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नया लेबर लॉ नौकरी जाने पर किस तरह करेगा हेल्प? होगा नुकसान या मिलेगा फायदा 

देश में नया लेबर कोड लागू हो चुका है. इसके तहत अब कंपनी नए बदलाव करेंगी. इसे लेकर लोगों के बीच अभी भी दुविधा देखी जा रही है और सबके मन में एक सवाल उठ रहा है कि अगर नौकरी चली जाती है तो, नए लेबर लॉ किस तरह फायदा पहुंचाएगा? या नुकसान का सामना करना होगा. लेकिन अगर आपकी नौकरी चली जाती है तो, दो दिनों के अंदर आपको पूरी सैलरी और अलाउंस कंपनी दे देगी.

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नए लेबर कोड से कर्मचारियों को मिलेगी ये सुविधाएं. (Photo : Pexels)
नए लेबर कोड से कर्मचारियों को मिलेगी ये सुविधाएं. (Photo : Pexels)

देश में नया लेबर कोड लागू हो चुका है. इस बीच एक खास बदलाव हुआ है, जो हर कर्मचारियों के लिए बहुत अहम है. भारत सरकार ने कर्मचारियों और कंपनियों के बीच संतुलन बनाने के लिए नए लेबर कोड्स लागू करने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं. इनमें खासतौर पर वेज कोड, सोशल सिक्योरिटी कोड, ऑक्यूपेशनल सेफ्टी हेल्थ एंड वर्किंग कंडीशन कोड और इंडस्ट्रियल रिलेशंस कोड शामिल हैं. इनका मकसद कर्मचारियों को ज्यादा सुरक्षा देना और नौकरी जाने की स्थिति में सहारा प्रदान करना है. मान लीजिए अगर आपकी नौकरी चली जाती है या आप छोड़ देते हैं, तो कंपनी आपको 2 दिनों के अंदर पूरा सेटलमेंट कर देगी. 

अभी तक ज्यादातर नौकरी छोड़ने या निकाले जाने पर कर्मचारी को अपना बकाया पैसा 45 दिन के बाद मिलता था, जिससे उन्हें कई तरह की परेशानी का सामना करना पड़ता था. इसी तरह हर नियम के अपने फायदे और नुकसान है लेकिन पहले समझते हैं कि ये नियम क्या है?

क्या है वेज कोड?

1 अप्रैल, 2026 से नए नियम के तहत कंपनियों को कर्मचारियों का फुल एंड फाइनल केवल 2 दिनों के अंदर करना होगा. यह नियम Code On Wages, 2019 के तहत लागू किया गया है. 

मिलेगा ये फायदा 

  • अब हर श्रमिक को सरकार द्वारा तय न्यूनतम सैलरी मिलेगा, चाहे वह स्थायी, अस्थायी या पार्ट‑टाइम कर्मचारी हो. 
  • अतिरिक्त काम करने पर मजदूरी निश्चित और समय पर मिलेगी. 
  • पहले 5 साल सेवा पूरी करनी होती थी, अब 1 साल के बाद भी ग्रैच्युटी का हक बनता है. 
  • नौकरी छोड़ने पर भी दो दिन में वेतन और बकाया भुगतान. 
  • गिग वर्कर्स, अस्थायी, फिक्स्ड‑टर्म और महिला कर्मचारियों को भी सुरक्षा. 

हो सकता है ये नुकसान 

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  • छोटे उद्योग और स्टार्टअप्स के लिए सैलरी समय पर भुगतान और बोनस देने की लागत बढ़ सकती है. 
  • रिकॉर्ड रखने और रिपोर्टिंग की जिम्मेदारी बढ़ गई है.
  • नियमों की गलत व्याख्या या पालन न होने पर विवाद बढ़ सकते हैं. 
  • न्यूनतम वेतन, ओवरटाइम भुगतान और बोनस को नियमित करता है. 
  • सभी श्रमिकों के लिए समान नियम तय करता है. 

क्या है सोशल सिक्योरिटी कोड? 

