरकार के पास कोई केंद्रीय रिकॉर्ड नहीं है.

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