जब 18 साल की उम्र में युवा आगे की पढ़ाई का सपना देखते हैं, तो वहीं अविनाश मडा ऐसी दुविधा में फंस गए जिसने उनकी पूरी जिंदगी ही बदल दी. आंध्र प्रदेश में पले-बढ़े अविनाश ने अपने परिवार को संघर्ष करते देखा, जब उनके किसान पिता को व्यापार में भारी नुकसान हुआ और उन पर लगभग 40 लाख रुपये का कर्ज चढ़ गया, उनकी गृहिणी मां ने परिवार को आर्थिक संकट से निकलने का रास्ता ढूंढने में मदद की.
उस समय अविनाश बीटेक के फर्स्ट ईयर में थें. लेकिन उसे जल्द ही एहसास हो गया कि अगर वह इंजीनियरिंग पूरी कर भी ले और 30,000-40,000 रुपये प्रति माह सैलरी वाली कोई सामान्य नौकरी भी पा ले, तो भी परिवार का कर्ज चुकाने में सालों लग सकते हैं. लेकिन उन्होंने अलग रास्ता चुन लिया.
बदल गई जिंदगी
लेकिन अविनाश के एक फैसले ने उनकी पूरी जिंदगी बदल दी. उन्होंने कॉलेज छोड़ने का फैसला किया और बिजनेस के क्षेत्र में आगे बढ़ने का फैसला किया. बिना किसी बिजनेस अनुभव और बड़े निवेश के उन्होंने डिजिटल मार्केटिंग और SEO सीखना शुरू किया. इन स्किल की मदद से उन्होंने अपनी डिजिटल मार्केटिंग एजेंसी शुरू की. उन्हें भरोसा था कि बिजनेस के जरिए वह परिवार की आर्थिक परेशानियों को दूर कर सकते हैं. यह उनके लिए एक बड़ा जोखिम था, लेकिन उन्होंने इसे सफलता पाने का रास्ता चुना.

कॉलेज छोड़ने से लेकर इंटरनेशनल ग्राहकों तक
यह जोखिम जल्द ही अपना असर दिखाने लगा. अविनाश का कहना है कि 19 साल की उम्र तक उनकी एजेंसी ने अमेरिका और यूनाइटेड किंगडम में ग्राहक हासिल कर लिए थे. उनका दावा है कि एक साल के भीतर ही उन्होंने इस कारोबार से लगभग 30 लाख रुपये कमा लिए, जिससे उनके परिवार को आर्थिक रूप से काफी राहत मिली. अपनी इस सफलता के बारे में बात करते हुए अविनाश ने कहा कि इसका श्रेय मां को जाता है. उनकी मां ने उन्हें अलग रास्ता चुनने का हौसला दिया और कहा कि बिजनेस करके देखो, अगर सफल नहीं हुआ तो पढ़ाई पर वापस लौट सकते हो.
एआई और बिजनेस की दुनिया में मिल गई सफलता
आज अविनाश IG Accelerators और Freedom With AI के जरिए लोगों और कंपनियों को AI की मदद से अपना काम और बिजनेस बढ़ाने में मदद करते हैं. उनका दावा है कि उन्होंने 78 देशों के 48 लाख से ज्यादा लोगों को ट्रेनिंग दी है और 'How to Win With AI' नाम की एक किताब भी लिखी है. अविनाश के अनुसार, उनके बिजनेस से अब सालाना 80 लाख रुपये से ज्यादा की कमाई होती है. उनका कहना है कि उन्होंने बिना बड़े शुरुआती निवेश के AI आधारित शिक्षा और ट्रेनिंग के जरिए यह मुकाम हासिल किया है.
सिर्फ एक ड्रॉपआउट की कहानी से कहीं अधिक
अविनाश के लिए यह जर्नी केवल कॉलेज छोड़ने के बारे में नहीं थी बल्कि एक गंभीर समस्या की पहचान करने, व्यावहारिक स्किल हासिल करने और उसे हल करने के लिए सोच-समझकर जोखिम उठाने के बारे में थी.