धर्मेंद्र प्रधान अब भारत के शिक्षा मंत्री नहीं रहे हैं. उन्होंने आज दोपहर पेपर लीक मामले की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए प्रधानमंत्री को अपना इस्तीफा सौंप दिया है. प्रधान के इस्तीफे को कहानी का अंत नहीं माना जा सकता है. समस्या यहीं पर खत्म नहीं होती है बल्कि इसके बाद ही असली सवाल खड़ा होता है कि देश की परीक्षा व्यवस्था में आगे क्या सुधार किए जाएंगे? सरकार को केवल लोगों को बदलने की जगह परीक्षा व्यवस्था में बड़े सुधार करने चाहिए, क्योंकि यह समस्या भरोसे, पारदर्शिता और बार-बार पेपर लीक होने से जुड़ी है.
होने चाहिए ये पांच बदलाव
प्रधान के इस्तीफे के बाद और नौकरशाही में फेरबदल के बाद, असली परीक्षा यह है कि क्या इस समय से वास्तविक सुधार होगा या केवल चेहरों का बदलाव होगा. यहां पांच बड़े बदलाव दिए गए हैं जिन पर छात्र, अभिभावक और अदालतें सभी की निगाहें टिकी हैं.
NTA में सुधार की मांग है जारी
नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) में बदलाव की मांग तेज हो गई है. सुप्रीम कोर्ट में इसे लेकर याचिकाएं भी दाखिल की गई हैं, जिनमें NTA के पुनर्गठन या खत्म करने की मांग की गई है. अदालत ने सरकार से पूछा है कि NTA भविष्य में ऐसी गलतियां दोबारा न हों, इसके लिए क्या व्यवस्था बनाएगी. माना जा रहा है कि NTA में सुधार पहला बड़ा कदम हो सकता है.
परीक्षा प्रक्रिया को सुरक्षित बनाना
प्रश्न पत्रों की छपाई से लेकर परीक्षा केंद्रों तक उनको पहुंचाना, इस प्रक्रिया को सही और सुरक्षित करना सबसे अनिवर्य है. केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को पहले ही सूचित कर दिया है कि वह इस प्रक्रिया को और सख्त बना रही है. सरकार को केवल वादे करने से काम नहीं चलेगा, बल्कि इसे वास्तव में कारगर साबित करना होगा.
तेज और पारदर्शी परिणाम
साथ ही CBSE की ऑन-स्क्रीन मूल्यांकन प्रक्रिया में हुई गड़बड़ियों और अंकन प्रणाली ने छात्रों का सिस्टम से रातोंरात भरोसा तोड़ दिया है, जिससे यह साफ हो गया है कि परीक्षाओं में तेज और पारदर्शी परिणाम कितने जरूरी हैं. इस तरह की गड़बड़ियों से निपटने और पारदर्शिता लाने के लिए अब दिल्ली उच्च न्यायालय ने लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 के तहत आने वाले मामलों की सुनवाई के लिए एक पीठ का गठन किया है.
समिति का गठन
सरकार को तब तक एक स्थायी उच्च-स्तरीय निगरानी समिति बनानी चाहिए जब तक जनता का परीक्षाओं से भरोसा पूरी तरह वापस न आ जाए. इस कमेटी में सेवानिवृत्त न्यायाधीश, साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ और फोरेंसिक वैज्ञानिक जैसे स्वतंत्र एक्सपर्ट्स को शामिल किया जाना चाहिए ताकि परीक्षाओं की निगरानी निष्पक्ष तरीके से हो सके और लोग इन पर फिर से विश्वास कर सकें.
परीक्षा नहीं नौकरी के बारे में भी सोचे
पेपर लीक होने पर भड़के गुस्से के पीछे एक बड़ी और पुरानी निराशा भी दिखाई देती है. सुरक्षित नौकरियों की घटती संख्या के लिए संघर्ष, प्रदर्शनकारियों ने बार-बार परीक्षा घोटालों को भारत के बेरोजगारी संकट से जोड़ा है. केवल राष्ट्रीय परीक्षा प्रणाली (एनटीए) को सुधारने से यह समस्या हल नहीं होगी. सुधार गंभीर हैं. इसके लिए परीक्षा से ऊपर सोचना होगा.
क्यों और कब हुआ ये सब?
इसकी शुरुआत NEET-UG 2026 से शुरू हुआ. पेपर लीक से शुरू हुआ ये विवाद इस्तीफे पर आकर रुक गया है. अभी एनटीए को लेकर यह विवाद थमा भी नहीं था कि CBSE की ऑन-स्क्रीन मार्किंग प्रणाली ने हजारों छात्रों को इस बात को लेकर अनिश्चित कर दिया कि उनके परिणाम सही भी हैं या नहीं.
सालों से गुस्से में हैं छात्र
नौकरी की चिंता कर रहे छात्रों के लिए परीक्षाओं में डेटा लीक (NEET, SSC, UGC-NET आदि) का आखिरी झटका था, जिससे उनका सालों का गुस्सा फूट पड़ा है. छात्रों का कहना है कि कई परीक्षाएं प्रभावित होने से अब करियर बनना एक निष्पक्ष मौका न रहकर सिर्फ किस्मत की लॉटरी बनकर रह गया है.
प्रधान पहले नहीं...
बता दें कि प्रधान जाने वाले पहले व्यक्ति नहीं थे. दो दिन पहले ही सरकार ने शिक्षा विभाग में बड़ा फेरबदल किया था. विनीत जोशी, जो शिक्षा विभागों के साथ-साथ एनटीए के प्रमुख भी रह चुके थे, उनको उनके पद से हटाकर पंचायती राज मंत्रालय में भेज दिया गया है. इसके बाद से नरेश पाल गंगावार ने उच्च शिक्षा सचिव का पद संभाला. टी.के. अनिल कुमार विद्यालय शिक्षा सचिव बनें.