वैश्विक टेक इंडस्ट्री में एक बार फिर कंपनियां अपने कर्मचारियों की संख्या और काम करने के तरीके में बदलाव कर रही हैं. इसकी बड़ी वजह कंपनियों का एआई (AI) की ओर बढ़ता फोकस है. द इकोनॉमिक टाइम्स के अनुसार, माइक्रोसॉफ्ट इंडिया में करीब 500 कर्मचारियों को परफॉर्मेंस इम्प्रूवमेंट प्लान (PIP) के तहत रखा गया है. यह खबर ऐसे समय सामने आई है, जब टेक इंडस्ट्री में बड़े स्तर पर वर्कफोर्स में बदलाव हो रहे हैं. इसी दौरान यह भी रिपोर्ट सामने आई है कि ओरेकल भारत में करीब 2,000 से 3,000 पदों को प्रभावित कर सकता है.
हालांकि, माइक्रोसॉफ्ट के कर्मचारियों के लिए PIP पर रखा जाना सीधे तौर पर नौकरी जाने का मतलब नहीं है. PIP का उद्देश्य कर्मचारियों के प्रदर्शन में सुधार का मौका देना होता है. इसलिए PIP में शामिल किए गए कर्मचारियों की नौकरी तुरंत खत्म नहीं होती.
क्या है PIP का मतलब
परफॉर्मेंस इम्प्रूवमेंट प्लान (PIP) के तहत कर्मचारियों को तब रखा जाता है, जब किसी कर्मचारी का प्रदर्शन या उसकी भूमिका से जुड़ी उम्मीदें पूरी नहीं हो रही हों. इसमें कर्मचारी के सुधार के लिए कुछ खास क्षेत्रों को तय किया जाता है और उन्हें अपनी परफॉर्मेंस को सुधारने के लिए एक निश्चित समय दिया जाता है.
माइक्रोसॉफ्ट ने कहा है कि जो कर्मचारी अपने रोल की उम्मीदों पर खरे नहीं उतरते, उनके लिए कोचिंग, PIP, स्वैच्छिक रूप से नौकरी छोड़ना या बर्खास्तगी जैसे विकल्प हो सकते हैं, कंपनी ने यह भी कहा कि उसके दुनियाभर के कर्मचारियों में PIP के तहत आने वाले लोगों की संख्या बहुत कम है. हालांकि, माइक्रोसॉफ्ट ने भारत से जुड़े आंकड़े बताने से इनकार किया है. मार्केट रिसर्च फर्म EIIRTrend के CEO पारेख जैन ने द इकोनॉमिक टाइम्स को बताया कि माइक्रोसॉफ्ट इंडिया के करीब 2% कर्मचारी यानी करीब 400-500 लोग, कंपनी की वैश्विक PIP प्रक्रिया से प्रभावित हो सकते हैं.
हालांकि, माइक्रोसॉफ्ट ने अभी तक भारत में PIP से प्रभावित कर्मचारियों की संख्या की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है. 400-500 कर्मचारियों का आंकड़ा पारेख जैन के उद्योग विश्लेषण पर आधारित अनुमान है, माइक्रोसॉफ्ट की ओर से जारी किया गया आधिकारिक आंकड़ा नहीं.
बिजनेस एक्सपर्ट्स का कहना है कि PIP को सीधे छंटनी मानना सही नहीं है. PIP से जुड़े मामलों या अनैच्छिक रूप से करीब 1-2% कर्मचारियों की छंटनी सामान्य वर्कफोर्स मैनेजमेंट का हिस्सा भी हो सकती है. इसमें कर्मचारियों के प्रदर्शन से जुड़ी चिंताएं या उनके मौजूदा skills और कंपनी की बदलती जरूरतों के बीच मिसमैच जैसी वजहें शामिल हो सकती हैं.
माइक्रोसॉफ्ट पुनर्गठन क्यों कर रहा है?
इस बीत जो सवाल खड़ा होता है कि आखिर माइक्रोसॉफ्ट पुनर्गठन क्यों कर रहा है? तो बता दें कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर और डेटा सेंटर में भारी निवेश कर रही है. साथ ही कंपनी पर अपनी लागत और काम करने के तरीके को अधिक प्रभावी बनाने और इन बड़े निवेशों से बेहतर नतीजे हासिल करने का दबाव भी है.
ऐसे में कंपनी का बजट जैसे-जैसे नई तकनीकों की ओर जा रहा है, वह यह भी देख रही है कि उसके कर्मचारी किन क्षेत्रों में सबसे ज्यादा मूल्य जोड़ सकते हैं. इसी वजह से कंपनी की भविष्य की प्राथमिकताओं के हिसाब से जरूरी स्किल और रोल भी तेजी से बदल रहे हैं.
यह PIP प्रक्रिया माइक्रोसॉफ्ट की इस साल की गई बड़ी छंटनी के बाद सामने आई है. जुलाई में कंपनी ने दुनियाभर में करीब 4,800 नौकरियों में कटौती की योजना की घोषणा की थी. यह उसके कुल कर्मचारियों का लगभग 2.1% था. इससे पहले माइक्रोसॉफ्ट ने अमेरिका में करीब 9,000 कर्मचारियों को स्वैच्छिक रिटायरमेंट लेने का भी विकल्प दिया था. इन घटनाओं से पता चलता है कि माइक्रोसॉफ्ट AI में बड़े स्तर पर निवेश जारी रखते हुए अपनी कार्यक्षमता और दक्षता बढ़ाने की कोशिश कर रही है.