अमेरिका के रहने वाले 16 साल के एक लड़के ने कमाल कर दिखाया है. जहां भारत में इस उम्र में बच्चे अपनी पढ़ाई पर फोकस करते हैं, वहां इस लड़के ने केवल 48.4 हजार रुपये लगाकर ऑनलाइन रीसेलिंग का बिजनेस शुरू किया है. एथन एलेक्जेंडर ने वॉलमार्ट से सामान खरीदकर अमेजन पर बेचना शुरू किया. बिजनेस इनसाइडर की रिपोर्ट के मुताबिक, उसने पहले ही महीने में करीब 10,000 डॉलर (लगभग 9.7 लाख रुपये) की बिक्री की. बाद में उसकी हर महीने की बिक्री बढ़कर 25,000 डॉलर (करीब 24 लाख रुपये) से ज्यादा हो गई.
उनकी कहानी ऑनलाइन रीसेलिंग के बढ़ते कारोबार की एक झलक पेश करती है, जहां उद्यमी कम कीमतों पर उत्पाद खरीदते हैं और उन्हें ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर ज्यादा कीमत में बेचते हैं. यह मॉडल तब चर्चा में आया जब अधिक से अधिक लोग ऑनलाइन बिक्री को एक अतिरिक्त आय या अपना व्यवसाय खड़ा करने के तरीके के रूप में अपनाने लगे.
ऑनलाइन रीसेलिंग का कैसे होता है काम?
बता दें कि ऑनलाइन रीसेलिंग में काम कम कीमत से शुरू होता है. सामान को कम दाम पर खरीदकर उसे ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के जरिए ज्यादा कीमत पर बेचा जाता है. विक्रेता सामान खुदरा दुकानों, थोक विक्रेताओं, डिस्काउंट सेल या दूसरे सप्लायर्स से खरीदते हैं और फिर उसे ऑनलाइन बेचते हैं.
इसका एक तरीका रिटेल आर्बिट्रेज कहलाता है. इसमें विक्रेता दुकानों या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर छूट के साथ मिल रहे उत्पाद खरीदते हैं और उन्हें अमेजन जैसे प्लेटफॉर्म पर ज्यादा कीमत पर बेच देते हैं. रोजमर्रा के इस्तेमाल का सामान, पर्सनल केयर प्रोडक्ट, कपड़े, खिलौने और इलेक्ट्रॉनिक सामान इस बिजनेस का हिस्सा हो सकते हैं.
विक्रेता सामान का स्टॉक रखने, पैकिंग करने और डिलीवरी भेजने का काम खुद कर सकते हैं. वे चाहें तो ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म की फुलफिलमेंट सेवाओं की मदद भी ले सकते हैं. इन सेवाओं से सामान भेजने का काम आसान हो सकता है, लेकिन इनके लिए लगने वाले शुल्क को भी बिजनेस के खर्च में जोड़ना जरूरी है.
भारत में कैसा है मार्केट?
ये तो हो गई अमेरिका की बात लेकिन भारत में इसे लेकर किस तरह का ट्रेंड है चलिए जानते हैं. भारत में ई-कॉमर्स का कारोबार बढ़ने के साथ ऑनलाइन रीसेलिंग के मौके भी बढ़ रहे हैं. अमेजन इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, सितंबर 2026 में उसके मार्केटप्लेस पर विक्रेताओं की संख्या 20 लाख से ज्यादा हो गई. पिछले एक साल में इसमें तीन लाख से अधिक नए विक्रेता जुड़े हैं.
अमेजन इंडिया के अनुसार, 28,000 से ज्यादा विक्रेता उसके Product Opportunity Explorer टूल का इस्तेमाल कर रहे हैं. यह टूल विक्रेताओं को सामान खरीदने में पैसा लगाने से पहले ग्राहकों की मांग समझने, खरीदारी के ट्रेंड जानने और बाजार में प्रतिस्पर्धा का अंदाजा लगाने में मदद करता है.
वहीं, पहले से इस्तेमाल किए गए सामान को दोबारा बेचने का बाजार भी बढ़ रहा है. PayNXT360 की रिपोर्ट के अनुसार, भारत का रीसेलिंग बाजार 2026 में 11.7% की सालाना दर से बढ़कर 5.91 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है. इसमें इस्तेमाल किए जा चुके सामान की दोबारा बिक्री शामिल है. यह नए उत्पादों की खुदरा बिक्री से अलग है.
क्या ऑनलाइन रीसेलिंग से कमाई हो सकती है?
ऑनलाइन रीसेलिंग ई-कॉमर्स में कारोबार शुरू करने का एक तरीका हो सकता है लेकिन कम कीमत पर सामान खरीद लेना ही मुनाफे की गारंटी नहीं है. विक्रेताओं को प्लेटफॉर्म का कमीशन, सामान की डिलीवरी, स्टोरेज, विज्ञापन, रिटर्न और बिना बिके स्टॉक पर होने वाले खर्च का भी हिसाब रखना पड़ता है.
यह समझना जरूरी है कि ज्यादा बिक्री होने का मतलब हमेशा ज्यादा मुनाफा होना नहीं है. कोई उत्पाद तेजी से बिक सकता है, लेकिन सभी खर्च निकालने के बाद उससे कम कमाई हो सकती है. वहीं, ग्राहकों की मांग का अंदाजा लगाए बिना ज्यादा सामान खरीदने पर स्टॉक बिना बिके भी रह सकता है.
जो लोग अपना कारोबार शुरू करना चाहते हैं, उनके लिए रीसेलिंग बिना खुद उत्पाद बनाए ई-कॉमर्स बिजनेस को समझने का एक विकल्प है. हालांकि, लंबे समय तक कारोबार चलाने के लिए बाजार की मांग समझना, स्टॉक को सही तरीके से संभालना और खर्चों पर नजर रखना जरूरी है. यानी ऑनलाइन रीसेलिंग में चुनौती सिर्फ सस्ता सामान खरीदकर महंगे दाम पर बेचना नहीं है. असली बात यह है कि सभी खर्च निकालने के बाद हर बिक्री से कितना मुनाफा बच रहा है.