देश में जब किसी परीक्षा को लेकर विवाद होता है, तो सवाल सबसे पहले प्रणाली पर जाता है. लोग सवाल करते हैं कि परीक्षा प्रणाली कितनी सुरक्षित है? इस समय देश शिक्षा के लिए अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रहा है. मेडिकल, इंजीनियरिंग, विश्वविद्यालय और बोर्ड परीक्षाओं से विवादों ने छात्रों की सहनशक्ति तोड़ दी है. लेकिन ये पहली बार नहीं है जब किसी परीक्षा में इस तरह का विवाद देखा जा रहा है. पिछले पांच सालों में NEET, UGC-NET, JEE और CBSE को लेकर कई बड़े विवाद सामने आए हैं, लेकिन इसका मतलब पेपर लीक से नहीं है.
क्या है NEET का विवाद?
NEET देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा है. हर साल इसमें लाखों छात्र शामिल होते हैं. साल 2021 में कोविड के बीच परीक्षा हुई. हालांकि, इस दौरान परीक्षा की तारीखों को लेकर विवाद सामने आया. कई छात्रों ने इस दौरान पेपर टालने की मांग की और ये मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है. हालांकि, कोर्ट ने परीक्षा करवाने की अनुमति दे दी. इसके बाद साल 2022 में परीक्षा के बाद कई उम्मीदवारों की ओर से आंसर की और कुछ सवालों को लेकर आपत्ति दर्ज कराई. इसके बाद साल 2023 में भी आंसर की, परीक्षा केंद्र और कुछ सवालों को लेकर शिकायतें सामने आई लेकिन कोई बड़ा विवाद नहीं हुआ.
2024 में मचा बवाल
लेकिन साल 2024 में NEET में बड़ा बवाल मच गया. बिहार और झारखंड ने पेपर लीक होने की बात सामने आई. इस मामले में कई लोगों की गिरफ्तारी हुई और बाद में ये मामला CBI को सौंप दिया गया. NTA ने 1,563 छात्रों को समय की कमी के कारण ग्रेस मार्क्स दिए. लेकिन इसके बाद जो हुआ, उसने पूरी शिक्षा प्रणाली पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया. ग्रेस मार्क्स देने के बाद कई छात्रों को 720 में से 720 नंबर मिले और इस तरह 67 छात्रों ने ऑल इंडिया रैंक-1 हासिल की. इसके बाद से ही विवाद शुरू हो गया. इसके बाद ये मामला सुप्रीम कोर्ट में पहुंच गया और कोर्ट ने माना कि कुछ केंद्रों पर गड़बड़ी हुई. लेकिन बावजूद इसके लिए री-एग्जाम नहीं करवाया गया. इसके बाद जब साल 2025 में परीक्षा हुई तो, सुरक्षा व्यवस्था को कड़ा किया गया और उस साल किसी तरह का कोई विवाद देखने को नहीं मिला.
क्या था UGC-NET का हाल?
बता दें कि UGC-NET की परीक्षाओं का आयोजन विश्वविद्यालयों में असिस्टेंट प्रोफेसर और जूनियर रिसर्च फेलोशिप (JRF) के लिए आयोजित की जाती है. साल 2021 में इस परीक्षा का आयोजन महामारी की वजह से लेट से किया गया. हालांकि, इसके पहले एग्जाम कई बार टाला गया था. वहीं, 2020 औ 2021 सत्र को मिलाकर संयुक्त परीक्षा का आयोजन किया गया. फिर 2022 में आंसर की को लेकर विवाद खड़ा हो गया. इस दौरान आंसर की, परीक्षा की तारीखों और एग्जाम केंद्रों को लेकर शिकायतें सामने आई. इसके बाद विशेषज्ञ समिति ने समीक्षा के बाद फाइनल आंसर की जारी कर दी. इसके बाद साल 2023 में छात्रों ने तकनीकी दिक्कतों को लेकर शिकायतें की लेकिन कोई बड़ा विवाद सामने नहीं हुआ.
साल 2024 क परीक्षा हुई रद्द
लेकिन साल 2024 में बड़ा विवाद खड़ा हो गया. 18 और 19 जून 2024 को आयोजित हुई परीक्षा को अगले दिन ही रद्द कर दिया गया. गृह मंत्रालय के इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर से मिले इनपुट के आधार पर परीक्षा की निष्पक्षता पर सवाल उठे. इसके बाद ये मामला CBI के पास पहुंच गया. इसमें कुछ छेड़छाड़ की बात सामने आई. हालांकि, 2025 में आयोजित हुई परीक्षा में कोई विवाद सामने नहीं आया.
CBSE
लेकिन हद तो तब हो गई जब देश के सबसे बड़े बोर्ड CBSE में गड़बड़ी मिली. साल 2021 में दो टर्म में परीक्षाओं का आयोजन किया गया था. इस दौरान कई विवादित सवाल चर्चा में रहे. देखा जाए तो कोविड के बाद दो टर्म में परीक्षा का आयोजन किया गया था. इसी साल कक्षा 12 समाजशास्त्र के प्रश्नपत्र में गुजरात दंगों से जुड़े सवाल पर विवाद हुआ. वहीं कक्षा 10 अंग्रेजी के एक पैसेज को महिलाओं के प्रति आपत्तिजनक बताकर विरोध हुआ.बोर्ड ने इसके लिए पूरे नंबर देने का ऐलान किया. फिर 2022 में कठिन सवालों को लेकर बहस तेज हो गई. साल 2023 में फर्जी पेपर लीक की खबरें फैल गई. साल 2024 में सोशल में एक बार पेपर लीक की खबरें सामने आई लेकिन बोर्ड ने इसे फर्जी बताया.
शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग
अब साल 2026 में 3 मई को आयोजित हुई नीट यूजी की परीक्षा को पेपर लीक के बाद रद्द कर दिया गया है. इसके लिए लाखों छात्र केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा मांग रहे हैं.