अमेरिका में 3 नवंबर 2026 को मिड-टर्म चुनाव होने वाले हैं. इन चुनावों में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी को कांग्रेस में अपनी स्थिति बचानी है. इसी बीच ईरान के साथ चल रहा युद्ध आठवें महीने में प्रवेश कर चुका है. वॉल स्ट्रीट जर्नल जैसी रिपोर्ट्स के अनुसार ट्रंप ने ईरान के सात दिन के युद्धविराम प्रस्ताव को ठुकरा दिया है. उन्होंने अपने सहयोगियों से कहा है कि चुनाव के बाद बमबारी फिर शुरू होने की संभावना है.
ट्रंप का मानना है कि ईरान चुनाव तक इंतजार कर रहा है ताकि अमेरिका में कमजोर सरकार आए. दूसरी तरफ उन्होंने कभी-कभी यह भी कहा है कि युद्ध चुनाव के तुरंत बाद खत्म हो सकता है. ये बयान मिलाजुला संदेश देते हैं और अनिश्चितता बढ़ाते हैं.
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अमेरिका ने मिडिल ईस्ट में अपनी सैन्य मौजूदगी काफी बढ़ा दी है. रिपोर्ट्स के मुताबिक तीसरा एयरक्राफ्ट कैरियर यूएसएस थियोडोर रूजवेल्ट क्षेत्र की ओर रवाना हो चुका है. इसके साथ एम्फीबियस ग्रुप भी जा रहा है जिसमें हजारों मरीन सैनिक शामिल हैं.करीब नौ से दस हजार अतिरिक्त सैनिक भेजे जा रहे हैं.
पहले से ही दो कैरियर यूएसएस जॉर्ज एच डब्ल्यू बुश और यूएसएस जॉर्ज वाशिंगटन क्षेत्र में मौजूद हैं. अक्टूबर या नवंबर के अंत तक तीन कैरियर एक साथ हो सकते हैं. इसके अलावा फाइटर जेट्स जैसे F35 और पहले से मौजूद करीब पचास हजार सैनिक क्षेत्र में हैं. यह तैनाती 2003 के बाद सबसे बड़ी नौसैनिक जमावड़े में से एक मानी जा रही है. पेंटागन का कहना है कि इससे राष्ट्रपति के पास ज्यादा विकल्प होंगे.
क्या ईरान के पास सिर्फ एक महीना बचा है?
यह सवाल कई लोगों के मन में है लेकिन जवाब पूरी तरह निश्चित नहीं है. चुनाव के बाद ट्रंप नए हवाई हमलों का आदेश दे सकते हैं क्योंकि रिपोर्ट्स में यही संभावना जताई गई है. लेकिन कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है कि हमले जरूर होंगे या युद्ध खत्म होगा.
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ईरान ने युद्धविराम का प्रस्ताव दिया था जिसमें स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खोलने और परमाणु बातचीत शुरू करने की बात थी. ट्रंप इसे पर्याप्त नहीं मानते और कहते हैं कि ईरान अपनी मांगें पूरी नहीं करेगा. सैन्य तैयारी दबाव बनाने का तरीका भी हो सकती है ताकि बातचीत में बेहतर सौदा मिल सके. दोनों तरफ से आर्थिक नुकसान हो रहा है. तेल की कीमतें बढ़ी हैं. ईरान के बंदरगाहों पर नाकाबंदी का असर पड़ रहा है.

मिड-टर्म चुनाव ट्रंप के फैसलों को प्रभावित कर रहे हैं. रिपब्लिकन पार्टी युद्ध को चुनाव से पहले ज्यादा न बढ़ाने की कोशिश में है क्योंकि यह अलोकप्रिय हो सकता है. चुनाव के बाद स्थिति बदल सकती है. अगर ट्रंप की पार्टी अच्छी स्थिति में रहती है तो वे ज्यादा सख्ती बरत सकते हैं.
अगर नतीजे कमजोर आए तो कूटनीति का रास्ता भी खुला रह सकता है. ईरान की तरफ से भी आर्थिक दबाव बढ़ रहा है इसलिए वे बातचीत चाहते हैं लेकिन अपनी शर्तों पर. विशेषज्ञ मानते हैं कि तीन कैरियर की मौजूदगी सिर्फ हमले के लिए नहीं बल्कि रक्षा और दबाव बनाने दोनों के लिए है.
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भविष्य की अनिश्चितता
अभी कोई फैसला अंतिम नहीं है. ट्रंप के बयान बदलते रहते हैं. एक तरफ वे हमलों की बात करते हैं तो दूसरी तरफ समझौते की संभावना भी छोड़ते हैं. सैन्य तैयारी से क्षेत्र में तनाव बढ़ गया है लेकिन यह जरूरी नहीं कि बड़े पैमाने पर जमीनी युद्ध हो.
हवाई हमले या नौसैनिक कार्रवाई की संभावना ज्यादा बताई जा रही है. दोनों देश अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश में हैं. नवंबर के बाद ही साफ होगा कि ट्रंप हमले बढ़ाते हैं या बातचीत का रास्ता अपनाते हैं. फिलहाल तैयारियां दोनों तरफ से जारी हैं और क्षेत्र में अस्थिरता बनी हुई है.