सोशल सिक्योरिटी कोड भी लेबर लॉ का एक प्रमुख कानून है, जो असंगठित, संगठित, गिग और प्लेटफॉर्म श्रमिकों सहित सभी कर्मचारियों को भविष्य निधि (PF), ईएसआई (ESI), ग्रेच्युटी और मातृत्व लाभ जैसी सामाजिक सुरक्षा प्रदान करता है. इसका उद्देश्य है सभी श्रमिकों को भविष्य की सुरक्षा देना. 

मिलेगा ये फायदा 

  • कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) में योगदान बढ़ेगा और पेंशन मिलेगा. 
  • ESI (Employees’ State Insurance) के तहत स्वास्थ्य सेवाएं और बीमार होने पर सहायता. 
  • पहले केवल स्थायी कर्मचारी सुरक्षित थे लेकिन अब अस्थायी और पार्ट‑टाइम श्रमिक भी लाभ में शामिल. 
  • महिला कर्मचारियों को मैटरनिटी लीव और अन्य लाभ सुनिश्चित होंगे. 
  • छोटे उद्योग, स्टार्टअप और असंगठित क्षेत्र के कर्मचारियों को भी फायदा मिलेगा. 

हो सकता है ये नुकसान 

  • PF, ESI और अन्य लाभ देने की लागत बढ़ सकती है. छोटे उद्योगों और स्टार्टअप्स को वित्तीय दबाव. 
  • राज्यों में लागू करने की प्रक्रिया अलग होने के कारण कुछ श्रमिकों को देरी या लाभ में अंतर. 
  • रिकॉर्ड रखना और रिपोर्टिंग करना अब कंपनियों के लिए चुनौतीपूर्ण. 

क्या है ऑक्यूपेशनल सेफ्टी हेल्थ एंड वर्किंग कंडीशन कोड?

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इसका उद्देश्य है सभी कर्मचारियों के कामकाजी स्थानों की सुरक्षा और स्वास्थ्य सुनिश्चित करना, कार्यस्थल में सुविधाएं और सुरक्षित परिस्थितियां बनाए रखना और साथ ही पुराने कानूनों को समेकित करना जैसे: Factories Act, Mines Act, Plantations Labour Act. कार्यस्थल की सुरक्षा, स्वच्छता, पानी, टॉयलेट, रेस्ट रूम जैसी बुनियादी सुविधाएं देना, खतरनाक काम और औद्योगिक दुर्घटनाओं से बचाव करना इसका मुख्य काम है. 

ये है फायदा

  • कर्मचारियों को बेहतर स्वास्थ्य और सुरक्षा मिलेगी. 
  • काम के दौरान होने वाली दुर्घटनाओं और पेशेवर रोगों से बचाव. 
  • स्थायी, अस्थायी, गिग वर्कर्स और महिलाओं सहित सभी पर लागू. 
  • कार्य घंटों, आराम और सुविधाओं में सुधार. कर्मचारी अपने अधिकारों और सुरक्षा के लिए कानूनी रूप से सुरक्षित. 

हो सकते हैं ये नुकसान 

  • सुरक्षा उपाय, उपकरण, सुविधाएं और स्वास्थ्य मानक लागू करने में खर्च बढ़ सकता है. 
  • फैक्ट्रियों और छोटे उद्योगों में नियम लागू करना मुश्किल हो सकता है. 
  • अगर नियमों का पालन नहीं किया गया तो कर्मचारियों की शिकायतों के कारण कानूनी कार्रवाई संभव. 

ग्रेच्युटी के लिए 5 साल का इंतजार खत्म 

अब तक के नियमों के अनुसार कर्मचारी को कंपनी की तरफ से मिलने वाली ग्रेच्युटी पांच साल काम करने के बाद दी जाती थी लेकिन नए लेबर कोड नियमों के अनुसार इसमें भी अब बड़ा बदलाव किया गया है. अब, फिक्स्ड-टर्म कर्मचारियों को 1 साल के अंदर दी जाएगी. अगर आप किसी भी कंपनी में एक साल भी काम करते हैं तो कंपनी को आपको ग्रेच्युटी देनी होगी. ग्रेच्युटी का सारा पैसा कंपनी को नौकरी छोड़ने के एक महीने के भीतर ही देना होगा.

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