एक वक्त था जब नौकरी मिलना ही बड़ी बात मानी जाती थी. लोग एक ही कंपनी में कई साल बिताने को नौकरी की सक्सेस के पैमानों में से एक समझते थे. लेकिन जेन जी के लिए नौकरी का मतलब सिर्फ लंबे टाइम तक एक जगह टिके रहना नहीं है. अगर काम में सीखने, बढ़ने या अपनी लाइफ को बेहतर बनाने की गुंजाइश नहीं दिख रही, तो वे दूसरी नौकरी तलाशने से ज्यादा नहीं हिचकती.
इसे ही आज के दौर में जॉब स्विचिंग या जॉब हॉपिंग के बढ़ते कल्चर के तौर पर देखा जा रहा है.
2-3 साल में बदल सकती है नौकरी
नौकरी की 2026 वॉयसेस @ वर्क: द जेन जी वर्क कोड रिपोर्ट के मुताबिक, कॉरपोरेट भारत में हर तीन में से एक से ज्यादा जेन जी प्रोफेशनल एक ही नौकरी में 2-3 साल से ज्यादा टिकना नहीं चाहते. यह सर्वे 23 हजार से ज्यादा जेन जी प्रोफेशनल्स और 80 से ज्यादा इंडस्ट्रीज के बीच किया गया.
लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि जेन जी काम से भाग रही है. असल में वो नौकरी में क्या चाहती है, इसका तरीका बदल गया है.
सैलरी से पहले ग्रोथ और सुकून
रिपोर्ट के मुताबिक, 50% जेन जी के लिए नौकरी चुनते वक्त वर्क लाइफ बैलेंस सबसे जरूरी चीज है. वहीं 57% जेन जी करियर ग्रोथ का मतलब नई स्क्लिस सीखना मानती है, जबकि सिर्फ 21% के लिए सैलरी हाइक और 12% के लिए प्रमोशन इसका मुख्य मतलब है.
यानी अगर एक कंपनी में काम करते हुए सीखना बंद हो गया, आगे बढ़ने का मौका नहीं दिख रहा या काम और निजी जिंदगी के बीच बैलेंस बिगड़ रहा है, तो दूसरी नौकरी जेन जी को बेहतर ऑप्शन लग सकती है.
अब नौकरी नहीं, सही नौकरी चाहिए
जेन जी के लिए नौकरी बदलना हमेशा असफलता का संकेत यानी साइन नहीं है. कई बार ये बेहतर मौके की तलाश है. आज का जेन जी सिर्फ ये नहीं पूछता कि 'मेरी नौकरी कितनी लंबी चलेगी?', बल्कि ये भी देखता है कि 'ये नौकरी मुझे आगे कहां ले जाएगी?'
यही वजह है कि जेन जी के बीच जॉब स्विचिंग का कल्चर स्ट्रॉन्ग हो रहा है. उनके लिए नौकरी से लॉयलटी से ज्यादा जरूरी है-सीखना, बढ़ना, कमाना और अपनी लाइफ के लिए टाइम बचाना.