आज के समय में केवल नौकरी करने से गुजारा नहीं होने वाला है और युवा इस बात को समझ चुके हैं. जहां कई लोग अतिरिक्त कमाई के लिए ऑनलाइन बिजनेस, कंटेंट क्रिएशन और स्टार्टअप का रुख कर रहे हैं, वहीं एक X यूजर ने एक पारंपरिक बिजनेस मॉडल के बारे में बताया है, जिसे उनके कुछ दोस्त पार्ट-टाइम कर रहे हैं. यह बिजनेस रियल एस्टेट फ्रीलांसिंग का है. इसमें लोग बिल्डरों के साथ काम करते हैं, संभावित प्रॉपर्टी खरीदारों को ढूंढते हैं और डील पूरी होने पर कमीशन कमाते हैं.
X यूजर अंकित पांडे ने दावा किया कि उनके कुछ दोस्त इस मॉडल से हर महीने करीब 5 लाख रुपये कमा रहे हैं. उन्होंने इसे ऐसा काम बताया, जिसमें स्टार्टअप, ऑफिस या कर्मचारियों की जरूरत नहीं होती और निवेश भी लगभग शून्य होता है.
कैसे काम करती है रियल एस्टेट फ्रीलांसिंग काम?
पांडे के अनुसार, शुरुआत अपने शहर के बिल्डरों से संपर्क करके उनके चैनल पार्टनर प्रोग्राम से जुड़ने से करनी चाहिए. उन्होंने करीब 10 से 15 बिल्डरों की पहचान करने और उनकी परियोजनाओं के बारे में पूरी जानकारी जुटाने की सलाह दी. इसमें प्रॉपर्टी की कीमत, पेमेंट प्लान और क तारीखें शामिल हैं. कई परियोजनाओं की जानकारी मिलने के बाद अगला कदम संभावित खरीदारों को ढूंढना और उन्हें उनकी जरूरत के हिसाब से सही प्रॉपर्टी से जोड़ना है.

कहां मिलेंगे खरीदार?
इस बिजनेस का सबसे जरूरी काम खरीदारों को खोजना है. पांडे ने संभावित ग्राहकों तक पहुंचने के लिए इंस्टाग्राम, एक्स, फेसबुक और व्हाट्सऐप जैसे प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करने की सलाह दी. इसके अलावा, दोस्तों और सहकर्मियों जैसे अपने निजी नेटवर्क के जरिए भी संभावित ग्राहकों तक पहुंचा जा सकता है.
कैसे तय होता है कमीशन?
अब सवाल उठता है कि हर प्रॉपटी की कीमत तो अलग होती है, तो उसके लिए कमीशन कैसे तय किया जाता है. इसे लेकर भी उन्होंने पोस्ट में जानकारी दी है. पांडे ने कमाई को समझाने के लिए 50 लाख रुपये के फ्लैट का उदाहरण दिया. उनके अनुसार, अगर कोई बिल्डर 50 लाख रुपये की प्रॉपर्टी पर 3% कमीशन देता है, तो कुल कमीशन 1.5 लाख रुपये होगा.
इस हिसाब से:
1 फ्लैट = 1.5 लाख रुपये कमीशन
3 फ्लैट = 4.5 लाख रुपये कमीशन
4 फ्लैट = 6 लाख रुपये कमीशन
हालांकि, पोस्ट में बताया गया 3% कमीशन सिर्फ एक उदाहरण है. असल कमीशन की दर बिल्डर, प्रोजेक्ट और आपसी समझौते के हिसाब से अलग-अलग हो सकती है.
किसी चीज की नहीं है जरूरत
पांडे के मुताबिक, इस मॉडल को कम निवेश वाला बिजनेस इसलिए कहा जा सकता है क्योंकि इसमें फ्रीलांसरों को कोई प्रोडक्ट बनाने या उसका स्टॉक रखने की जरूरत नहीं होती. उनका मुख्य काम संभावित खरीदारों को ढूंढना, प्रोजेक्ट की जानकारी लेना, ग्राहकों से संबंध बनाना और प्रॉपर्टी की डील पूरी कराने में मदद करना होता है. इसलिए यह बिजनेस किसी प्रोडक्ट या इन्वेंट्री के बजाय नेटवर्किंग, बिक्री और ग्राहकों के साथ अच्छे संबंध बनाने पर ज्यादा निर्भर करता है.
ग्राहकों को खोजना बड़ी चुनौती
लेकिन ये काम करने वालों के बीच जो काम सबसे चुनौती भरा होता है, वह है ग्राहकों को ढूंढना. हालांकि कमीशन का हिसाब आसान लगता है, लेकिन रियल एस्टेट से लगातार कमाई करना इतना आसान नहीं होता. देखते ही देखते पांडे की पोस्ट तेजी से वायरल हो गई. कई यूजर्स ने कहा कि ग्राहक ढूंढना और डील पूरी करना मुश्किल हो सकता है. वहीं, एक यूजर ने इसमें जोखिम होने की बात कही, जबकि दूसरे ने कहा कि कमीशन हासिल करना आसान नहीं है, क्योंकि प्रॉपर्टी की डील पूरी करने में काफी मेहनत लगती है.
एक अन्य यूजर ने अपने चाचा के साथ हुए एक अनुभव को शेयर किया है. जो कथित तौर पर करीब 30 साल से इस बिजनेस में हैं. यूजर के मुताबिक, उनके चाचा कभी-कभी एक महीने में 5 से 7 घर बेच देते हैं, लेकिन कई बार 4 से 6 महीने तक एक भी घर नहीं बेच पाते.
5 लाख की नहीं है गारंटी
पांडे के मुताबिक, 5 लाख रुपये की कमाई उनके कुछ दोस्तों के अनुभव पर आधारित है. इसलिए इसे रियल एस्टेट फ्रीलांसिंग से होने वाली गारंटी वाली कमाई नहीं माना जा सकता. असल कमाई कई चीजों पर निर्भर करती है, जैसे कितने ग्राहक मिलते हैं, प्रॉपर्टी की कीमत क्या है, कमीशन कितना है, बिल्डर की शर्तें क्या हैं और कितनी डील सफलतापूर्वक पूरी होती है. इस मॉडल को अपनाने वाले व्यक्ति के लिए सबसे जरूरी चीज पैसा नहीं, बल्कि सही खरीदार ढूंढना और उन्हें डील पूरी करने तक ले जाना है.
चर्चा में बिजनेस
इस बिजनेस की सबसे बड़ी खासियत इसकी सरलता है. इसमें स्टार्टअप शुरू करने, टीम रखने या इन्वेंट्री में पैसा लगाने की जरूरत नहीं होती. फ्रीलांसर का काम बिल्डरों और प्रॉपर्टी खरीदने वालों के बीच संपर्क कराना होता है. हालांकि, लोगों की प्रतिक्रियाओं से पता चलता है कि यह बिजनेस कागज पर जितना आसान दिखता है, असल में उतना आसान नहीं है.
इसके बावजूद पांडे की पोस्ट ने लोगों का ध्यान खींचा है, क्योंकि इसमें ऑनलाइन बिजनेस के दौर से अलग एक पुराने और पारंपरिक क्षेत्र में अतिरिक्त कमाई का मौका बताया गया है. उनकी पोस्ट से यह भी पता चलता है कि कभी-कभी सबसे साधारण दिखने वाले बिजनेस में भी कमाई के दिलचस्प मौके हो सकते हैं.
(नोट- यह खबर सोशल मीडिया पर शेयर किए गए पोस्ट पर आधारित है. aajtak.in इस पर किए गए दावों की पुष्टि नहीं करता)