देश की राजधानी दिल्ली में जंतर-मंतर पर CJP और युवाओं का प्रदर्शन जारी है. जंतर-मंतर पर CCTV और अन्य कैमरों के जरिए निगरानी की जा रही है. ऐसे में प्रदर्शनकारियों की तस्वीरें और वीडियो रिकॉर्ड करने के खिलाफ दायर जनहित याचिका (PIL) पर शुक्रवार को दिल्ली हाई कोर्ट में सुनवाई हुई. अदालत ने केंद्र सरकार से इस मामले में जवाब मांगा है. मामले की अगली सुनवाई अब सोमवार होगी.
इस प्रदर्शन में CCTV कैमरों के जरिए निगरानी की जा रही है, ऐसे में दिल्ली हाई कोर्ट में इसके खिलाफ एक जनहित याचिका दायर की गई थी जिसपर शुक्रवार को सुनवाई हुई.
याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता नंदिता राव ने इसे गंभीर मामला बताया और कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले छात्रों के अधिकारों को आपराधिक श्रेणी में रखा जा रहा है. उन्होंने जंतर मंतर पर CCTV और 360 डिग्री कैमरों के जरिए छात्रों के पहनावे, बातचीत आदि की रिकॉर्डिंग किए जाने का आरोप लगाया. साथ ही, उन्होंने सवाल उठाया कि सरकार की इस निगरानी का उद्देश्य क्या है और प्रदर्शनकारियों की इन रिकॉर्डिंग का किस तरह इस्तेमाल किया जाएगा?
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नंदिता राव ने यह भी कहा कि कई लोग खुद को पुलिस अधिकारी बता रहे हैं, लेकिन वे वर्दी में नहीं हैं और निजी मोबाइल फोन से रिकॉर्डिंग कर रहे हैं. ऐसे में युवाओं की डेटा सुरक्षा और निजता सवालिया निशान के घेरे में आती है.
वहीं, केंद्र की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल ने दलील दी कि यदि सरकारी रिकॉर्डिंग पर सवाल उठाए जा रहे हैं, तो सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स द्वारा की जाने वाली वीडियोग्राफी पर भी रोक लगनी चाहिए और साथ ही प्रदर्शन में मौजूद युवा भी रिकॉर्डिंग कर रहे हैं उसपर भी प्रश्न उठने चाहिए. इस पर नंदिता राव ने जवाब दिया कि राज्य और नागरिक की भूमिका अलग होती है.
इस सुनवाई के बाद दिल्ली हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार से जवाब मांगा है. अब मामले की अगली सुनवाई सोमवार को होगी.